एलियन होने के सबूत एलियन यानी पराग्रही जीवों के होने का जरा सा भी एहसास

एलियन के छुपे हुए राज । मिस्र के राजा तुतनखामुन की कब्र

एलियन होने के सबूत  एलियन यानी पराग्रही जीवों के होने का जरा सा भी एहसास 

एलियन होने के सबूत  एलियन यानी पराग्रही जीवों के होने का जरा सा भी एहसास एलियन के छुपे हुए राज । मिस्र के राजा तुतनखामुन की कब्र

हर संस्कृति में आसमान से आने वाले जीवो की बात कही जाती है । अतीत से ही पृथ्वी पर परग्रही जीव आते रहे हैं । मानव सभ्यता की शुरुआत से ही हर इंसान अपनी रचना का श्रेय सितारों से आने वाले दूसरे ग्रह के जिवों को देते हैं ।

जब से मानव सभ्यता का इतिहास लिखा गया है तब से आज आर्कियोलॉजिस्ट नई-नई संरचनाएं ढूंढ रहे हैं ऐसी सूचनाएं जिन पर लिखे हुए लेख तथा संरचना हमारे अतीत के बारे में हमारी सोच पर सवाल खड़े करती है ।

हजारों साल पुराने खंडहरों में जो इंजीनियरिंग नजर आती है वह इंजीनियरिंग हमारी आज की इंजीनियरिंग से काफी बढ़कर है । प्राचीन पत्थरों पर बनी आकृतियां अंतरिक्ष यात्रियों से मिलती जुलती है ।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अतीत में हमारी पृथ्वी पर कुछ परग्रही जी आए थे और उन्होंने ही मानव सभ्यता को जन्म दिया । और इस विचार को इंडियन एस्ट्रोनॉट तथा लाखों लोग सही मानते हैं ।

इंडियन एस्ट्रोनॉट मानते हैं कि दूसरे ग्रहों से आने वाली जिवों के सबूत हमारे आसपास में बिखरे पड़े हैं । यहां पर आपको हजारों ऐसे सबूत मिल जाएंगे जो कि इशारा करते हैं दूसरे ग्रह के जीवों की ओर ।

इंग्लैंड में मौजूद है पत्थर पर बनी सबसे रहस्यमेंही सरचना जिसे स्टोन हिंज के नाम से जाना जाता है । इस रचना ने आर्कियोलॉजिस्ट को हैरान कर रखा था । वर्ष 2015 में यहां से 3 किलोमीटर दूर एक नई खोज हुई थी । जिससे कि इस अनसुलझी पहेली की एक और कड़ी मिल गई ग्रेट ब्रिटेन की दीवार ।

यह प्राचीन रचना पृथ्वी पर बनी एक गोल आकृति है । यहां पर करीब 100 खड़े पत्थर हैं । यह सुपर हिंज है जो कि स्टोन हिंज से भी पुराना है ।

यहां पर जो जो पत्थर हैं वह 15 फुट ऊंचे तथा हर एक पत्थर का वजन लगभग 150 फुट के बराबर है । इसका रुख उत्तर के आसमान की तरफ है ।

इस संरचना से करीब 270 किलोमीटर दूर एक और दूसरी संरचना है जिसे वुड हिंज के नाम से जाना जाता है । यह संरचना भी स्टोन हिंज की तरह गोलाकार है ।

कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि स्टोनहिज के आसपास का इलाका कबर तथा दफनाने की जगह थी । जबकि इस बात का कोई भी लिखा हुआ रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है ।

तुतनखामन कि कब्र के डीएनए से मिले सबूत

मिस्र में मौजूद है किंग तूतेनख़ामेन कि कब्र । सन 1922 में जब इसकी खोज हुई थी, तब यह बिल्कुल सही सलामत थी और 3000 से भी ज्यादा साल तक यह भी सुरक्षित रही है ।

इस कब्र को आज तक की सबसे बड़ी आर्कियोलॉजिस्ट खोज माना जाता है । भले ही यह खोज बेहद ही शानदार थी । लेकिन आज यह 100 साल बाद कुछ ऐसे नए सबूत मिले हैं । जिनसे लग रहा है कि किंग तूतेनख़ामेन की खबर में जो देख पा रहे हैं उनसे भी कहीं ज्यादा छुपा है ।

28 सितंबर 2015 को उस खबर के हाई रेजोल्यूशन स्कैन को देखते हुए ब्रिटिश खोजकर्ता को एक अनोखी नई चीज नजर आई । ऐसा लग रहा था कि किंग की कब्र से जुड़े हुए दो गलियारे हैं । जो कि उसकी कब्र से जुड़े हुए हैं ।

तूतेनख़ामेन की नकल बनाने के लिए स्पेनिश कंपनी को यह काम सौंपा गया था । इसी हाई डेफिनेशन फोटोग्राफी स्कैनिंग की मदद से देखा कि उत्तरी दीवार पर कुछ दरारें हैं ।

उसे लग रहा था कि वहां पर एक दरवाजा हो सकता है ऐसा ही उसकी पूर्वी दीवार पर भी नजर आया था । यानी कि वहां पर दो कब्रें हो सकती थी ।

आज की उन्नत टेक्नोलॉजी से पता चलता है कि प्राचीन समय से परग्रही जीव पृथ्वी पर आते रहे हैं और उनका मानवीय दखल अंदाजी में हाथ था ।