सबसे बड़े जाने-माने बुद्धिमानी जानवर

बुद्धिमानी जीवो के जीते जागते उदाहरण दुनिया की सबसे बड़े जाने-माने बुद्धिमानी जानवर ।

बुद्धिमानी जीवो के जीते जागते उदाहरण दुनिया की सबसे बड़े जाने-माने बुद्धिमानी जानवर ।

जंगल में जिंदा रहना ही जिंदगी की सबसे बड़ी जीत है । यहां पर हर जानवर में अपने आपको हालात के मुताबिक ढाल दिया है । इन्होंने अपने अंदर कुछ खास गुण पैदा किए हैं ।

इन्होंने अपने शरीर में कुछ जरूरी बदलाव कर लिए हैं । यहां पर कुछ जानवर जिंदा है सिर्फ अपनी अकल मंदी के कारण । जो दिमागी ताकत से मालामाल है । अपनी जिंदगी को आसान बना लिया है ।

उसने मुश्किल से मुश्किल समस्या का हल निकालना सीख लिया है । खुद इतनी सूझबूझ से सोच समझकर प्लान बनाकर शिकार करते हैं । जिसके कारण वह आज सबसे ऊपर पहुंच चुके हैं । जिंदा रहने के लिए इन्हें कभी-कभी ऐसे दिमागी खेल भी खेलने पड़ते हैं ।

ऑस्ट्रेलिया का उत्तरी समुद्री किनारा यह समुद्र दुनिया के सबसे खतरनाक जानवरों का घर है और सबसे खतरनाक बात यह है कि पानी में छुपे इन हत्यारों के पास दिमाग होता ही नहीं है ।

यह बॉक्स जेलीफिश तो कुदरती तौर पर पैदा ही जान लेने के लिए हुई है । यह अपना शिकार ढूंढती है । अपने ढेर सारे विजुअल सेंसर की मदद से यह उसके पीछे पड़ जाती है ।

इसके 3 – 3 मीटर लंबे डेंटिकल्स पर 5- 5 हजार डंक होते हैं जो बहुत ही छोटे होते हैं । छूते ही किसी के भी अंदर जहर भर देते हैं ।

अपने सीधे-साधे विजुअल डेंटिकल्स की मदद से वह शिकार तो कर लेती है पर बायोलॉजिकली उसमें इंटेलिजेंस होती ही नहीं है ।

मगर दुनिया में ऐसे ऐसे अक्लमंद जानवर भरे पड़े हैं जिनकी सूझबूझ तथा नरमी को देख कर के आप चौक जायेंगे ।

थाईलैंड के अंदर जानवरों का एक समूह इतना होशियार हो गया है कि अकल मंडी में इंसान ही ऐसा है जो उसे टक्कर दे सकता है । ज्यादा लंबी पूछ वाले मकेक बंदर ज्यादातर पेड़ों पर ही रहते हैं और फल ही खाते हैं ।

सबसे बड़े जाने-माने बुद्धिमानी जानवर

जब समुद्र का पानी अंदर की तरफ जाता है, तब इन कमाल के मक्के के बंदरो ने सीफूड को खाना सीख लिया है । यह बंदर हर रोज दिन में दो बार यहां आते हैं और पानी के पीछे हटने का इंतजार करते हैं ।

पानी जब पीछे की तरफ हटता है , तब कुछ सेल्फिश इन्हीं चट्टानों पर ही पड़ी रह जाती है । लेकिन इन सीपी के खोल इतने सख्त होते हैं कि इन्हें तोड़ना आसान नहीं होता है । यह पत्थरों पर पटकने से भी जल्दी से नहीं टूटते हैं । पर कहते हैं ना जहां चाहा वहां पर खाना।

इनको खाने की चाह में बंदरों ने पत्थरों को ओजार के रूप में काम में लेना सीख लिया है । जैसा शायद कभी हमारे पूर्वजों ने किया होगा । आज यह बंदर भी पत्थरों से ओजार का काम ले रहे हैं ।

यह उन पर सही से पत्थर मारते हैं । जिनसे कि उनका खोल भी टूट जाए और खाना भी बर्बाद ना हो । इनकी अकलमंदी का एक और सबूत यह है कि यह अलग-अलग चीजों को तोड़ने के लिए अलग अलग आकार के पत्थरों का इस्तेमाल करते हैं । जैसे कि पत्थर से सीपी को अलग करने के लिए यह नुकीले पत्थरों का इस्तेमाल करते हैं ।

जबकि सेल्फीश , नट तथा केकड के लिए यह भारी पत्थर का इस्तेमाल करते हैं । दुनिया में शायद ही कोई दूसरा जानवर होगा जो कि पत्थर को इतनी अच्छी तरीके से औजार का काम लेता है ।

पत्थर को ओजार के रूप में काम लेने के लिए इन बंदरों को दूसरे बंदरों से सीखना पड़ता है । इनमें काफी वक्त भी लग सकता है । लेकिन आखिरकार बार-बार कोशिश करने से सभी सीख जाते हैं ।

दुनिया की सबसे बड़े जाने-माने बुद्धिमानी जानवर ।

यहां खाने को बहुत कुछ है । लेकिन ज्यादा देर के लिए नहीं है । यह बंदर तभी यहां पर आ सकते हैं , जब समुद्र का पानी पीछे हट जाता है । सीपियां तोड़कर खाने के लिए इनके पास कुछ ही घंटों का समय होता है ।

क्योंकि फिर समुद्र में जवारा जाता है और पूरा किनारा पानी में डूब जाता है । यह दुनिया की उन गिनी चुनी जगहों में से एक है । जहां पर क्लाइमेट इस तरह की होशियारी देखी जा सकती है । लेकिन ऐसा भी नहीं है कि औजार इस्तेमाल करने की यह ताकत सिर्फ क्लाइमेट में ही होती है ।

सख्त खोल वाले सीप व घोंघे समुद्री ऊदबिलाव को भी खाते हैं । यह जीव किनारे पर आने की बजाय अपना पत्थर अपने पास ही रखता है । यह चपटा पत्थर हमेशा उसके पेट पर रखा हुआ रहता है । यह सीपी तथा घोंघे को तोड़कर के मजे से समुद्र में खाता पीता हुआ चलता रहता है ।

बुद्धिमानी जीवो

वैसे औजारों का इस्तेमाल कुछ और जानवर भी कर रहे हैं । पूर्वी यूरोप की दो चिड़िया तक समझ चुकी है कि औजार उनका जीना कितना आसान बना सकते हैं

यह एक प्रकार का खतरनाक शिकारी है । जब यह चूहे को पकड़ता है और जब यह है उसे छोड़ता है, तब उसे नीचे गिरने से रोकने के लिए एक अजीब तरीके का इस्तेमाल करता है ।

यह अपने शिकार को एक कांटे में पीरो देता है । जिससे कि उसका शिकार भी जिंदा रहता है और वे उसे थोड़ा-थोड़ा खाते रहता है । शिकार को संभालने की यह होशियारी इस पक्षी में पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही है ।