Golconda kile ka itihaas . गोलकुंडा का किला किसने बनवाया था? गोलकुंडा फोर्ट कहां पर है?

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Gol conda Fort – दोस्तों आज हम ऐसे किले के बारे में बात कर रहे हैं जो एक खिलौना होकर भारत की एक महत्वपूर्ण इमारतों में कि ना जाने वाला fort है, इसके लिए का बनना इतिहास की बहुत बड़ी घटना थी इसमें बहुत से राजा और महाराजा उन्हें अपनी जीवन का साने शौकत क्या प्रतीक और साम्राज्य का विकास किया है।

Golconda fort history

Golconda kile ka itihaas बहुत पुराना है इससे प्राचीन नाम में गोलाकोंडा का खिला भी कहा जाता है यह भारत के दक्षिण में बना किला एवं गड़े यह किला कुतुब शाही साम्राज्य 1518 ईस्वी से 1687 के मध्यकालीन सल्तनत की राजधानी थी यह किला भारतीय पर्यटन विभाग एवं तेलगाना पर्यटन विभाग के अंतर्गत आता है इस किले की इतिहास के बारे में बात की जाए तो यह बहुत रोचक बातें सामने आई हैं।

गोलकुंडा का किला किसने बनवाया था। – Who built Golconda fort.

इस किले के निर्माण के बारे में सही तथ्य सामने नहीं आए हैं लेकिन इतना जरूर मालूम है कि इस किले का निर्माण मराठा साम्राज्य ne हीं करवाया था इसका निर्माण लगभग 1400 ईसी में करवाया गया था इस किले के निर्माण के पीछे एक महत्वपूर्ण घटनाएं थे कि दक्षिण भारत में मराठा साम्राज्य का अपना एक वजूद बनाना था 1420 वी में मराठा साम्राज्य अपने आप में एक शक्ति हुआ करती थी।

इस किले को बनवाने के उद्देश।

इस किले को बनवाने का सबसे बड़ा उद्देश्य ही था की मराठा साम्राज्य का विकास दक्षिण भारत में किया जाए लेकिन कुछ परिस्थितियों के वजह से इस किले पर मराठा साम्राज्य में अपना विकास दक्षिण भारत में नहीं कर पाया था।

Golconda fort Hyderabad

गोलकुंडा या गोलाकोंडा दोनों एक ही नाम है यह किला दक्षिण भारत में राजनीति का केंद्र बना था क्योंकि इसके लिए मैं ऐसी व्यवस्था की गई थी कि यह भूमिगत से 120 मीटर ऊंचाई पर बना हुआ था और इसके सामने एक विशाल दीवार से किला गिरा हुआ था

जिसे चार दिवार कहते हैं इस किले की मरम्मत काकटिया राजा रूद्र प्रताप ने करवाई थी जो एक हिंदू राजा था और दक्षिण भारत में हिंदुओं का विकास करने के लिए इसके लिए का निर्माण किया गया लेकिन महाराणा प्रताप ज्यादा शासन इसके लिए पर नहीं कर पाए क्योंकि मुसलमानी नायर ने यह किला अपने कब्जे में कर लिया था और महाराज रुद्र प्रताप को यह किला छोड़ना पड़ा था

हैदराबाद शहर का पुराना नाम – Old name in Hyderabad.

हैदराबाद का पुराना नाम यह गोलकुंडा का पुराना नाम मुसलमानी नायर ने मोहम्मद नगर फोर्ट कर दिया गया इस प्रकार से उस समय इसके लिए को गोलकुंडा किला ना क्या कर मोहम्मद नगर कहा जाने लगा।

About Golconda fort

गोलकुंडा फोर्ट 15 से 12 ईसवी में कुतुब शाही राजाओं के अधिकार में आ गया था और हैदराबाद नगर के शिलान्यास तक कुतुब शाही साम्राज्य की राजधानी का केंद्र है लेकिन 1687 ईस्वी में इसे दिल्ली के महाराजा औरंगजेब ने जीत लिया राजा ने अपने हिसाब से इसमें बहुत मरम्मत कार्य कराए

और दिल्ली से ही इस किले की शासन व्यवस्था को संभालना और अपने सैनिकों के लिए 3 किलोमीटर लंबी दीवार बनाई और मस्जिदों का निर्माण कराया और मंदिर को खंडहर कर दिया गया औरंगजेब की कुछ किताबों से जानकारी मिलती है जो सही भी हो सकती है या गलत भी हो सकती है।

लेकिन एक कहावत भी प्रचलित है कि इसके लिए की रखवाली एक पागल आदमी करता था जो बहू स्ट्रांग था लेकिन यह रखवाली करने का कोई शुल्क नहीं लेता था जब औरंगजेब इसके लिए को फतेह करने की तैयारी कर रहा था तो इस पागल आदमी ने औरंगजेब के 250 सैनिकों को अकेले ही मार दिया था इसलिए इसके लिए मैं इस पागल आदमी का भी उल्लेख है तारामती मस्जिद इस किले में स्थित है कभी-कभी औरंगजेब इस मस्जिद में नमाज अदा करने जाता था।

Entry fees गोलकुंडा फोर्ट में अलग-अलग जगह पर अलग-अलग फीस लगती है जो ₹20 से लेकर ₹200 तक हो सकती है जो फीस तेलगाना पर्यटन एवं भारतीय पर्यटन तय करता है।

विजिटिंग टाइम visiting time

Golconda fort mein भ्रमण का समय सुबह 8:00 बजे से शाम के 6:00 बजे तक है लेकिन इसके अलावा लाइट शो आदि भी इसके लिए पर 8:15 तक आयोजित होते हैं जो तेलगाना पर्यटन इस किले की इतिहास के बारे में बताता है।

Golconda fort light show timings

गोलकुंडा फोर्ट में लाइट प्रोग्राम होती हैं जिन का आयोजन तेलगाना पर्यटन कराता है इसमें पहला शो अंग्रेजी भाषा का होता है और दूसरा शो तेलुगु भाषा का होता है क्योंकि यहां पर ज्यादा पर्यटक अंग्रेजी और तेलुगु भाषा आते हैं पहला समय 6:30 बजे से होता है और दूसरा शो 7:45 से होता है।
March se October मैं इनका टाइम थोड़ा परिवर्तन कर दिया जाता है

जिसमें पहला शो 7:00 बजे से स्टार्ट होता है और दूसरा शो 8:15 पर चालू होता है । Golconda fort Sunday timing bhi वही रहती है जो अन्य दिन रहती है लेकिन तेलगाना पर्यटन संडे को कभी-कभी समय में छूट देता है। जिसका जिक्र पर्यटन विभाग अपनी वेबसाइट पर देता है।

गोलकुंडा किला किस नदी के किनारे है

गोलकुंडा फोर्ट मुसी नदी के निकट इसके लिए को मराठा साम्राज्य ने बनवाया था यह नदी किले के नजदीक ही है जिसमें मराठा साम्राज्य के यहां पानी की सप्लाई की जाती थी लेकिन एक कहावत यह भी है कि मराठा साम्राज्य महाराज रूद्र प्रताप इस नदी में अपने गुप्त द्वार से स्नान करने जाते थे यह जानकारी तथ्यों पर आधारित है जो सही भी हो सकती है।

Where is Golconda fort located – गोलकुंडा फोर्ट कहां पर है

वर्तमान में देखा जाए तो गोलकुंडा फोर्ट हैदराबाद के नजदीक है जो तेलगाना राज्य में है लेकिन इससे पूर्व हैदराबाद आंध्र प्रदेश की राजधानी हुआ करती थी लेकिन बंटवारे के बाद अब यह तेलगाना राज्य में आता है और तेलगाना पर्यटन इसके लिए पर बहुत ध्यान दे रहा है।

सीक्रेट्स ऑफ गोलकुंडा फोर्ट – Secrets of Golconda fort.

Golconda fort मैं बहुत ही अजीब रहस्य छिपा हुआ है जो किले की शोभा बढ़ाता है और लोगों को वहां पर पहुंचने पर मजबूर कर देता है 1700 ईस्वी में गोलकुंडा हीरो का बाजार कहा जाता था विश्व का सबसे विख्यात खजाना इसी किले में छिपा हुआ है जिसे कोहिनूर हीरा यहीं पर पाया जाता था यह इसके लिए की गौरव की बात है ।

गोलकुंडा फोर्ट में कितने प्रवेश द्वार है।

गोलकुंडा फोर्ट में बहुत ही प्रवेश द्वार है लेकिन बेसिक रूप में सही रूप आठ प्रवेश द्वार हैं जो बहुत ही अच्छी हालत में है जिन्हें अपनी नंगी आंखों से देखा जा सकता है। इस किले में सबसे महत्वपूर्ण द्वार फतेह द्वार है जिसे विजय दरवाजा भी कहते हैं।

गोलकुंडा फोर्ट कितने किलोमीटर में फैला हुआ है।

गोलकुंडा फोर्ट 1 तरीके से कहा जाए तो लगभग 11 किलोमीटर में फैला हुआ है जिसे सही रूप में देखने के लिए कम से कम 5 घंटे लग जाते हैं। और गोलकुंडा फोर्ट के आसपास कुतुब शाही राजाओं के मकबरे फोर्ट की विरासत की शोभा बढ़ाते हैं।

इस किले मैं किस कला को देखा जा सकता है।

बेसिक रूप में कहा जाए तो मराठा साम्राज्य ने अपने स्तर पर बनाया था फिर कुतुब शाही मुगल वंश सब ने अपने अपने अनुसार इस किले में परिवर्तन की है इस किले में प्राचीन शिल्प कला को देखा जा सकता है।

Gupt dwara in Golconda fort

गोलकुंडा फोर्ट में दो गुप्त द्वारा जिसका उपयोग महाराजा आपातकालीन परिस्थितियों में ही करते थे गोलकुंडा फोर्ट में एक गुप्त द्वार चारमीनार की ओर जाता है और दूसरा द्वार मुसी नदी के किनारे जाता है यह दोनों ही द्वारा विषम परिस्थितियों में उपयोग किए जाते थे

लेकिन अब इन दोनों गुप्त द्वारा को बंद कर दिया गया है क्योंकि कहा जाता है कुछ लोग गलती से इस गुप्त द्वार में चले गए थे जिनका अभी तक पता भी नहीं लगा है।

गोलकुंडा फोर्ट ऐड्रेस – Golconda fort address.


अब हम बात कर रहे हैं कि गोलकुंडा फोर्ट देखने के लिए कैसे पहुंचे गोलकुंडा फोर्ट पहुंचने के लिए आप निकटवर्ती हैदराबाद स्टेशन पर पहुंच सकते हैं कार के द्वारा भी आप जा सकते हैं हवाई जहाज के द्वारा भी आप जाया जा सकता है आपको हमारे लेख कैसे लगा यह बताइए।

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