एरिया फिफ्टी वन क्या है? एरिया फिफ्टी वन का रहस्य एरिया 51: इस सीक्रेट जगह पर होती है एलियंस पर रिसर्च

एरिया 51: इस सीक्रेट जगह पर होती है एलियंस पर रिसर्च!

‘एरिया 51’ के अंदर क्या होता है? एरिया फिफ्टी वन क्या है?

एरिया फिफ्टी वन क्या है? एरिया फिफ्टी वन का रहस्य एरिया 51: इस सीक्रेट जगह पर होती है एलियंस पर रिसर्च

एरिया फिफ्टी वन क्या है? एरिया फिफ्टी वन का रहस्य एरिया 51: इस सीक्रेट जगह पर होती है एलियंस पर रिसर्च! ‘एरिया 51’ के अंदर क्या होता है? एरिया फिफ्टी वन क्या है? एलियंस का गढ़ माना जाता है एरिया फिफ्टी वन जानिए इस जगह से जुड़े रहस्यमई फैक्ट्स 

आज हम जानेंगे कि एरिया 51 में क्या-क्या हो रहा है । लोग area51 के बारे में कौन-कौन से दावे करते हैं । क्या area51 में एलियंस मौजूद है । एरिया 51 के बारे में सरकार खुलकर के बात क्यों नहीं करती है ।

अमेरिका का सबसे बदनाम सैनिक ठिकाना एरिया 51। कई दशक तक चश्मदीद गवाहों ने यहां पर इस ठिकाने के ऊपर मंडराते हुए कई बड़े अनोखे यान देखे थे ।

कहते हैं कि यहां पर बहुत ही गोपनीय प्रयोग किए जाते थे , परग्रही टेक्नोलॉजी से जुड़े ।
कहते हैं एरिया फिफ्टी वन में परग्रही टेक्नोलॉजी थी

वर्जिनियां में 15 अगस्त 2013 में सीआईए ने वह दस्तावेज आम कर दिए । जिसमें एक अति गोपनीय सैनिक ठिकाने की चर्चा थी एरिया 51 की । यह एक ऐतिहासिक घोषणा थी ।

1955 से ही यह अति गोपनीय सैनिक ठिकाना था । यह निवाड़ा के दूरदराज रेगिस्तान में मौजूद था । सेना की सबसे गुप्त परियोजनाओं का केंद्र ।

एरिया फिफ्टी वन में परग्रही जिवो के यानों की रिवर्स इंजीनियरिंग की जाती थी । यह भारतीय एस्ट्रोनॉयड मानते हैं । वहां पर परग्रही जिव , उड़नतश्तरी आती थी । उनकी रिवर्स इंजीनियरिंग की जाती थी ।

कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि सरकार के बहुत सारे ऐसे गुप्त ठिकाने हैं जहां पर गुप्त रूप से पर परग्रही योजनाओं पर काम चल रहा है तथा उन पर प्रयोग भी किए जा रहे हैं ।

कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि इनके आसपास उड़ती हुई तथा टिमटिमाती हुई कई उड़नतश्तरीयां यहां के लोगों ने देखी थी । इसके बहुत सारे लोग चश्मदीद गवाह भी थे ।

वह यह भी मानते हैं कि इस तरह की टेक्नोलॉजी उन्होंने पहले पृथ्वी पर कभी नहीं देखी थी और इस तरह के यान भी उन्होंने कभी भी पृथ्वी पर नहीं देखे थे ।

कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि एरिया 51 के नीचे सुरंगे खोदी जा रही है । कुछ लोगों का मानना है कि जमीन के नीचे सुरंगों का बहुत बड़ा नेटवर्क है उन्होंने इसकी शुरुआत किसी परमाणु हमले के बचने के लिए की थी ।

कुछ लोग तो यह भी मानते हैं कि आज एरिया 51 में जो कुछ भी हो रहा है वह तो एक छोटा सा हिस्सा है वे मानते हैं कि वह जमीन के नीचे चलने वाली है हाई स्पीड ट्रेन से जुड़े हुए हैं । यह सारा सिस्टम जमीन के नीचे बने एक खुफिया सिस्टम से जुड़ा हुआ है ।

एरिया फिफ्टी वन के पास में एक चोटी है । वहां के रहने वाले कुछ लोगों ने वहां देखा है कि वहां पर यूएफओ आते हैं । उन्होंने वहां पर आने जाने वाले यूएफओ को भी देखा है

एशियन एस्ट्रोनॉट मानते हैं कि अमेरिका में ही एक ऐसा गुप्त स्थान तथा ठिकाना है । जहां पर वह परग्रही जिवों के साथ मिलकर के काम किया जा रहा है । यह उस जगह से बहुत ही करीब है । जहां से इंसान ने आसमान में उड़ने की पहली कोशिश की थी ।

कुछ लोगों का मानना है कि wright-patterson भी परग्रही जीव से जुड़ा हुआ एक बहुत बड़ा केंद्र है । बहुत सारे लोग तो यह भी मानते हैं कि यह एरिया 51 से ज्यादा अहम है । इस बात की भी पुष्टि करते हैं कि यहां पर जीवित एलियन है तथा जमीन के नीचे यूएफओ रखे हुए हैं ।

14 जून 1947 को एक अनजान यान मेक्सिको में रोजवेल शहर के बाहरी इलाके में दुर्घटना का शिकार हो गया । चश्मदीद गवाहों का कहना है कि वह एक उड़नतश्तरी के जैसा लग रहा था । उनके मलबे से जो लाशें मिली थी वह इस दुनिया के जिवों की तो बिल्कुल नहीं थी ।

कुछ लोगों का मानना है कि wright-patterson के ऊपर दिन में भी उड़ते हुए कुछ अजीबोगरीब यान नजर आते हैं । अमेरिका ने करीब 22 साल तक पर रिसर्च की थी । यह सबसे लंबे समय तक चलने वाला प्रोजेक्ट था और इसमें विदेशी टेक्नोलॉजी तथा परग्रही जिवों से जुड़ी टेक्नोलॉजी का अध्ययन किया जाता था ।

1969 में 12000 से भी ज्यादा उड़नतश्तरीयों को को देखने की घटना का अध्ययन के बाद प्रोजेक्ट ब्लू को बंद कर दिया गया । उनमें से अधिक ऊंचाई पर उड़ने वाली घटनाओं को कुदरती या फिर स्काइ प्लेन कहा गया । तब भी 700 अज्ञात मामले बचे हुए थे ।

एक बातचीत में तो यह भी पता चला है कि यहां पर परग्रही जीव थे । क्योंकि एक हादसा हुआ था उसके बाद में उनकी लाशें तथा उनके मशीन को यहां पर लाया गया था और उन्हें यहां पर संभाल के रखा हुआ था । यहां पर उन कि जांच पड़ताल भी की जाती थी ।

यहां पर काम करने वालों में से एक ने तो जीवित परग्रही को देखा भी था और उन्होंने बताया कि दिखने में तो वह इंसानों के जैसे दिखते हैं । पर उनके हाथों की अंगुलियां काफी लंबी होती है । यह लहराते हुए चलते थे । यह जीव टेलीपैथी के माध्यम से बातचीत करते थे ।

एशियन एस्ट्रोनॉट मानते हैं कि मोंटोक एरिया भी एरिया 51 की तरह ही था । यह एक ऐसी जगह है जहां पर अमेरिकन सेना के कही अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी । उनमें से ज्यादातर प्रोजेक्ट में परग्रही टेक्नोलॉजी की मदद मिल रही थी ।

कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि यहां पर इंसान भी कुछ विवादित सिलसिले में शामिल हुए थे । जिसे माइंड ऑफ कंट्रोल भी कहते हैं । इस प्रोजेक्ट के तहत वह माइंड कंट्रोल की टेक्निक को समझते थे । वहां पर एक और प्रोजेक्ट पर काम चल रहा था । जिसमें अपने आंख की शक्ति से किसी के दिमाग पर कंट्रोल करना ।

इस टेक्नोलॉजी में अलग-अलग तकनीकों से इंसान की सोच को बदलने का काम किया जाता था । यदि अमेरिका इस तरह की टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा था तो इस तरह की सोच क्या उन्हें परग्रही जीवों से मिली थी । यह भी हो सकता है कि यह टेक्नोलॉजी रोजवेल हादसे से जुड़ने के बाद आई हो ।