प्रेत बाधा दूर करने के उपाय प्रेत बाधा से मुक्ति के उपाय

प्रेत बाधा दोष शांति के उपाय भूत भगाने के 10 सरल उपाय प्रेत बाधा दूर करने का मंत्र

प्रेत बाधा दोष शांति के उपाय भूत भगाने के 10 सरल उपाय प्रेत बाधा दूर करने का मंत्र

अगर आप पूर्व में पोस्ट किये गए संकेतो के कारण सुखों को पाने में परेशानी महसूस कर रहे हो या कुण्डली में बनी शनि-राहु की युति से प्रभावित हो, तो

यहां जानते हैं सुखों का आनंद लेने के लिए हनुमान भक्ति और शनि-राहु युति की दोष शांति के सरल उपाय को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें।

1 – मजदूरों को तम्बाकु की पुडिया दान दे । ऐसा 43 दिन करे आपको कभी यह योग बुरा फल नहीं देगा क्योंकि मजदूर रुपी शनि है और तम्बाकु राहु है, जब मजदूर रुपी शनि तम्बाकु को खायेगा तो अच्छा तम्बाकु ग्रहण कर लेगा और बुरा राहु बाहर थुक देगा ।

सीधी बात है शनि अच्छा राहु ग्रहण कर लेगा और बुरा राहु बाहर थुक देगा । आप यह उपाय जरूर कीजिये । मैने हजारो लोगो पर इस उपाय को आजमाया है ।

2 – शनिवार की सुबह यथासंभव जितना जल्दी हो सके उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र पहनें। एक शुद्ध जल या उसमें गंगाजल मिलाकर घर के समीप या मंदिर में स्थित पीपल के पेड़ में जाकर चढ़ाएं।

पीपल की सात परिक्रमा करें । अगरबत्ती, तिल के तेल का दीपक लगाएं । समय होने पर गजेन्दमोक्ष स्तवन का पाठ करें। इसके बारे में किसी विद्वान ब्राह्मण से जानकारी ले सकते हैं।

3 – किसी मंदिर के बाहर बैठे भिक्षुक को तेल में बनी वस्तुओं जैसे कचोरी, समोसे, सेव, पकोड़ी यथाशक्ति खिलाएं या उस निमित्त धन दें।

4 – श्री हनुमान की प्रतिमा के सामने एक नारियल पर स्वस्तिक बनाकर अर्पित कर दें। समयाभाव होने पर यह उपाय न केवल आपकी मुसीबतों को कम करते हैं

बल्कि जीवन को सुखी और शांति से भर देते हैं।
इनके अलावा समय होने पर शनिवार के दिन शनिदेव, श्री हनुमान और राहू पूजा की पंचोपचार पूजा और विशेष सामग्रियों को अर्पित करें ।

शनि मंत्र ऊँ शं शनिश्चराये नम: और राहू मंत्र ऊँ रां राहुवे नम: का जप करें ।

नियमित रूप से श्री हनुमान चालीसा का पाठ भी बहुत प्रभावी होता है।

शनिवार के दिन शनि मंदिर में जाकर लोहे की वस्तु सर से 11 बार उत्तर कर चढाएं या दान करें,

तिल का तेल का दीप जलाएं। तेल से बने पकवानों का भोग लगाएं।

श्री हनुमान जी को गुड़, चना या चूरमें का भोग लगाएं । सिंदूर का चोला चढाएं ।

राहु की प्रसन्नता के लिए तिल्ली की मिठाई का भोग और तेल का दीप लगाएं ।

प्रेत श्राप का कुछ और अनुभूत उपाय निम्न प्रकार हैं । जिनसे जातक लाभान्वित हो सकते हैं ।

शुक्रवार रात्री को तकिये के नीचे एक रुपया का सिक्का रखकर सोएँ तथा सुबह उठकर उस सिक्के को शमसान में बाहर से फेंक दें।

शनिवार से प्रारम्भ कर 11 लौंग अपने ऊपर से सात बार उल्टा वारकर आग में 11 दिन तक लगातार जलायें।

सिन्दूर तथा राई को सिर से सात बार वारकर 11 दिन तक जलायें।

काले कुत्ते को चार माह तक दूध, ब्रेड या रोटी सरसो के तेल में चुपड़कर खिलाएँ ।

पीपल के पेड़ की सात परिक्रमा ॐ श शनैश्चराये नमः । ‘ॐ रां राहवे नमः’ मंत्र का काली हकीक की माला से जाप करते हुये करें । इसके बाद वही हनुमान चालीसा पढ़कर तिल्ली के तेल की मिठाई का भोग लगाएँ ।

दीप जलाकर शनि व राहू की आरती करें । मन्दिर के बाहर बैठे भिक्षुक को कचौड़ी, समोसे या नमकीन भुजिया खिलाएँ।

शनिवार को सरसों के तेल की मालिश करें। मन्दिर तक सवारी से न जाकर पैदल ही जाएँ । पश्चिम दिशा की ओर मुख करके, काले आसान पर बैठकर सूर्योदय से पहले ‘ॐ एं ह्रीं राहवे नमः’ तथा सूर्योदय के बाद
‘ॐ एं ह्रीं श्रीं श्रेष्ठायः नमः’ मंत्र का काले हकीक की माला से तीन माला जाप करें ।

शनि के साथ केतु

केतु चंद्रमा के दक्षिण नोड सिर के बिना एक शरीर है । इस समग्र दुनिया में जुदाई, अलगाव,आध्यात्मिकता, अहित का प्रतिनिधित्व करता है। राहु बातें
करना चाहता है और केतु बातें नहीं करना चाहता।

केतु कर्म है, राहु और केतु किसी भी ग्रहों के साथ बैठता है जब भी, हमारे अवचेतन मन में हताशा देकर आध्यात्मिक विकास प्रस्तुत करते हैं। शनि कर्म, सीमाओं, हीन भावना और जिम्मेदारी का ग्रह है।

यह राशि चक्र में 10 वीं, 11 वीं घर पर राज। ये घर जिम्मेदारी, वाहक, प्रतिष्ठा, उच्च महत्वाकांक्षा, धन,सामाजिक नेटवर्क का मुख्य घर हैं और आदि शनि जीवन में ग्रह सामग्री दुनिया और व्यावहारिकता है।

शनि पुराने लोगों, श्रम वर्ग , प्लम्बर की तरह हाथ से काम करते हैं, या इमारतों में काम करने वाले उन लोगों पर सहमत, हताशा का ग्रह है। दोनों ग्रह की प्रकृति, कुंठा ,जीवन में असंतोष, असहमत और चीजों के इनकार में चिंतित, दर्दनाक अनुभव में गंभीर
की हैं।

शनि के साथ केतु – जीवन में कुछ दुख का उत्पादन। केतु अध्यात्मवाद का ग्रह है और शनि ग्रह चुप्पी या ध्यान है। इसलिए केतु लोगों को परमात्मा के स्रोत के साथ कनेक्ट करने के लिए अद्वितीय क्षमता है ।

वे मन की शांति हासिल कर सकते है । उपाय केतु बाधा का ग्रह है। भगवान गणेश केतु का देवता है। भगवान गणेश से केतु के द्वारा बनाई गई बाधा को दूर करने के लिए पूजा करनी चाहिए।

शनि के लिए भगवान हनुमान की पूजा करनी चाहिए तथा रुद्राभिषेक कराना चाहिए एवं पलाश विधि से प्रेत मुक्ति के लिए नारायण बलि करना चाहिए । ये विधि किसीभी देवता के मंदिर में पंचमी एकादशी अथवा श्रवण नक्षत्र में करना उत्तम है।