जानवरों की सुपर पावर का राज । जानिए जानवरों के पास कौन-कौन सी सुपर पावर होती है

कंगारू के बारे में रोचक तथ्य

जानवरों की सुपर पावर का राज । जानिए जानवरों के पास कौन-कौन सी सुपर पावर होती है

बहुत सार जी ऐसे होते हैं जिनके पास कानों के अलावा भी बहुत सारी ऐसी सुपर पावर होती है जो की गजब की सुनने की क्षमता देता है। अब आप इस लंबी पूंछ वाले बैनाडील चूहे को ही ले लीजिए ।

इसके सुनने की काबिलियत इतनी तेज होती है । यह रात के समय उड़ने वाले उल्लू के सरसराहट की आवाज को भी पहचान लेता है । इसकी बड़ी-बड़ी  टांगे इनको एक अलग ही पहचान देती है ।

जहां तक इनकी सुनने की बात की जाए तो उनके कानों की इंजीनियरिंग इतनी कमाल की होती है कि आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते हो । बेनाड्रिल चूहे के मध्यम आकार के कान का बड़ा पर्दा होता है । इसके साथ ही कान के नीचे वाला भाग भी बड़ा होता है ।

बेनाड्रिल चूहे के सुनने की क्षमता को कान के अंदर वाली हड्डी और ज्यादा बढ़ा देती है । क्योंकि इसके कान के अंदर एक ऐसी हड्डी होती है जो कि इसके सुनने की क्षमता को बढ़ा देती है ।

जिवो के ज्ञानेंद्रियों की शक्ति का उनके छोटा तथा बड़ा होने से कोई लेना देना नहीं होता है । जीव चाहे कितना ही छोटा हो या फिर बड़ा हो । यह उसके ज्ञानेंद्रियों पर निर्भर करता है । छोटे जिवो में सुनने की क्षमता सबसे ज्यादा होती है ।

हिरण के सुनने की शक्ति भी बड़े कमाल की होती है हिरण अपने सुनने की शक्ति के बल पर ही जंगल में जीवित रह पाता है । क्योंकि उन्हें शिकार का पता जल्दी से चल जाता है । जिसके बदौलत ही  जिंदा रह पाता है ।

पेट की गैस भगाने का सबसे सरल और सस्ता उपाय

क्योंकि हिरण के दोनों कान अलग-अलग होते हैं , जो कि अलग-अलग दिशाओं से आने वाली ध्वनि को पहचान सकते हैं । यह कान इन्हें यह सही सही बता देते हैं कि कौन सी आवाज कहां से आ रही है और कितनी दूर से आवाज आ रही है । इससे इन्हें पास आते खतरे को भांपने तथा अपने को बचाने का वक्त मिल जाता है ।

हिरण आवाज का पता लगाने में सक्षम होता है । वह आवाज को भांप सकता है कि कौनसी आवाज किस जानवर की है तथा किसकी है । इसका हिरण आसानी से पता लगा लेता है । जिसके बदौलत ही हिरण का शिकार करना नामुमकिन होता है ।

हिरण जानी पहचानी आवाजों को जान तथा पहचान सकता है । हिरण के ज्ञानेंद्रियों में सबसे महत्वपूर्ण शक्ति उसके सूंघने की शक्ति होती है । हिरण स्पेक्ट्रम के सबसे ऊंचे फ्रीक्वेंसी की आवाजों को सुन सकने में सक्षम होते हैं ।

चूहे को कुदरती रूप से अल्ट्रासोनिक आवाज सुनने की कुदरती शक्ति प्राप्त है । यानी की चूहे अल्ट्रासोनिक आवाजों को सुन सकते हैं । इसका मतलब है कि वह इंसान को सुनाई देने वाली आवाजों से भी ऊंची फ्रीक्वेंसी की आवाज को सुन सकते हैं ।चूहे कुछ ऐसी आवाजें भी निकालते हैं जिनको हमारे कान नहीं सुन पाते हैं । आप अंदाजा लगाइए यदि हम उनकी सारी आवाज को सुन पाते तो हमारा क्या होता है ।

बड़े सिर वाले जीव अल्ट्रासोनिक आवाज को सुन सकते हैं और उनके बड़े-बड़े कानों के बीच अच्छी खासी दूरी होती है । इसका सबसे अच्छा उदाहरण है हाथी । हाथी के कान कई कारणों से महत्वपूर्ण होते हैं
पहला कारण है हाथी अपने कानों को पंखे की तरह आगे पीछे हिला सकता है । जिसका उपयोग करके वह अपने शरीर को ठंडा रखने का काम करता है ।

हाथी के कानों में खून की नसों का जाल फैला हुआ रहता है जो कि इस के तापमान को नियंत्रित करता है । इंसानों को जो आवाज  सुनाई देती है हाथी को उससे 20 फ्रिक्वेंसी के नीचे की आवाजें भी सुनाई देती है जो अल्ट्रासाउंड कहलाती है । यह आवाजें एक हाथी को 6 किलोमीटर दूर से भी सुनाई दे जाती है ।इससे हाथियों को यह भी पता चल जाता है कि हथनिया कहां पर है तथा वे मिलन के लिए तैयार है या नहीं ।

मिलन के लिए तैयार होने के लिए हथनिया को 2 से 4 साल का वक्त लग जाता है। जब वह मिलन के लिए तैयार हो जाती है तब एक विशेष प्रकार की आवाज निकालती है । जिससे हाथियों को पता चल जाता है कि हथनिया मिलन के लिए तैयार है ।

आवाज को पहचानने में इनकी सूंड तथा बड़े-बड़े पैर भी इनके बड़े काम आते हैं । इनकी सूंड तथा पैरों में ऐसे रिसेप्टर होते हैं जो कि अल्ट्रासाउंड फ्रिकवेंसी की किरणों को पहचान लेते हैं ।

घर से चूहे भगाने का सबसे अच्छा तरीका।

जब भी आप किसी भी हाथी को अपनी सूंड को जमीन पर टिकाए तथा सतर्क मुद्रा में देखते हैं तब आप इस बात का अंदाजा लगाइए कि वह किसी ना किसी ध्वनि का पता लगाने की कोशिश कर रहा है ।
या तो वह दूर स्थित किसी हाथी के झुंड का पता लगा रहा है या फिर गरजते हुए बादलूं का पता लगा रहा है

बल्ब के चारों और कीड़े मकोड़े क्यों मंडराते हैं

चमगादड़ जैसे कान वाली लोमड़ी तथा हाथी के पास बड़े बड़े कान होते हैं जो कि उन्हें आवाज को बढ़ा चढ़ाकर के सुनाते हैं । जबकि एक जीव है सा है जिसके आवाज को बढ़ा चढ़ा कर सुनाने का आनंद कुछ और ही है । आसपास क्या हो रहा है यह जानना बहुत जरूरी है । क्योंकि संदेशों का लेनदेन जिंदगी तथा मौत का सवाल हो सकता है ।

इस बात को समझने के लिए आइए चलते हैं हम दुनिया के तीसरे सबसे बड़े टापू पर जो कि कुदरत के तूफानी मिसाज का दूसरा नाम है । इस जगह का नाम है बोर्नियो ।

यहां पर एक विशेष प्रकार का बंदर रहता है जो कि बंदर की प्रजाति का सबसे पुराना बंदर है । इस प्रजाति के बंदर की लंबी सूंड नुमा नाक होती है और यह बंदर एक अच्छा तेराक भी होता है । यह लंबी नाक खतरे के हालात में बाकी जीवो को जागरुक करने का काम भी करती है ।

खतरा महसूस होने पर इस बंदर की नाक सूज जाती है तथा एक साउंड चेंबर की तरह काम करने लगती है जब यह बंदर दूसरे जानवरों को सतर्क करने के लिए चिल्लाता है तब इसकी आवाज चेंबर की दीवारों से टकराकर की एक बहुत बड़ी आवाज का रूप ले लेती है ।

इसकी चीखे दूर-दूर तक सुनाई देती है । जिससे कि मादाओं को पता चल जाता है कि आसपास खतरा है जो कि इंसानों के रूप में मगरमच्छों के रूप में तथा किसी अन्य जानवर के रूप में भी हो सकता है बंदर की यह प्रजाति लगभग आज खत्म होने के कगार पर है ।

झिंगुर के कान उसके पेट में होते हैं यह अपने पिछले वाले टांगों के सुराग की मदद से आवाजों को सुनते हैं 

नर तथा मादा चमगादड़ एक दूसरे को रिझाने के लिए एक फ्रीक्वेंसी की आवाज निकालते हैं जो कि गाने के रूप में होती है । इस आवाज को शायद ही कोई सुन पाता है ।