चींटी के डंक में कौन सा अम्ल पाया जाता है ? chiti ke dank mein kaun sa amal paya jata hai

चिंटी का जो डंक होता है उसमें कौन सा अम्ल होता है । जिसके कारण हमें जलन होती है और वह जगह लाल हो जाती है । चींटी के डंक में फॉर्मिक अम्ल ( formic acid ) होता है जिस के कारण जब चींटी काटती है तब जलन होती है और वह हिस्सा लाल हो जाता है ।

फार्मिक अम्ल चींटी के अलावा मधुमक्खी के डंक तथा बिच्छू के डंक में भी पाया जाता है। जब भी चिंटी या फिर बिच्छू काटता है तो इंसान को और तेज जलन होती है और वह हिस्सा सूजकर के लाल हो जाता है ।

फार्मिक अम्ल लाल चींटी के डंक में पाया जाता है लाल चींटी का लेटिन भाषा में नाम “फॉर्मिका” होता है । इसी फार्मिक अम्ल के कारण चींटी के डंक में पाए जाने वाले अम्ल का नाम फार्मिक अम्ल पड़ा ।

फार्मिक अम्ल कौन कौन से कीड़े और जिवों में होता है ? Formic Acid kaun kaun se jeev mein paya jata hai .

आइए अब जानते हैं कि और कौन-कौन से जीव में फॉर्मिक अम्ल होता है । लाल चिंटी के अलावा ऐसे कौन-कौन से जीव है जिनमें फॉर्मिक अम्ल पाया जाता है । फॉर्मिक अम्ल जिन जिवों में पाया जाता है उनकी लिस्ट और नाम नीचे दिए गए हैं ।

1 . चींटी के डंक में भी फॉर्मिक अम्ल होता है .
2 . बिच्छू के डंक में भी फॉर्मिक अम्ल होता है
3 . जूँआ के डांस में फार्मिक अम्ल पाया जाता है ।
4 . बर्रों के डंक में भी फॉर्मिक अम्ल होता है ।

फार्मिक अम्ल शरीर में कैसे पहुंचता है ? Formic acid sharir mein kaise pahunchta hai .

चींटी के डंक में पाए जाने वाला अमल chiti ke dank mein paye jane wala amal hai

फार्मिक अम्ल हमारे शरीर में कीड़े के काटने के कारण जाता है और जब कोई कीड़ा काटता है तब यह हमारे रक्त में मिल जाता है । जब भी मधुमक्खी , बिच्छू हमें काटती है और खाते हैं तब यह जैसे ही अपना डंक हमारी त्वचा में घुसाते हैं तभी हमारी त्वचा में फार्मिक अम्ल छोड़ देते हैं । जिसके कारण हमें तेज जलन होती है और वह हिस्सा सूज करके लाल भी हो जाता है ।

फॉर्मिक अम्ल क्या होता है ? Formic Amal kya hota hai .

फार्मिक अम्ल एक कार्बनिक यौगिक होता है । फॉर्मिक अम्ल का रासायनिक सूत्र HCOOH होता है । फॉर्मिक अम्ल का उपयोग कार्बनिक पदार्थों के संश्लेषण में , रबड़ को जमाने में तथा रंगाई में किया जाता है ।

चींटियों के बारे में मजेदार तथ्य। सर्जन चीटियां किसे कहते हैं

सर्जन चीटियों का नाम तो आपने सुना ही होगा | क्या आपने कभी सर्जन चीटि का नाम सुना है | यह सारा रेगिस्तान में पाई जाती है जो कि अफ्रीका में स्थित है | इन चीजों को मेटाबिली चीटियां कहते हैं |

चीटियां टरमाइट पर हमला क्यों करती है

यह चीटियां खासतौर से टरमाइट पर हमला करना में माहिर होती है | यह चीटियां 1 दिन में लगभग टरमाइट की 4 कॉलोनियों पर हमला करती है |

टरमाइट के बड़े-बड़े दो दांत होते हैं , जो कि इन चीटियों से रक्षा करते हैं | यह दांत बेहद खतरनाक होते हैं | टरमाइट के हमले से बहुत सारी चींटियां घायल हो जाती है | क्योंकि इन दोनों में खाने के लिए लड़ाई चलती रहती है |

सर्जन चीटियां घायल चीटियों को कैसे ठीक करती है

जब चीटि और टरमाइट की आपस में लड़ाई होती है | तब बहुत सारी चींटियां घायल हो जाती है तथा उन्हें चोट आती है | इस चोट का उपचार करने के लिए चींटियां एक खास तरीके का इस्तेमाल करती है |

घायल चीटियां एक खास तरीके का केमिकल छोड़ती है | जो कि सर्जन चीटियों तक पहुंचता है | तथा उसको संकेत करता है | जिससे कि सर्जन चीटियां उनके पास चली आती है | यह हार्मोन चीटियां सर्जन चीटियों को बुलाने के लिए करती है |

उनके उपचार के लिए जैसे ही सर्जन चीटियां उनके पास पहुंचती है | वह अपना घायल पैर आगे कर लेती है और सर्जन चीटियां उनके पैरों को चाटने लगती है | जहां पर उनको चोट लगी है | उनके चाटने से इनके घाव का उपचार होता है तथा वह ठीक हो जाती है |

क्योंकि इनके मुंह में से एक सलाइवा निकलता है जो कि इनके खून को जमा देता है तथा इनके खून का बहाव रुक जाता है और इससे इंफेक्शन का डर भी नहीं रहता है |

वैज्ञानिकों ने पाया है कि यदि इन घायल चीटियों को इलाज ना मिले तो 80% चीटियां मर जाएगी |

यह चीटियां ट्रीटमेंट के 1 घंटे के बाद पुणे लड़ने के लिए तैयार हो जाती है | यानी कि 1 घंटे बाद यह चीटियां पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाती है |

कुछ चीटियां मेडिकल टीम क्यों नहीं बुलाती है


रिसर्च में वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि जो चीटियां घायल होती है | यानी कि जीन चीटियों के बचने के चांद से नहीं होते हैं | यानी कि जिन चीटियों को लगता है कि वह नहीं बच पाएगी |

वह चीटियां मेडिकल टीम को नहीं बुलाती है और अपना उपचार भी नहीं करवाती है |यानी कि वह चीटियां अपनी मदद के लिए सर्जन चीटियों को नहीं बुलाती है |
‌मेटाबिली चीटियों की एक कॉलोनी में 20 करोड चीटियां होती है |

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