एलीगेटर शिकार का पता कैसे लगाते हैं |

एलीगेटर शिकार का पता कैसे लगाते हैं |

मगरमच्छ तथा एलीगेटर में क्या अंतर होता है |

आज हम मगरमच्छ तथा एलिगेटर के बारे में बहुत ही रोचक तथ्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे | आज हम जानेंगे कि मगरमच्छ तथा एलीगेटर शिकार कैसे करते हैं तथा शिकार का पता कैसे लगाते हैं |

क्रोकोडाइल बड़े होते हैं | ताकतवर होते हैं | सदा शिकार करने में माहिर होते हैं और होशियार भी होते हैं | दुनिया के सबसे बड़े सर survival और खतरनाक शिकारी होते हैं |
जबकि एलीगेटर अक्सर रात को ही शिकार करते हैं | लेकिन पानी के भीतर उन्हें धुंधला दिखाई देता है | धुंधला दिखाई देने के बाद भी एलीगेटर रात में अपने शिकार का सही सटीक पता कैसे लगा लेते हैं |

आइए जानते हैं इसके बारे में , एलीगेटर शिकार का सही पता कैसे लगाते हैं |

एलीगेटर अपने शिकार का पता लगाने के लिए कान
तथा आंखों पर निर्भर नहीं रहते हैं |

एलीगेटर लाल कलर को नहीं देख सकते हैं तथा लाल कलर की रोशनी में शिकार नहीं कर सकते हैं | क्योंकि इस कलर की रोशनी को देखने में उन्हें दिक्कत होती है |

एलीगेटर अपने शिकार का पता लगाने के लिए अपने जबड़े का इस्तेमाल करता है | उसके जबड़े की निकली हड्डी में बहुत सारे सेंसेटिव सेल्स होते हैं जो कि उन्हें शिकार का सही सटीक पता बताती है | जैसे ही पानी में कोई हलचल होती है | पानी की लहर उसके जबड़े तक पहुंचती है और उसके छोटे से वाइब्रेशन से उसके जबड़े में उपस्थित सुपर सेंसिटिव सेल्स उन्हें शिकार का पता बता देती है | एलीगेटर के बाहरी हिस्से में 4000 रिसेप्टर होते हैं | उनमें से प्रत्येक रिसेप्टर हमारे फिंगरप्रिंट से 10 गुना ज्यादा सेंसेटिव होता है |

इंसान एक छोटे माइक्रोस्कोप तक के बैक्टीरिया को महसूस कर सकता है |
एलीगेटर पानी में रहते हैं जब पानी की लहर इसकी जबड़े तक पहुंचती है और एलीगेटर के जबड़े में वाइब्रेशन होता है | तब वह इस वाइब्रेशन से शिकार की दूरी का अंदाजा लगा लेता है | इस सुपर सेंसिटिव सेल्स की बदौलत एलीगेटर एक सेकंड में ही अपना शिकार का पता लगा लेता है

Translate »
%d bloggers like this: