बच्चे की धड़कन कब आती है ? बच्चे की हार्टबीट कब आती है । Bacche ki heartbeat dhadkan kab aati hai .
बच्चे की धड़कन कब आती है ? बच्चे की हार्टबीट कब आती है । Bacche ki heartbeat dhadkan kab aati hai .

baby heartbeat all processe (बच्चे की धड़कन बनने की पूरी जानकारी) बच्चे की धड़कन कब बनती है? बच्चे कि धड़कन(heartbeat) कैसे बनती है? बच्चे की धड़कन कितने समय (time) में बनती हैं? अगर बच्चे की धड़कन सुनाई ना दे तो हम क्या करें?

तो चलिए दोस्तों आज हम आपको आपके हर एक प्रश्न (question) का उत्तर(answer) देते हैं। कि हम बच्चे की धड़कन यानी की हार्ट बीट ( heartbeat ) को कब महसूस कर सकते हैं। कब हमें पता चलता है कि मां के पेट में बच्चे की धड़कन पूरी तरह से बन चुकी है। शुरू के महीने में वह कैसे होती है।

Urine pregnancy test positive होता है लेकिन जब अल्ट्रासाउंड करवाया जाता है तब बच्चे की हार्ट बीट यानी की धड़कन ultrasound में दिखाई नहीं देती है । इस बात को लेकर के पति पत्नी वह ज्यादा ही परेशान हो जाते हैं । इसके कही कारण होते हैं , जिसकी वजह से बच्चे की हार्ट बीट नहीं बनती है या फिर नहीं दिखाई देती है । यदि प्रेगनेंसी मिसकैरेज ( miscarriage ) की तरफ जाती है तो भी बच्चे की heartbeat ultrasound में नहीं दिखाई देती है ।

यूरीन प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव मिलने के क्या क्या कारण होते हैं ? Urine pregnancy test positive milane ke kya Karan hote Hain .

यह बात तो आप सभी जानते होंगे कि महिला का मासिक चक्कर या पीरियड 28 से 30 दिनों का होता है जबकि महिला का ओवुलेशन डे 14 से 15 दिन का होता है । अर्थात पीरियड के 14 तथा 15 दिन के बाद शरीर से अंडा रिलीज ( egg release ) होता है ।

अंडा गर्भाशय में implant हो जाता है तब Pregnancy symptomspregnancy symptoms देखने को मिलते हैं । जब अंडा फर्टिलाइज हो जाता है तब हमारे शरीर में एक हार्मोन बढ़ने लगता है जिसे beta HCG hormone कहते है । जैसे ही महिला के शरीर में beta HCG हार्मोन बनने लगता है महिला के शरीर में पीरियड आना बंद हो जाते हैं । beta HCG हार्मोन महिला के शरीर में 9 महीने तक रहता है । इसीलिए 9 महीने तक महिला को पीरियड या मासिक चक्कर नहीं आता है ।

जब पीरियड या मासिक चक्कर नहीं आते हैं तब आप pregnancy test करते हो और आप आपका Urine pregnancy test positive होता है । beta HCG हार्मोन का यूरिन में मिलना और pregnancy kit का positive आना इस बात की ओर संकेत करता है कि फर्टिलाइज अंडा गर्भाशय में implant हो चुका है ।

बच्चा पूरे 9 महीने मां के यूट्रस ( uterus ) में रहता है और uterus में ही बच्चा बड़ा होता है । जब अंडा गर्भाशय में Implant हो जाता है तब यूट्रस की बाहरी परत गर्भनाल का निर्माण करती है और एक थैली बनाती है जिसमें एक फ्लूड होता है जिसे immunotec fluid कहते हैं । बच्चा 9 महीने तक जिस थैली में रहता है उसे gestational sac कहते हैं । जब पीरियड मिस होने लगते हैं तब gestational sac बनता है ।

जब यह gestational sac बनता है तब इसमें बच्चे के खाने का निर्माण होता है । इसमें एक थैली बनती है जिसका साइज 3mm से 5 mm तक का होता है , जिसमें बच्चे का खाना होता है । जिस थाली में बच्चे का खाना बनता है उसका size 3 mm से 5mm होता है । इसमें न्यूट्रिसियल चीजें होती है जिसे Yolk sac कहते हैं ।

Yolk sac बनने के 40 से 47 दिन बाद Yolk sac एरिया पर “C” टाइप ( C Type ) की आकृति बनती है । इस आकृति में एक तरफ बच्चे का सिर होता है तथा नीचे की तरफ बच्चे की पूंछ होती है । इस पूरे process को Fetal Pole बोला जाता है । Fetal Pole का मतलब Fetus या भ्रूण या बच्चा होता है ।

इस Fetal Pole के बनते समय यानी कि एक 41 से 49 दिनों के बीच में बच्चे की हार्ट बीट अल्ट्रासाउंड में दिखाई देती है और 41 से 49 के समय में बच्चे की हार्ट बीट बनती है । जब Fetal Pole का साइज 3mm, 4 mm हो जाता है तब बच्चे की हार्ट बीट अल्ट्रासाउंड में दिखाई देती है ।

माना जाता है कि मां के पेट में बच्चे की धड़कन (heartbeat) period cycle miss होने के 2 सप्ताह 5 दिन (2weeks 5days) के अंदर बनती है। ऐसा सुना गया है कि शुरुआती दिनों में मां के पेट में बच्चे की धड़कन हमें कम सुनाई देती है। बच्चे की धड़कन मां के पेट में हमें 5 सप्ताह (5weeks) बाद में सुनाई देती है।

बच्चे की धड़कन शुरुआती दिनों में 60-90 BPM (BPM-beat par minute) होती है। लेकिन जब हम 2 महीने (2month) बाद ही इसकी दोबारा से जांच करवाते हैं, तो बच्चे की धड़कन में सुधार (improvement) नजर आता है। तो यही धड़कन (heartbeat) 120-160 BPM होती है। जो कि साधारण (normal) होती है।

बच्चे की धड़कन का हमें पता तब चलता है जब पीरियड्स मिस (periosd miss) हो जाते हैं। पीरियड्स मिस होने के 2 सप्ताह और 5 दिन(2 week’s & 5 days) के बाद पता चलता है। लेकिन हमें बच्चे की धड़कन सुनाई 5 सप्ताह (5month) बाद में देती है।

अगर 6 सप्ताह (week’s ) के अंदर यानी कि 42 दिन के अंदर भी हमें बच्चे की धड़कन सुनाई ना दे तो हमें अल्ट्रासाउंड जांच करवानी चाहिए। हमें हर वक्त डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए। यह एक ऐसी प्रक्रिया होती है, जो महिलाएं करती है। इसका टाइम पीरियड(time period) नौ महीनों (nine months) का होता है।

महिलाओं को प्रेग्नेंसी के समय पीरियड्स क्यों नहीं आते हैं? Mahilaon ko pregnancy ke samay periods kyon nahin aate Hain

तो आइए हम आज आपको बताएंगे कि महिलाओं को प्रेग्नेंसी के समय पीरियड क्यों नहीं आते हैं। इसकी वजह क्या होती है ।

माना जाता है कि इन 9 महीनों में लड़कियों को पीरियड्स (periods) नहीं आते हैं। क्युकी इसकी वजह है कि महिलाओं के गर्भाशय में बच्चा पल रहा है । इसलिए महिलाओं को 9 महीने पीरियड्स नहीं आते हैं।

माना जाता है कि यह जरूरी नहीं है कि महिलाएं गर्भवती (pregnet) हो तभी पीरियड्स नहीं आते इसके अलावा भी बहुत सी वजह होती है । जैसे अगर कोई महिला ज्यादा तली हुई चीजें खाती है। तो भी पीरियड्स लेट आते है।

जब बच्चे की धड़कन बनने लगती है तो महिलाओं को क्या -क्या सावधानी बरतनी चाहिए? jab bacche ki ki Dhadkan banne lagti hai to mahilaon ko kya- kya savdhani bartani chahiye

तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि जब बच्चे की धड़कन बनना चालू होती है, तो शुरुआती दिनों में महिलाओं को अनेक प्रकार की सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि यह दिन महिला और उसके गर्भ में पलने वाले बच्चे के लिए बहुत ही मुश्किल दिन होते हैं।

माना जाता है कि जब बच्चे की धड़कन बनना शुरू (start) होती है तो महिलाओं को हर प्रकार की सावधानी बरतनी चाहिए,क्योंकि वह महिलाओं के बहुत ही नाजुक दिन होते हैं।

माना जाता है कि शुरुआती दिनों में अगर महिला अपना ख्याल नहीं रखती है तो बच्चे के गिरने(miscarriage) की बहुत संभावना (chances) होती हैं। इससे महिला को भी नुकसान पहुंच सकता है। इन दिनों महिला को अपने खानपान पर भी ध्यान देना चाहिए।

इन दिनों महिलाओं को सबसे ज्यादा दूध और फल खाना चाहिए, क्योंकि इससे उसको और उसके गर्भ में पलने वाले बच्चे को ताकत मिलती है। जिससे वह मजबूत बनती है।

माना जाता है कि महिला जो खाती है उसी से वह 9 महीने अपने पेट में पलने वाले बच्चे का पेट भरती है। इसलिए जितना हो सके इन दिनों महिलाओं को पोषण से भरपूर खाना खाना चाहिए। इन दिनों महिलाओं को वजन या कोई भारी समान नहीं उठाना चाहिए।

क्योंकि इसका प्रभाव महिला के गर्भ में पलने वाले बच्चे पर पड़ सकता है। और इसकी वजह से उसका नुकसान भी हो सकता है। यह दिन महिला और उसके गर्भ में पलने वाले बच्चे के लिए बहुत ही नाजुक दिन होते हैं।

जिसका महिला को पूरी तरह ख्याल रखना चाहिए। जिससे कि उसका होने वाला बच्चा एकदम स्वस्थ पैदा हो और उसे किसी भी प्रकार की कोई भी बीमारी ना लगे।

धड़कन (heartbeat) के लिए कितना समय इंतजार करें? Heartbeat ke liye ye Kitne time wait Karen

आज मैं बताती हूं कि एक बच्चे कि धड़कन बनने मैं कितना समय लगता है?और हमें केसे पता चलता है कि बच्चे की धड़कन बन गई है ? बच्चे में
धड़कन कितने समय में आ जाती है ? बच्चे में धड़कन कितने समय बाद नहीं आती है ?

माना जाता है कि एक बच्चे कि धड़कन हमें तब पता चलती है,जब महिला के पीरियड बंद हो जाते हैं। Period miss होने के 19 या 20 दिन के अंदर बच्चे की heartbeat बनना चालू हो जाती है।

लेकिन हमें बच्चे की धड़कन सुनाई 5 सप्ताह बाद सुनाई देती हैं तब माना जाता है कि 5 या 6 सप्ताह (5-6 week’s) बच्चे की सुनाई देने वाली धड़कन एक साधारण(normal) धड़कन (heartbeat) होती है। बच्चे की धड़कन 42 दिनों के बाद में सुनाई देती है ।

माना जाता है कि अगर हमें बच्चे की धड़कन 5 या 6 सप्ताह के अंदर सुनाई नहीं देती हैं ,तो बच्चे के गिरने (miscarriage) की संभावना(chances) होते हैं। यदि 5 सप्ताह के बाद धड़कन ना आए तो 2 सप्ताह तक ओर रुकना चाहिए , उसके बाद में भी ना आए तो यह किसी समस्या की ओर संकेत करता है ।

बच्चे की धड़कन के लिए आप 63 दिन तक इंतजार कर सकते हैं । यदि बच्चे की धड़कन 9 सप्ताह यानी की 63 दिन तक नहीं आती है , तब यह एक रिस्क फैक्टर होता है और यह आप पर निर्भर करता है कि आप इसे रखना चाहते हो या नहीं । क्योंकि इसके बाद में आप की मुश्किलें और बढ़ जाएगी और 63 दिन से अधिक की प्रेगनेंसी को गिराना बहुत ही मुश्किल होता है । इससे आपके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ेगा ।

गर्भवती महिला के लिए कौन सी दवाई(medicine) नुकसानदायक होती है? Garbhwati mahila ko kaun si dawai Nahin leni chahie .

तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि गर्भवती महिलाओं को किस प्रकार की medicine लेनी चाहिए या किस तरह की दवाई नहीं लेनी चाहिए।
क्योंकि इस समय गर्भवती महिला शरीर से बहुत ही कमजोर होती है। अगर वह बिना Doctor की सहायता के कोई भी medicine लेती है, तो उस को नुकसान भी हो सकता है।

माना जाता है कि Pregnancy के समय महिलाओं को हर कैसी दवाई नहीं लेनी चाहिए। कोई भी दवाई लेने से पहले अपने डॉक्टर से पूछ लेना चाहिए।

क्योंकि माना जाता है कि प्रेग्नेंसी के समय महिलाएं बहुत ही कमजोर हो जाती है। उनके शरीर की सहनशक्ति बहुत ही कम हो जाती है। और इसी लिए मिहिलाओ को अपने डॉक्टर से पहले पूछना चाहिए किसी भी Medicine को लेने के लिए।

अगर महिलाएं अपने doctor की सलाह लिए बिना प्रेगनेंसी में दवाई का सेवन करती है। तो उससे उस महिला की जान को भी खतरा हो सकता है,या उसके होने वाले बच्चे की जान को खतरा हो सकता है।

कहते हैं कि अगर महिलाएं प्रेग्नेंसी के समय कोई भी ऐसी वैसी दवाई ले लेती है, तो वह दवाई उस महिला के गर्भाशय में जाकर उसे और उसके बच्चे को अनेक प्रकार के नुकसान ( side effect ) पहुंचाती है।

इसलिए इन दिनों महिलाओं को सिर्फ वही दवाई लेनी चाहिए जो डॉक्टर ने उसके लिए लिख कर दी है अगर वह इसके अलावा कोई भी दूसरी दवाई लेती है तो पहले अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

कैसे पता करे कि अब बच्चे की धड़कन (heartbeat)आएगी या नहीं? Kaise pata Karen ki ab baby ki heartbeat aaegi ya nahin

तो आज मैं आपको आपके इस question का भी answer देती हूं कि हम बच्चे की धड़कन को कैसे सुन सकते हैं। हमें कब पता चलता है कि बच्चे की धड़कन बन गई है या नहीं ।

माना जाता है कि बच्चे की धड़कन महिलाओं के पीरियड्स मिस होने के बाद में सुनाई देती है और वह कम से कम 6 सप्ताह बाद सुनाई देती है।

लेकिन माना जाता है कि 2 सप्ताह(2 week’s) के बाद बच्चे की धड़कन बनना चालू हो जाती है। शुरुआती दिनों में बच्चे की धड़कन हमें बहुत कम सुनाई देती है। लेकिन धीरे-धीरे धड़कन बढ़ जाती है तो इसमें कोई भी डरने की बात नहीं होती है। यह बहुत ही साधारण (simple) बात है।

बच्चे की धड़कन जब बनना चालू होती है। तब महिला का शरीर बहुत ही कमजोर हो जाता है। माना जाता है कि प्रेग्नेंसी के समय महिला का हमें छोटे बच्चों की तरह ख्याल रखना चाहिए।

कहा जाता है कि इन दिनों गर्भवती महिलाओं को पोषण से भरपूर भोजन करवाना चाहिए। ताकि उसे और उसके गर्भ में पलने वाले बच्चे को ताकत मिले, जिससे वह आने वाले समय में स्वस्थ शरीर लेकर जन्म ले।

6 सप्ताह बाद अगर बच्चे की धड़कन सुनाई ना दे तो उसके कारण क्या क्या होते हैं? 6 सप्ताह बाद सोनोग्राफी में धड़कन सुनाई ना दे तो क्या करें ?

अगर 6 सप्ताह बाद बच्चे की धड़कन सुनाई ना दे तो इसके अनेक प्रकार के कारण होते हैं। जो कि हम आज आपको बताएंगे। हमारी कौनसी-कौनसी गलतियों की वजह से 6 सप्ताह तक बच्चे की धड़कन ने सुनाई नहीं देती हैं।

माना जाता है कि प्रेग्नेंसी के समय अगर महिलाए भारी सामान उठा लेती है तो इसकी वजह से उनकी गर्भाशय में नशे बन्द (block) हो जाती हैं। जिसके कारण भी बच्चे की वृद्धि होने में समय लग जाता है।

माना जाता है कि बच्चे को नुकसान भी पहुंच सकता है। जिसके कारण बच्चे की धड़कन नहीं सुनाई देती है। ऐसे भी कह सकते हैं कि अगर महिलाएं प्रेग्नेंसी के समय वक़्त से भोजन नहीं ग्रहण करती है, तो भी बच्चा कमजोर हो जाता है और इससे उसकी धड़कन बनने में समय लग जाता है।

प्रेग्नेंसी के समय में महिलाओं को क्या-क्या खाना चाहिए? Pregnancy ke time ladies Roko kya kya khana chahie.

तो चलिए आज मैं आपको बताती हूं कि प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को क्या-क्या खाना चाहिए। क्या नहीं खाना चाहिए।

माना जाता है कि प्रेग्नेंसी के समय महिला का शरीर बहुत ही कमजोर हो जाता है। जिसकी वजह से वह बहुत ही कमजोर हो जाती है। और इस हालत में उसे पोषण से भरपूर खाना खाना चाहिए। ताकि उसे और उसके गर्भ में पलने वाले बच्चे को ताकत मिले और उनका स्वास्थ्य बना रहे।

प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा फल और दूध का सेवन करना चाहिए। क्योंकि फल और दूध में अधिक मात्रा में प्रोटीन का होता है। जिससे महिला को और उसके गर्भ में पलने वाले बच्चे का स्वास्थ्य अच्छा रहता हैं।

माना जाता है कि प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं का मन सबसे ज्यादा खट्टी चीज मीठी चीज खाने का करता है। तो उस समय में महिलाओं की हर एक इच्छा पूरी करनी चाहिए। क्योंकि उस समय महिला के गर्भाशय में बच्चा होता है।

जिसकी वजह से महिलाओं को कभी क्या कभी क्या खाने की मन में आती है। इसलिए हमें गर्भवती महिला की हर एक बात माननी चाहिए। और उसका पूरा ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि गर्भवती महिला का शरीर बहुत ही नाजुक हो जाता है।

प्रेग्नेंसी के समय महिला का स्वभाव(mood) कैसा होता है? Pregnancy ke samay mahila Ka swabhav Kaisa hota hai .

तो चलिए आज मैं आपको बताती हूं प्रेगनेंसी में महिलाओं का स्वभाव किस तरह बदलता है? कैसा रहता है? और उसे हम कैसे सही कर सकते हैं?

कहते हैं कि प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं का स्वभाव बहुत ही अजीबोगरीब हो जाता है। क्योंकि उस समय वह एक ही शरीर में दो जान रखती है। एक खुद की और एक अपने बच्चे की इसलिए उसे हर छोटी छोटी बात पर गुस्सा आ जाता है।

कहते हैं कि प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं की बातों का बुरा नहीं मानना चाहिए। क्योंकि वह जान बूझकर ऐसा नहीं करती है। वह सब उसके स्वभाव की वजह से हो जाता है। इसलिए हमें उसकी बातों को अनदेखा या अनसुना कर देना चाहिए ताकि उसे बुरा ना लगे।

प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को हमें खुश रखना चाहिए। जो उसे सबसे ज्यादा पसंद होता है। हमें उस समय वही करना चाहिए ताकि उसका स्वभाव अच्छा रहे है चिड़चिड़ापन ना करें।

प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं का शरीर स्वस्थ कैसे रखें? Pregnancy ke samay mahilaon ko healthy kaise rakhe .

प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को अच्छे से कैसे रखें? क्या खिलाए? क्या पिलाएं? उनको कैसे संभाले? किन चीजों से उनको दूर रखें? किन चीजों को उनके सबसे पास रखें? उनसे कैसे बातें करें?

तो चलिए आज मैं आपको एक प्रेग्नेंट महिला की सारी जानकारी बताती हूं। कि हम उसे कैसे अच्छे से रख सकते हैं। उसका कैसे ख्याल रख सकते हैं।

1 . माना जाता है कि प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को सबसे ज्यादा खुशी उसके सबसे प्रिय इंसान के पास से मिलती है। जो घर में कोई भी हो सकता है। इसलिए प्रेग्नेंसी के समय महिला को ज्यादा से ज्यादा वक्त देना चाहिए।

ताकि वह बुरे ख्याल अपने मन में ना लाएं और एक सकारात्मक सोच बनाकर रखें। क्योंकि माना जाता है कि प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं के मन में सबसे ज्यादा नकारात्मक ख्याल आते हैं। जिससे वह नकारात्मक होती चली जाती है। और इससे वह खुद को और खुद के गर्भ में पलने वाले बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है।

2 . प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को सबसे ज्यादा पौष्टिक खाना खिलाना चाहिए। ताकि उसे ताकत मिले और साथ ही उसके मन की इच्छा को देखते हुए भी उसे खाना खिलाना चाहिए क्योंकि प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं के मन में कभी खट्टा तो कभी मीठा खाने की बहुत ही इच्छा होती है।

3 . प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को दूध, दही, जूस, छाछ, लस्सी, आदि चीजें भी पिलानी चाहिए ताकि उसका स्वास्थ्य एकदम सही रहे।

4 . प्रेग्नेंसी के समय महिला एकदम छोटे बच्चों की तरह हो जाती है। उसका मन भी बच्चों की तरह करने लग जाता है। इसलिए हमें प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को डांटना नहीं चाहिए। और प्यार से रखना चाहिए।

5 . प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को नकारात्मक चीजों से दूर रखना चाहिए। क्योंकि अगर प्रेगनेंसी के समय महिलाएं नकारात्मक चीजें देखती है। तो उनके मन में भी नकारात्मक सवाल आते हैं।

6 . प्रेग्नेंसी के समय हमें महिलाओं को खुले वातावरण में ले जाना चाहिए ताकि वह अपनी सोच को सकारात्मक रखें कभी नकारात्मकता की तरफ ना जाए।