इल्तुतमिश का मकबरा अलाई दरवाजा बलबन का मकबरा कहां है और किसने बनाया था

महरौली में बलबन का मक़बरा किसने बनवाया

इल्तुतमिश का मकबरा अलाई दरवाजा बलबन का मकबरा कहां है और किसने बनाया था महरौली में बलबन का मक़बरा किसने बनवाया

गुलाम वंश के शासक इल्तुतमिश का मकबरा । यह मकबरा एक चौकोर कक्ष के ऊपर गोल गुंबद के आकार में निर्मित है । स्क्विज मेहराब स्थापत्य कला में यह चौकोर कमरे के ऊपरी कोणों पर निर्मित एक सरचना है जो कि अष्टकोण या फिर फिर गोलाकार गुंबद के आकार के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ।

यह भारत का पहला स्मारक है जिसमें इस प्रकार की संरचना का उपयोग किया गया है । इस जटिल संरचना पर खड़ा गुंबाद दुर्भाग्यवश किसी समय ढेह गया होगा । कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा इमारत की संरचनात्मक खामियों की वजह से हुआ होगा ।

अलाई दरवाजा

इसका निर्माण सन 1311 ईस्वी में एक गुंबदाकार सरंचना के रूप में बनाया गया था । अलाई दरवाजा की मुख्य संरचना एक होल है । जिसके गुंबद की छत से 14.3 मीटर ऊंची है । धंसे हुए कोने के मेहराब घोड़े के नाल की तरह लगती है । यह संरचना एक चौकोर कमरे पर गोलिये गुंबद को सहारा देती है ।

यह गुंबद को सहारा देने के दौरान सामने आने वाली समस्या का आसान सा हल है । गुलाम शासकों ने वास्तविक इस्लामिक स्थापत्य शैली का इस्तेमाल नहीं किया । उन्होंने कृत्रिम गुंबदो तथा बनावटी मेहराब का उपयोग किया । इसी प्रकार अलाई दरवाजा बना जो कि भारत वास्तविक मेहराब तथा वास्तविक गुंबद सबसे पहला उदाहरण है ।

घोड़े की नाल के आकार की मेहराब

इसके तीन दरवाजों में पूर्व ,पश्चिम तथा दक्षिण मैं घोड़े की नाल के आकार की मेहराब है । उत्तरी प्रवेश द्वार आधा गोलिये मेहराब की तरह निर्मित है । जब भारत में स्थानीय निर्माण करता गुंबद निर्माण की कला में माहिर हो गए तो उन्होंने आर्ध गुंबद बनाएं ।

यह ऐसे गुंबद थे जो कि पूरी तरह से अर्ध गोलिये गुंबद ढांचे के सम्मान नहीं थे । अधिकतर 15वीं शदी तक इमारतों में अर्ध गुबंदो का इस्तेमाल होता था ।

केवल लोधी शासक 1451 से 1526 के दौरान गुंबद में पूरी तरह से अर्थ गोलीये संरचना का आरंभ हुआ ।

हुमायूं का मकबरा पहला फारसी गुंबद

हुमायूं का मकबरा पहला फारसी गुंबद था जो की बेहतरीन अर्ध गोलिये था । अब हम 1570 ईस्वी में बने हुमायूं के मकबरे के बारे में विस्तार से जानने का प्रयास करेंगे ।

इसे मुगल स्मारक शैली का विशेष उदाहरण माना जाता है । इस गुंबद ने ऐसे नियमों को निर्धारित किया जो कि आगे चलकर मुगल मकबरा जैसे कि ताजमहल के निर्माण की प्रेरणा मिली ।

यहां पर ज्यामितीय व्यवस्था से निर्मित चार बगीचा है । जिसमें अनेक केंद्रीय जल नालीकाऐं है । जोकि जन्नत का प्रतीकात्मक रूप है । इसके निर्माण में बलुआ पत्थर तथा मार्बल का प्रयोग किया गया है ।