प्राचीन स्थल भीमबेटका के बारे में रोचक जानकारी

भीमबेटका की जानकारी इतिहास भीमबेटका गुफ़ाओं के बारे में रोचक तथ्य 

भीमबेटका गुफ़ाओं के बारे में रोचक तथ्य bheemabetaka gufaon ke baare mein rochak tathy भीमबेटका शैलाश्रय भीमबेटका की जानकारी इतिहास आज हम भारत में पत्थरों से निर्मित संरचनाओं की बात करेंगे ।

भारत में इंसान के कहिं पर भी बसने के शुरुआती लक्षण मेसोलिथिक युग के हैं । इन्हें हम प्रागैतिहासिकल भीमबेटका में देख सकते हैं ।

भीमबेटका मध्य प्रदेश में स्थित एक विश्व विरासत स्थल है । विंध्य पर्वतों की बलुवा पहाड़ियों में 720 से भी अधिक गुफाएं तथा पत्थरों पर निर्मित चित्र हैं ।

यह सभी भारत में इंसान के बसने के आरंभिक साक्ष्य हैं । यहां पर प्रागैतिहासिक पत्थरों पर बने हुए चित्र भी मिले हैं । जिनमें मानव तथा जानवरों के चित्र के साथ साथ शिकार करते हुए चित्र भी शामिल है ।

भीमबेटका में चट्टानों पर प्याले नुमा छोटे चित्र पाए गए हैं । इन निशानों को विश्व में सबसे प्राचीन माना जाता है । प्रागैतिहासिक कारों ने यहां पर विभिन्न संस्कृतियों की कलाकृतियों को खोजा है ।

इन संस्कृतियों में कुल्हाड़ी से लेकर छुरा तक शामिल है । भीमबेटका की चट्टानी गुफाएं इसीलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उनसे हमें कई बातों का पता चलता है । इससे हमें पता चलता है कि मानव ने किस प्रकार से प्राकृतिक आश्रय स्थलों का इस्तेमाल किया ।

हालांकि हड़प्पा सभ्यता के बाद में किलो में पत्रों का निर्माण बड़े पैमाने पर किया गया था । लेकिन लगभग 2000 साल तक इन विशाल इमारतों के निर्माण में इसका उपयोग नहीं किया गया था । हमें इस बात के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं ।

उसके बाद में भारत में चट्टानों को काटकर के कई अनोखी संरचनाएं बनाई गई । इन खूबसूरत स्मारकों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि भारतीयों ने किस प्रकार अभियांत्रिकी कौशल से चट्टानों को काटकर के तथा उन को तराश कर के विशाल मंदिर परिश्रम का निर्माण किया होगा ।