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कोरोना वायरस की सच्चाई जानकर हो जाएंगे हैरान

क्या है सच्चाई कोरोनावायरस की ?

वुहान पर डर के बादल छाए हुए थे । यह शहर चाइना की राजधानी है । यह एक करोड़ 10 लाख लोगों का घर है । कई लोग पूछ रहे थे कि वह भी इसका शिकार होंगे । आखिरकार जवाब हां है तो वह कब इसका शिकार होंगे । वह अपनों को खोने का ख्याल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे । इस रहस्यमई तथा जानलेवा वायरस ने शहर में हा हा कार मचा दिया था ।

कोरोना वायरस ने 2 महीने के भीतर लगभग 12 से ज्यादा लोगों की जानें ली थी । इस बीमारी से हजारों लोग प्रभावित हुए थे । बहुत तेजी से और काफी संख्या में यह तेजी से फैला था जो कि इस भयानक बीमारी का रूप ले लिया था 2019 का कोरोनावायरस । यह बाकी वायरस से काफी अलग है

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यह virus काफी अलग है सार्स से । सार्स वायरस को 6 से 9 महीने के भीतर में काबू में कर लिया गया था । सार्स वायरस से 8000 से 10000 लोग ही प्रभावित हुए थे । इसके विपरीत 2019 के कोरोना वायरस की बात करें तो आंकड़े कुछ अलग ही नजर आ रहे हैं । 1 महीने में ही सारे आंकड़े बदल गए हैं ।

यह सारा सिलसिला 2019 के दिसंबर महीने के सर्दी के मौसम में शुरू हुआ था । सारा शहर एक अनजान बीमारी की वजह से ग्रसित था । इस समय एक मुट्ठी भर लोग ही इस से बीमार हुए थे जो कि बुखार तथा खांसी जैसे लक्षण के साथ शुरू हुआ था ।

शुरुआत में कोरोना को एक फ्लू के लक्षण के समान तथा निमोनिया के समान बीमारी जान करके लोगों को इसकी दवा दी जाने लगी थी । चाइनीज़ अथॉरिटी को इस तरह का सबसे पहला मामला 8 दिसंबर 2019 को मिला था । जिस में भी यही लक्षण मौजूद थे जो कि कोरोना के कारण आज हो रहे हैं ।

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संक्रमण के छोटे आंकड़े देखते ही देखते एक बड़ी संख्या में तब्दील हो गए । शुरुआती 2 मरीज वहां के होलसेल मछली मार्केट मैं काम करते थे । यह वायरस सबकी नजरों में तब आया जब सामान्य लगने वाले लक्षणों के कारण पहले मरीज की जान गई ।

9 जनवरी 2020 को एक 61 वर्षीय बुजुर्ग की खतरनाक वायरस के कारण मौत हुई जो कि इस मार्केट में हमेशा खरीदारी करने के लिए आया करते थे

शुरुआत में जो भी मरीज आए थे वे शेर के उस खास हिस्से की तरफ इशारा कर रहे थे जहां पर वन्य जीव का व्यापार चल रहा था । देखने पर यह भी लगता है कि यह किसी दूसरे वन्यजीवों से निकलकर किसी और प्रजाति में फैला होगा । पर कौन सी प्रजाति से फैला यह नहीं पता था । क्योंकि यहां पर सभी जीवों को एक ही पिंजरे में रखा जाता है । इसी कारण से इन वायरस को एक अच्छा मौका मिल जाता है, एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में जाने का । फिर यह वहां से निकल कर के जानवरों की प्रजाति से इंसान की प्रजाति में चले जाते हैं ।

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चाइना ने इस वायरस के बारे में डब्ल्यूएचओ को 31 दिसंबर को आगाह कर दिया था । जब तक डब्ल्यूएचओ इस वायरस को इमरजेंसी घोषित कर देता तब तक यह वायरस चाइना के 21 जगहों पर फैल चुका था । इसके साथ ही एशिया अफ्रीका तथा यूरोप के बीच ज्यादातर हिस्सों में फैल चुका था ।

जब आप इसके लक्षणों की ओर गौर करते हैं तब यह पता चलता है कि यह तो आपको पहले भी हो चुका है क्योंकि उनके लक्षण सामान्य होते हैं और इंसान को इसके बारे में पता भी नहीं चलता है । क्योंकि सारस वायरस के लक्षण भी इन्हीं से मिलते-जुलते थे जो कि 2002 मैं आया था । हाल ही में आए कोरोना वायरस के लक्षण भी 2002 के सारस वायरस से मिलते-जुलते है ।

सार्स ने सारे इलाके को तबाह कर दिया था । 8000 लोग इससे प्रभावित हुए थे । 774 लोगों की जानें गई थी । जब इस वायरस को पहली बार खोजा गया था तब चाइनीज अथॉरिटी ने इसे Cyrus virus होने से मना कर दिया था । इसके बाद की कई खोजबीन से पता चला कि यह है महामारी कोरोना वायरस के कारण पैदा हुई है । जिसमें 60% कोरोनावायरस से समानता पाई जाती है । फर्क इतना है कि यह सार्स वायरस की तुलना में कम खतरनाक है और बहुत तेजी से फैलता है ।

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2019 का कोरोनावायरस एक दूसरे के संक्रमण से, बातचीत करने से फैल सकता है । जबकि सार्स वायरस में ऐसा नहीं था । सार्स वायरस बात करने से या संक्रमण से नहीं फैलता था ।

शुरुआती खोजबीन से यह पता चला है कि संक्रमण होने से संक्रमण के लक्षणों का पता चलने में कम से कम 5 से 7 दिन का समय लग जाता है ।

सार्स वायरस से संक्रमित व्यक्ति को यदि 5 से 7 दिनों के भीतर दवाई दे दी जाए तो वह ठीक हो सकता है तथा अन्य व्यक्ति में संक्रमण नहीं फैलता है । इसके विपरीत 2019 के कोरोनावायरस में काफी विभिनता है यह वायरस सामान्य दिखने वाले लोगों में भी पाया जा सकता है ।

2019 के कोरोनावायरस उन व्यक्तियों में भी हो सकता है जो कि स्वस्थ दिखाई देते हैं । यानी कि एक स्वस्थ व्यक्ति में भी कोरोनावायरस हो सकता है तथा वह इस वायरस को अन्य लोगों में भी फैला भी सकता है । क्योंकि इसके लक्षणों का पता लगने में 5 से 7 दिन का समय लग जाता है ।

इस वायरस के फैलने का सबसे बड़ा कारण यह है कि इस वायरस का 5 से 7 दिन तक पता नहीं चलता इसके 5 से 7 दिन के भीतर यह वायरस बड़े पैमाने पर फैल जाता है ।

कोरोना वायरस के प्रकार के जीवों में पाया जाता है जैसे कि ऊंट , केटल , चमगादड़ आदि में पाया जाता है । कभी कबार वायरस अपना भेस बदल लेते हैं तथा जानवरों से इंसानों में आ जाते हैं । यह तरीका 2002 में आए सास वायरस में देखा गया था और अब 2019 में भी यह देखा जा सकता है ।

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इतना सब होने के बाद में वुहान के इस होलसेल मार्केट को बंद कर दिया गया था । वह पूरी तरह से सील कर दिया गया था ।

जनवरी 2020 में चाइना में नोवेल कोरोनावायरस से संक्रमण के खतरे बढ़ने लगे थे । बुखार तथा सांस लेने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने लगी थी । इस समय तक इस वायरस का संक्रमण मुख्य केंद्र से शहरों के अन्य मुख्य शहरों में भी जा चुका था ।

20 जनवरी 2020 को चाइना में एक नया मोड़ आ गया टीवी के एक इंटरव्यू में एक डॉक्टर ने बताया कि यह वायरस इंसान से इंसान में भी फैल सकता है । क्योंकि इससे पहले यह तय नहीं था कि यह वायरस इंसानों से इंसान में भी फैलता है ।

इसी दिन चाइना ने एक ठोस कदम उठाया । शहर की तरफ जाने वाले सारे रास्तों को सील कर दिया गया । ट्रांसपोर्ट के काम को भी बंद कर दिया गया तथा आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी । इसी समय चाइना में न्यू ईयर की छुट्टियां चल रही थी । छुट्टियों की अवधि भी चाइना में बढ़ा दी गई थी ।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने 31 दिसंबर को इस रहस्यमई वायरस के फैलने के कुछ ही समय बाद चेतावनी दे दी गई थी । जिसके बाद सभी देशों ने इस वायरस को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी ।

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उदाहरण के लिए सिंगापुर में आने जाने वाले यात्रियों पर नजर रखने के लिए thermal scanning लगा दी गई थी । अन्य देशों ने भी चाइना से आने वाले यात्रियों पर रोक लगा दी थी।

इसी के बीच चाइना ने एक और कदम उठाया वहां के काम करने वाले डॉक्टर तथा नर्स एक्स्ट्रा काम करने लगे तथा रात को भी लोगों को ऑनलाइन एक प्लेटफार्म तैयार करके उनकी सवालों का जवाब देने लगे । इसी के बीच चाइना एक और ठोस कदम उठाया वहां पर एक बड़ा सा हॉस्पिटल बनाया जो कि मात्र 2 हफ्ते में बंद करके तैयार हो गया ।

इसी बीच चाइना ने एक और अस्पताल बनाने के लिए न्यू ईयर की छुट्टी को कैंसिल कर दिया तथा तनख्वाह दुगुनी कर दी और 2500 बेड का एक और नया अस्पताल बनाया गया ।

इसी के चलते वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने इसे अमरजेंसी करार दिया गया तथा वहां से आने वाली सभी फ्लाइट को रद्द कर दिया गया और लोगों को चाइना में जरूरत नहीं होने पर यात्रा न करने की सलाह दी गई थी ।

इंडोनेशिया , जापान , साउथ कोरिया , न्यूजीलैंड , फ्रांस , टर्की , यूएस जैसे देश मैं अपने अपने देश के नागरिकों को वुहान से वापस लाने की होड़ मच गई । क्योंकि चाइना इस बीमारी को काबू में करने के लिए संघर्ष करता हुआ नजर आ रहा था ।

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क्या चाइना को इस बीमारी के लिए दोषी ठहराना सही होगा । 2003 के सार्स वायरस के समय भी चाइना सरकार को 4 महीने लग गए दुनिया को इस भयानक संकट के बारे में बताने के लिए । बाद में उन पर जानकारी छिपाने तथा रोकने पर आरोप भी लगाए गए थे ।

अभी आए कोरोना वायरस के संक्रमण को बताने में चाइना ने भी एक महीना लगा दिया था । जबकि पहला केस 8 दिसंबर 2019 को ही दर्ज हो गया था । 12 जनवरी को चाइनीज़ साइंटिस्ट ने इसे नोवल कोरोनावायरस का नाम दे दिया था । जो कि सार्स जैसा लगता है । सरकार की तरफ से इस को नियंत्रण करने तथा फैलने से रोकने के लिए उपाय किए जा रहे थे ।

चाइनीज सरकार ने अंदरूनी आवाजाही पर रोक लगा दी थी । तथा बाहर जाना लगभग नामुमकिन हो गया था । इस प्रकार से लोगों की भीड़ पर काबू पा लिया गया था । जिससे कि कम से कम बीमारी फैलें । इसके साथ ही चाइनीज सरकार ने न्यू ईयर की छुट्टियों का समय भी बढ़ा दिया था ।

कोरोना वायरस के पहले केस मिलने से अब तक 2 महीने का समय हो चुका था । चाइना के ज्यादातर चहल-पहल वाले हिस्से एकदम शांत हो गए थे । इस जानलेवा वायरस ने भीड़भाड़ वाले इलाकों को एक भूतिया जगह में बदल दिया है ।

बहुत सारे लोग घरों में रहने लग गए हैं । पार्क तथा मनोरंजन के सारे साधन बंद हो गए हैं । वायरस के फैलने के डर से लोगों ने घर से बाहर निकलना भी बंद कर दिया था । इसके साथ ही भीड़भाड़ वाले इलाकों में घूमना फिरना बंद कर दिया था ।

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वहां शेहर के हर घर में डर का आतंक फैला हुआ है । अधिकारियों की तमाम कोशिशों के बावजूद भी मौत के आंकड़े बढ़ते ही जा रहे थे । इसके साइंटिस्ट एक ऐसे वैक्सीन की खोज करने की कोशिश में है जो कि इस बीमारी से लड़े और इसको ठीक करने में मदद करें ।

देश की सबसे बड़ी बुरी खबर यह है कि कोरोनावायरस की वैक्सीन बनाने में महीनों का समय लग सकता है । वैक्सीन को किसी भी मरीज को देने से पहले इसे कई ट्रायल से गुजरना पड़ता है । ताकि यह वक्त रहते बीमारी का फैलाव रोकने के काम आए । इसके तैयार होने में आसानी से 9 से 12 महीने का समय लग सकता है ।

कोरोना से बचने के लिए वैक्सीन के न होने पर बचाव के जो तरीके हैं वह जोर शोर से लागू किए जाने चाहिए । चाइना ने सबसे लोकप्रिय जानवरों के व्यापार पर रोक लगा दी थी । जब तक यह मसला हल नहीं हो जाता है ।

इस प्रकार के वायरस को रोकने का सबसे अच्छा उपाय है कि जानवरों से जुड़े खाने को हमारे खान पीन में शामिल नहीं करना चाहिए । चाइना के सरकार ने भी इस पर काफी हद तक पाबंदी लगा दी है । क्योंकि यह जानवर खाने पीने से फैले या ने फैले लेकिन जो व्यक्ति इसके संपर्क में आता है । उसको जरूर हो जाता है । क्योंकि वह व्यक्ति उस जानवर को लाने से लेकर पकाने तक उसके संपर्क में रहता है । जिसकी मदद से यह वायरस उसके संपर्क में आकर के फैलने की संभावना बनी रहती है ।

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इस वायरस की सच्चाई यह है कि इस वायरस ने अब तक 1200 से भी ज्यादा लोगों की जानें ली है । मौत के आंकड़े सार्स वायरस को भी पार कर चुके हैं। मरने वालों की संख्या और पुष्टि किए गए आंकड़ों की संख्या भी तेजी से बढ़ गई है । अब भी उम्मीद कायम है कि बुरा वक्त गुजर जाएगा । लेकिन सवाल यह है कि यह कैसे और कब तक होगा ।

ऐसा लगता है कि जब तक मनुष्य जानवरों के संपर्क में आता रहेगा । तब तक इस तरह की बीमारी के फैलने के आसार बने रहेंगे । हम सब यह प्रार्थना कर सकते हैं कि हालात जल्द ही सुधर जाएंगे ।

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