अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर निबंध। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का उद्देश्य ।

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अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष कब से मनाया जाता है ? अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर निबंध

आज हम अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर निबंध हिंदी में लिखने जा रहे हैं । अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के बारे में विस्तार से जानेंगे । अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर निबंध। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का उद्देश्य ।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कब शुरू हुआ ?

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस एक मजदूर आंदोलन से उपजा था । यह घटना अमेरिका की है । अमेरिका में 15000 औरतों ने काम करने के घंटे को कम करने की मांग की थी ।

क्योंकि उस समय काम करने के घंटे काफी ज्यादा थे । महिलाओं ने मिलकर के काम के घंटों को कम करने के लिए एक आंदोलन चलाया ।

इसके अलावा उन महिलाओं की एक और मांग थी कि उन्हें अच्छा वेतन भी दिया जाए । इसके साथ ही उन्हें मतदान करने का अधिकार भी दिया जाए ।

इसके 1 साल बाद अमेरिकन पार्टी सोशलिस्ट ने पहली बार इस दिन को पहला राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित कर दिया ।

राष्ट्रीय महिला दिवस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस में कैसे बदला ?

राष्ट्रीय महिला दिवस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस में कैसे बदला यह आइडिया भी एक औरत का ही था ।

अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष कब से मनाया जाता है ?

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 1908 में न्यूयॉर्क सिटी से हुई थी । इसके ठीक 1 वर्ष पश्चात इस दिन को अमेरिका में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में घोषित किया गया ।

इसके बाद में 1910 में क्लार्क लारा ने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान इस दिन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का सुझाव दिया । इस सम्मेलन में करीब 17 देशों की 100 कामकाजी महिलाएं एकत्र थी ।

इन 17 देशों की सभी महिलाओं ने क्लार्क लारा के इस सुझाव का समर्थन किया । इसके बाद साल 1911 में सर्वप्रथम 19 मार्च के दिन कही देशों में यह दिन एक साथ मनाया गया था ।

इस तरह से यह प्रथम अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस था । परंतु अब तक इसे मनाने के लिए कोई निश्चित दिन नहीं था ।

इसके बाद सन् 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान रूस की महिलाओं ने तंग आकर के खाना और शांति के लिए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया ।

यह विरोध इतना संगठित रूप से किया गया था कि सम्राट निकोष को अपना पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा । इसके बाद में यहां पर महिलाओं को वोट देने का अधिकार भी मिला ।

रूसी महिलाओं ने इसी दिन इस हड़ताल की शुरुआत की थी । महिलाओं ने हड़ताल की शुरुआत की थी वह दिन 28 फरवरी का था ।

ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह दिन 8 मार्च का था । तभी से इसे थीम को यानी कि 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रुप में मनाया जाने लगा ।

इन सबके बावजूद भी इस दिन को आधिकारिक रूप से मान्यता कई वर्षों के बाद में मिली । इसे आधिकारिक रूप से 1975 में मान्यता प्राप्त हुई ।

इस दिन को संयुक्त राष्ट्र ने सबसे पहले एक थीम के रूप में बनाने का निश्चय किया । इसकी सबसे पहली थीम सेलिब्रेटिंग द पास हैंड प्लानिंग फॉर द फ्यूचर थी ।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का उद्देश्य ।

अब हम जानते हैं अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का उद्देश्य क्या है ? अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का उद्देश्य क्या है ? अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का मुख्य उद्देश्य था कि समाज में महिलाओं की भूमिका को सुदृढ़ बनाना था ।

महिला दिवस मनाने का सबसे मुख्य उद्देश्य पुरुष तथा महिलाओं में समानता बनाए रखना है । आज भी कई देश ऐसे हैं जहां पर महिलाओं को समानता का अधिकार प्राप्त नहीं है ।

महिला दिवस का मुख्य उद्देश्य यह भी था कि नारी को समाज में स्थान दिलाने के साथ-साथ उनकी शक्तियों से उसे अवगत कराना भी था ।

नारी समाज तथा देश दोनों के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । इस बात को समझाने के लिए भी एक थिम के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है ।

जहां पर महिलाओं को नौकरी में पदोन्नति में बाधा का सामना करना पड़ता है वही रोजगार के क्षेत्र में महिलाओं आज भी पिछड़ी हुई है ।

कई देशों में महिलाएं आज भी स्वास्थ्य तथा शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ी हुई है । उनके इस अधिकार को दिलाना था ।

इसके अलावा महिलाओं में हिंसा के प्रति मामले भी काफी ज्यादा हो रहे हैं । यदि महिला शिक्षित तथा उसके अधिकारों से परिचित होगी तो इस तरह के मामले कम हो जाएंगे ।

राजनीतिक क्षेत्र में अभी भी महिलाओं की संख्या पुरुषों से काफी कम है ।

महिलाओं का आर्थिक स्तर भी काफी पिछड़ा हुआ है इसको सुधारने का भी महिला दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य है ।

यदि हम इतिहास में नारी की बात करें तो नारी ने पुरुष की प्रतिष्ठा के लिए अपनी जान तक गंवा दी है । इसी के चलते हुए यह कहावत प्रचलित हुई कि हर सफल पुरुष के पीछे एक नारी का हाथ होता है ।

जब पहली बार वर्ष 2011 में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया था तब से लेकर 2019 तक यह 108 वां महिला दिवस है । जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है ।

वर्ष 1996 से लगातार किसी ना किसी रूप से महिला दिवस को मनाया जाता रहा है । इसे एक निश्चित थिम के साथ मनाया जा रहा है ।

सर्वप्रथम 1996 में इसकी थीम अतीत का भविष्य के लिए योजना है । इसके बाद लगातार हर साल एक नई थिम के साथ मनाया जा रहा है ।

अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष कब से मनाया जाता है ? अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर निबंध

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर निबंध

8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस । 8 मार्च को ही अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस क्यों मनाया जाता है ?

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं को सम्मान देने के लिए 1 दिन की घोषणा करनी पड़ी जिसे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के नाम से जाना जाता है ।

8 मार्च का दिन ही नारी के लिए ऐसा दिन होता है । जिस दिन नारी शक्ति के योगदान की पूरे विश्व में चर्चा की जाती है ।

हमारे समाज के निर्माण में जितना योगदान पुरुषों का होता है , उतना ही योगदान स्त्री का भी होता है । दोनों ही समाज के निर्माण में बराबर भागीदार होती है ।

परंतु जितना सम्मान समाज में पुरुषों को मिलता है , उतना सम्मान समाज में स्त्री को नहीं मिलता है । इसका प्रमुख कारण हमारे समाज की संकीर्ण सोच है ।

लेकिन आधुनिकता के इस दौर में समय काफी बदल चुका है । कुछ समय पहले नारी की महत्ता को बहुत ही कम समझा जाता था । लेकिन आज के आधुनिक युग में नारी को भी काफी कुछ अधिकार तथा सम्मान मिले हैं ।

आज नारी पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने की होड़ में लगी हुई है और अपना परचम भी लहरा रही है ।

पहले के समय में नारी को दुर्बल समझकर के रोका जाता था । लेकिन आज स्थिति बिल्कुल ही बदल गई है । आज नारी को पुरुषों के बराबर अधिकार मिल गया है ।

आज नारी हर क्षेत्र में आगे आपको मिल ही जाती है । चाहे वह खेलों में बात करें या फिर ओलंपिक की बात करें या फिर मुक्केबाजी की बात करें तो नारी आज हर क्षेत्र में आगे हैं ।

वर्तमान युग को नारी के उत्थान का युग कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति वाली बात नहीं है । क्योंकि आज महिला हर क्षेत्र में आगे हैं । आप जहां भी जाओगे आपको महिलाएं हर क्षेत्र में आगे ही मिलेगी ।

आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पताका लहरा रही है चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो , राजनीति का क्षेत्र हो या फिर कोई और क्षेत्र । हर क्षैत्र में महिलाएं अग्रणी है ।

इसके साथ ही सरकार भी महिलाओं को हर क्षेत्र महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार देकर के अच्छा कर रही है । जोकि महिलाओं के विकास के लिए रामबाण साबित होगा ।

आज के युग की नारी किसी भी पुरुष से कम नहीं है वह कंधे से कंधा मिलाकर के मेहनत करती है और अपने बलबूते के ऊपर खड़ी रहती है ।

महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है और ना ही कभी कम आंकना चाहिए । महिला हमेशा से ही आगे थी और आगे रहेगी ।