मधुमक्खी डंक मारने के बाद मर क्यों जाती है |

मधुमक्खी डंक मारने के बाद मर क्यों जाती है |

दुनिया में डंक मारने वाले जीव की संख्या 750 से भी ज्यादा है | हर जीव अपने आप को बचाने के लिए डंक का प्रयोग करता है | बहुत सारे जीव ऐसे होते हैं जो अपने डंक का प्रयोग कई बार कर सकते हैं | यानी कि वह एक से अधिक बार किसी को डंक मार सकते हैं जबकि मधुमक्खी ऐसा नहीं कर सकती है | मधुमक्खी सिर्फ एक ही बार डंक मार सकती है | यानी कि एक मधुमक्खी आपको एक ही बार डंक मारती है |

मधुमक्खियों की फैमिली में कौन-कौन होता है

मधुमक्खियों के छत्ते में सारी फीमेल मधुमक्खियां ही नहीं होती है | उनमें मेल मधुमक्खियां भी होती है | तथा एक रानी भी होती है | छत्ते में लगभग सारा काम फीमेल मधुमक्खियां ही करती है | मेल मधुमक्खियां छत्ते में कम होती है | इसके अलावा छत्ते में 60000 फीमेल वर्कर मधुमक्खियां भी होती है |

मादा के पास डंक होता है तथा यह डंक प्रोक्लाइंड से जुड़ा होता है | उनमें से एक लैंड जहर पैदा करता है तथा दूसरा अंडा देने के काम आता है |

छत्ते में सिर्फ रानी मधुमक्खी को ही अंडे देने का हक होता है |

बाकी जानवरों की तरह मधुमक्खी का डंक भी एक सुई की तरह होता है | मधुमक्खी का डंक दो तरफा आरी जैसा होता है | मधुमक्खियां अपने डंक का प्रयोग मनुष्य तथा जानवरों को दूर भगाने के लिए करती है |

जब मधुमक्खियां डंक मारती है | तब मधुमक्खियों का डंक शरीर में जाकर के सेल्स को मारने वाला जहर छोड़ता है | लेकिन इसकी बनावट कुछ अलग होने के कारण मधुमक्खियां डंक मारने के बाद में अपने डंक को इस शरीर या फिर चमड़ी से बाहर निकाल नहीं पाती है | यानी कि डंक चमड़ी में फंस जाता है और मधुमक्खियां इस डंक निकालने का प्रयास करती है | डंक निकालने के प्रयास में ही मधुमक्खी की जान चली जाती है |

क्योंकि इस डंक से ही उनका डाइजेस्टिव सिस्टम जुड़ा हुआ होता है | जो कि डंक मारने से त्वचा में या फिर बॉडी में ही रह जाता है और मधुमक्खी की मौत हो जाती है |

यानी कि मधुमक्खी का डंक आहार नाल तथा पेट से जुड़ा होता है और जब मधुमक्खियां डंक मारती है तब डंक चमड़ी में फस कर रह जाता है | उसे निकालने के चक्कर में उसका पेट बाहर निकल जाता है और मधुमक्खी मर जाती है |

मधुमक्खियां डंक का इस्तेमाल सिर्फ अपने छत्ते को बचाने के लिए ही करती है |

जहर की गंध अलार्म सेल्स की तरह काम करती है | जिसकी खुशबू मिलते ही बाकी मधुमक्खियां शिकार पर टूट पड़ती है |

हाल ही में कुछ रिसर्च में वैज्ञानिकों ने यह पाया कि यह जरूरी नहीं है कि डंक मारने के बाद में मधुमक्खी की मौत निश्चित हो | क्योंकि मधुमक्खी मरती तभी है | जब डंक शरीर में रह जाता है |

जिसके कारण उसके शरीर का डाइजेस्टिव सिस्टम बार आ जाता है और मधुमक्खी मर जाती है | लेकिन कुछ मधुमक्खियों ने इसका उपाय भी खोज निकाला है | जिससे उनकी मौत नहीं होती है |

मधुमक्खी के अलग होने के बाद भी मधुमक्खी का डंक अपना काम करता रहता है | यानी कि मधुमक्खी के डंक को शरीर में छोड़ने के 10 मिनट तक मधुमक्खी का डंक अपना जहर छोड़ ता रहता है |


यानी कि कुछ मधुमक्खियां अपने डंक को निकाल लेती है तथा कुछ मधुमक्खियां अपने डंक को नहीं निकाल पाती है | जो मधुमक्खियां अपने डंक को निकाल लेती है | वह जिंदा बच जाती है तथा जो मधुमक्खियां अपने डंक को नहीं निकाल पाती है | वह मर जाती है तथा उस का डंक हमारी त्वचा में रह जाता है |

इसलिए मधुमक्खी के काटने के बाद काटने वाली जगह पर एक बार डंक को देख लेना चाहिए | यदि डंक त्वचा में रे जाता है तो 10 मिनट तक जहर फैलाता रहता है |