ऐसा कौन सा जानवर है जिसे परमाणु बम भी मार नहीं कर सकता है

परमाणु विजेता कोकरोच क्या सचमुच कॉकरोच झेल सकते हैं न्यूक्लियर हमला?

परमाणु विजेता कोकरोच । ऐसा कौन सा जानवर है जिसे परमाणु बम भी मार नहीं कर सकता है ?

 ऐसा कौन सा जानवर है जिसे परमाणु बम भी मार नहीं कर सकता है

क्या सचमुच कॉकरोच झेल सकते हैं न्यूक्लियर हमला? क्या एक तिलचट्टा एक परमाणु विस्फोट जीवित रहने के लिए सक्षम हो सकता है? कॉकरोच परमाणु विस्फोट में बच जाएगा परमाणु विजेता कोकरोच क्या सचमुच कॉकरोच झेल सकते हैं न्यूक्लियर हमला? ऐसा कौन सा जानवर है जिसे परमाणु बम भी मार नहीं कर सकता है ?

क्या कॉकरोच इतने सख्त जान मजबूत होते हैं की परमाणु बम भी कुछ नहीं बिगाड़ पाता है।

1 – किसी भी परमाणु के सिलसिले में सबसे ज्यादा अहमियत होती है रेडिएशन की । रेडिएशन के प्रभाव को गरेज में मापा जाता है

2 – एक इंसान रेडिएशन के करीब 10 गरेज का सामना कर सकता है । बदकिस्मती से दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान करीब 100 गरेज के रेडिएशन निकले थे ।

3 – 10 में से एक कॉकरोच 100 गरेज रेडिएशन का सामना करके बच सकता है । ऐसे धमाके के बाद किसी भी कॉकरोच को 1 महीने में सिर्फ एक बार खाने की जरूरत होती है ।

4 – तब वह किसी भी मरी हुई या फिर सड़ी हुई चीज को खा कर के अपना गुजारा कर सकता है । धमाके में अपना सिर उड़ जाने के बावजूद भी 1 हफ्ते तक जिंदा रह पाएगा ।

कॉकरोच इतने मजबूत कैसे होते हैं ?

1 – कॉकरोच के शरीर की प्रणाली बहुत ही सरल होती है । इनके सेल्स हमारे मुकाबले ज्यादा धीमी गति से बंटते हैं । इसलिए यह रेडिएशन के खतरे का सामना बेहतर तरीके से कर सकते हैं ।

2 – लेकिन कॉकरोच को रेडिएशन का बादशाह नहीं कह सकते हैं । यह रुतबा मिला है बदबूदार लाल लाल रंग के बैक्टीरिया डाइनो कोकस रेडियोडूरांस को । इसे गोनन दा बैटरीयम भी कहते हैं ।

3 – इसको 1956 में खोजा गया था । यह डिब्बा बंद गोश्त के अंदर छिपा हुआ था । करीब से जांच पड़ताल में इसकी जबरदस्त ताकत का पता चला ।

4 – यह रेडिएशन के 12000 गरेज को भी झेल सकता है यानी कि 120 बम के रेडिएशन के बराबर के रेडिएशन को झेल सकता है ।

5 – अब हम जानेंगे कि इस बैक्टीरिया में इतना रेडिएशन झलने की काबिलियत कैसे पनपी ।

6 – कुछ वैज्ञानिकों को लगता है कि यह मंगल ग्रह से पृथ्वी पर पहुंचा है । यानी कि पृथ्वी पर मंगल वासियों ने बस्तियां बसा ली है ।

7 – रशियन तथा अमेरिकन वैज्ञानिकों की एक टीम को यह लगता है कि गोनन जैसे बैक्टीरियम मंगल ग्रह से ही आया हो सकता है ।

8 – क्योंकि मंगल ग्रह पर रेडिएशन का बैकग्राउंड लेवल पृथ्वी के मुकाबले कहीं ज्यादा है। किसी महाविनाश के बाद में क्या यह एलियन बैक्टीरिया पृथ्वी पर कब्जा कर लेंगे । ऐसा मुमकिन है ‌।