अटलांटिक महासागर का रहस्य बरमूडा ट्रायंगल कहां पर है

बरमूडा ट्राइएंगल का रहस्‍य बरमूडा ट्रायंगल के रहस्य से उठा पर्दा

अटलांटिक महासागर का रहस्य बरमूडा ट्रायंगल कहां पर है

अटलांटिक महासागर का रहस्य बरमूडा ट्रायंगल कहां पर है

अटलांटिक महासागर का रहस्य बरमूडा ट्रायंगल कहां पर है बरमूडा ट्राइएंगल का रहस्‍य बरमूडा ट्रायंगल के रहस्य से उठा पर्दा

आज हम बरमुंडा ट्रायंगल में होने वाली अजीब घटनाओं के बारे में बात करेंगे । बरमुंडा ट्रायंगल में 1918 में साइक्लोप नाम का एक जहाज गायब हुआ था । जिसमें 300 से भी ज्यादा लोग मारे गए थे ।

बरमुंडा ट्रायंगल अंटार्टिका ओसियन में 13 लाख स्क्वायर किलोमीटर के इलाके में फैला हुआ है ।
यह इस दुनिया की सबसे अलग-थलग जगहों में से एक मानी जाती है । यहां से सबसे करीबी जमीन लगभग 11 सौ किलोमीटर दूर है । बरमुंडा ट्रायंगल को ढेर सारी जहाजों के गायब होने के लिए जिम्मेदार माना जाता है ।

कार्गो शिप यूएस साइक्लोप

आज से 100 साल पहले एक ऐसा जहाज गायब हुआ था जिसे लोग आज भी भूल नहीं पाए हैं । वह था कार्गो शिप यूएस साइक्लोप । 1918 में साइक्लोन 300 से भी ज्यादा लोगों के साथ बरमुंडा की तरफ रवाना हुआ । उसके बाद में उसे किसी ने भी नहीं देखा

तब से आज तक उसके अचानक गायब होने से लोग हैरान हैं । मायामी अमेरिका का सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट भी माना जाता है । यूएस साइक्लो को खासतौर से यूएस नेवी के लिए बनाया गया था । इसका काम था समुद्र के रास्ते हजारों टन कोयला लेकर पर जाना।

1918 में इस तरीके के जहाज को देखना बहुत ही मुश्किल काम था । यानी कि 1918 में इस तरह की जहाज बहुत कम थे । आज तो यह आम हो गए हैं ।

जब अमेरिका दूसरे वर्ल्ड वॉर में शामिल हुआ तब यूएसए साइक्लोप को उसे भेजा गया था। यह सफर उसका आखिरी सफर था । उसे काफी भारी सामान ले जाने के लिए दिया गया था।

साइक्लोप 10000 टन से भी ज्यादा मैगनीज तथा तथा स्टील का सामान लेकर जा रहा था जो कि गोला बारूद तथा गन बनाने के काम आता था । इसके लिए साइक्लो को बरमुंडा ट्रायंगल से होकर के गुजरना था ।

वह 4 मार्च 1918 को वहां से रवाना हुए तथा वह 9 मार्च 1918 के 2 दिन बाद उसे वहां पर पहुंच जाना चाहिए था पर ऐसा नहीं हुआ ।

यूएस नेवी में पहली बार इतने सारे लोग मारे गए थे जो की जंग में भाग नहीं ले रहे थे । बाद में इन्वेस्टिगेशन से पता चला कि साइक्लोप के दो इंजन में से एक इंजन ही काम कर रहा था और शायद जहाज ज्यादा पानी के अंदर तेर रहा था और नाव भी इधर उधर काफी हिल डूल रही थी ।

यूएस साइक्लोप उस समय का सबसे आधुनिक जहाज

यूएस साइक्लोप उस समय का सबसे आधुनिक जहाज था और वह ऐसा जहाज था जिसमें रेडियो लगा हुआ था । यह कहानी बरमूडा ट्रायंगल की सबसे बड़ी तथा रहस्यमई कहानियों में से एक है ।

बरमुंडा ट्रायंगल की खोज

बरमुंडा ट्रायंगल की खोज के 300 साल बाद भी इसे सिप का कब्रिस्तान माना जाता है । बरमुंडा में नाव के डूबने के अनेक कारणों में से एक कारण कोरल रिफ भी है ।

बरमुंडा के आसपास करीब 300 जहाजों के मलबे हैं इनमें से 70 सीट सिर्फ रिफ की वजह से पानी में डूबी है ।

रिफ टेडी मेडी चट्टाने होती है जोकि ऑर्गेनिक चट्टानें होती है जो की बहुत ही छोटे समुद्री जीवो से तथा एक खास तरह के सेल से बने होते हैं । जो कि कई सालों तक जमा होने के कारण होते हैं और यह काफी कठोर भी होते हैं ।

वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें मार्बल के जितनी ताकत और मजबूती होती है और यह अभी भी बढ़ ही रहे हैं

बरमुंडा ट्रायंगल के आसपास वोल्केनो

बरमुंडा ट्रायंगल के आसपास का इलाका काफी गहरा है । जिसमें कोई भी नाव आसानी से डूब करके गायब हो सकती है और इसके ऊपर जाने पर वह वोल्केनो नजर आता है जिससे बरमुंडा ट्रायंगल बना है ।

उसकी सीधी दीवारें समुद्र के अंदर तक जाती है और लगभग 2000 फीट गहरी है । इसके आसपास जमीन में बने और भी कई वोल्केनो मौजूद है ।

काफी समय तक इसके आसपास कोई इंसान नहीं गया था । लेकिन 2016 में एक खोजी दल इसके अंदर पानी के अंदर तक गया ।

बरमूडा ट्रायंगल नए तरीके के जिव

खोज करता को बरमूडा ट्रायंगल के इस हिस्से में एलकी की ढेर सारी नई प्रजातियां मिली । यहां पर उन्हें नए तरीके के जिव भी दिखाई दिए । 2 मीटर लंबे कोरल भी देखे जो कभी नहीं देखे गए थे ।

इन खोजों से पता चलता है कि बरमुंडा ट्रायंगल की गहराई में कितने सारे रहस्य छुपे हुए हैं । वहां पर करीब 100 से भी ज्यादा नई प्रजातियों के जीव मिले जिसके बारे में साइंस को कोई भी जानकारी नहीं थी ।

समुद्र के अंदर 33 फीट की गहराई पर दबाव

यदि हम समुद्र के पानी के अंदर 1 फीट नीचे की तरफ जाते हैं तब 1 एटमॉस्फेयर का दबाव बढ़ जाता है । ‌यानी कि समुद्र के अंदर 33 फीट की गहराई पर दो एटमॉस्फेयर का दबाव आ जाता है और यदि 66 फीट की गहराई पर जाते हैं तो 3 एटमोस्फेयर का दबाव शरीर पर पड़ता है ।

यदि हम समुद्र के अंदर ही 1000 फीट की गहराई में जाए तो हमारा शरीर एक इंच के आठवें हिस्से के बराबर सिकुड़ जाता है ।

यदि इतनी गहराई में कोई नाव जाती है तो वह इस के दबाव को सहन नहीं कर पाएगी और वह पिचक जाएगी ।

जब कोई नाव समुद्र के अंदर डुबती है तो वह बहुत तेजी से नीचे की तरफ जाती है । कुछ ही मिनट में वह गहराई में चली जाती है ।

बरमुंडा ट्रायंगल से डेढ़ हजार दक्षिण की तरफ समुद्र तल बाकी जगहों से 2 गुना गहरा हो जाता है । बरमुंडा ट्रायंगल का एक और हिस्सा है जो कि करीब 9 100 किलोमीटर गिरा है । यह इतना गिरा है कि हम एवरेस्ट को भी इसमें छुपा सकते हैं ।

यदि हम बरमुंडा ट्रायंगल में सोनार की मदद से जहाजो को खोजने की कोशिश करें तो हमें लगभग 25 साल लग जाएंगे । तब जाकर के हमें जहाजो को खोजने के लायक तस्वीर मिल पाएगी ।

कुछ लोगों का मानना है कि इसकी गहराई में मशहूर प्राचीन शहर अटलांटिक भी खोया हुआ है । 1980 में वहां पर एक चौड़ी दीवार मिली थी जिसे की पत्थरों से बनाया गया था ।

देख कर के तो दीवारों के कार्य से लगता है कि उन्हें इंसानो ने बनाया हो वह किसी पुरानी सभ्यता का हिस्सा लग रहा था ।

अटलांटिक महासागर का रहस्य

अटलांटिक ही कहानी सबसे पहले मशहूर फिलोसोफर प्लेटो ने लोगों को सुनाई थी । एक 11000 साल पुरानी सभ्यता जो कि तकनीकी रूप से काफी आगे थी । एक ऐसा समाज जो कि सुंदर तथा अमीर था ।

लेकिन उसके लालची लीडर सारी दुनिया पर राज करना चाहते थे और देवताओं को उनकी यह लालची सोच पसंद नहीं आई । जब अटलांटिक कामयाबी की तरफ था । तब समुद्र में तूफान आया और सारा शेहर समुद्र की गहराई में दफन हो गया ।