अणिमा सिद्धि कैसे प्राप्त करें आखिर कैसे मिलती हैं बजरंगबली की 8 चमत्कारी सिद्धियां

हनुमान मारुति ने अणिमा सिद्धि को कैसे प्राप्त किया

अणिमा सिद्धि कैसे प्राप्त करें आखिर कैसे मिलती हैं बजरंगबली की 8 चमत्कारी सिद्धियां। हनुमान मारुति ने अणिमा सिद्धि को कैसे प्राप्त किया।

हनुमान जब सिद्धि लोक की यात्रा पर थे । तभी रास्ते में उसे एक वृद्ध महिला दिखाई दी जो कि काफी विलाप कर रही थी । तब हनुमान ने उनके विलाप का कारण पूछा ।

महिला ने विलाप का कारण हनुमान के सामने रखा कि उनके पुत्र की मृत्यु आज शाम तक हो जाएगी । तब हनुमान ने पूछा कि इसके पीछे का कारण क्या है

इसकी मृत्यु आज शाम तक ही क्यों हो जाएगी और आपको कैसे पता चले चला कि इसकी मृत्यु आज ही होगी । तब उस महिला ने अपनी आपबीती इस प्रकार से सुनाई ।

उस महिला ने बताया कि कुछ समय पहले की बात है हम पति और पत्नी थे । सन्यास के लिए एक ऋषि के आश्रम में पहुंचे । क्योंकि हमारे को कोई भी संतान की प्राप्ति हुई नहीं थी । इसलिए ऋषि के आश्रम में चल दिए ।

वहां पर पति पत्नी ने ऋषि की तन मन से खूब सेवा की । आखिरकार ऋषि अपनी सेवा से प्रसन्न होकर के उन्हें इच्छा अनुसार कुछ मांगने के लिए कहा । ऋषि को पहले से ही ज्ञात था कि इनके भाग्य में पुत्र योग लिखा ही नहीं है । फिर भी उन्होंने उत्तर प्राप्ति का कुछ उपाय निकाला ।

जब उन्होंने पूछा कि हमारे भाग्य में पुत्र योग लिखा ही नहीं है तो हमें पुत्र की प्राप्ति कैसे होगी । क्या विधि का विधान खंडित हो जाएगा । तब ऋषि ने बताया कि ने तो विधि का विधान खंडित होगा और आपको पुत्र की प्राप्ति भी होगी । तब उन्होंने पूछा कि किस प्रकार से पुत्र की प्राप्ति होगी ।

तब ऋषि ने बताया कि मेरी आयु में से अभी 11 वर्ष बाकी है । मेरी आयु अभी पूर्ण नहीं हुई है । मेरी आयु पूर्ण होने में अभी 11 वर्ष शेष बचे हैं । यदि मैं अपने 11 वर्ष की आयु आपके पुत्र के रूप में आप की कोख से जन्म ले करके आपको संतान का सुख प्रदान कर सकता हूं । यदि आप दोनों सहमत हो तो बताइए ।

इस पर दोनों पति पत्नी राजी हो गए और उन्होंने उस ऋषि की 11 वर्ष की आयु को स्वीकार कर लिया । ऋषि उस महिला के गर्भ में प्रविष्ट हो गए और उन्हें संतान की प्राप्ति हुई । इस प्रकार उस महिला ने यह अपनी आपबीती हनुमान को सुनाई ।

उस महिला ने हनुमान से कहा कि आज इनके 10 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और 11 वर्ष लगने वाला है । जैसे ही ग्यारवां बरस लगेगा । उसकी शाम को इसकी मृत्यु हो जाएगी । यह ऋषि ने उसी वक्त बता दिया था ।

आज इसकी 11 वर्ष पूर्ण होने के बाद आज की संध्या को इसकी मृत्यु निश्चित है । इसे कोई टाल नहीं सकता है । यह विधि का विधान है । तब हनुमान ने उन्हें बचाने का निर्णय लिया । लेकिन वह बचाते तो भी किस प्रकार से । इस प्रकार हनुमान ने उनको वचन भी दे दिया कि आपके पुत्र की मृत्यु को टाल दुंगा ।

जब उनके पुत्र की मृत्यु होने लगी तभी हनुमान ने अपनी योग सिद्धि से अपने सूक्ष्म शरीर को बाहर निकाल करके उस बालक के स्थूल शरीर में प्रवेश करवा दिया और इस प्रकार वह बालक जिंदा हो गया

जो बालक और महिला के भेष में थे वह सिद्धि अणिमा सिद्धि ही थी । उन्होंने भेष बदलकर हनुमान की इस प्रकार से परीक्षा ली ।

जैसे ही हनुमान ने अपना शरीर छोड़ा उसी समय हनुमान ने अणिमा सिद्धि को साध लिया और हनुमान को अणिमा सिद्धि ने उन्हें पुनर्जीवित कर दिया । इस प्रकार से हनुमान को अणिमा सिद्धि प्राप्त हुई ।