हुमायूं के मकबरे की संरचना राजधानी दिल्‍ली में हुमायूं का मकबरा

हुमायूं के मकबरे की संरचना राजधानी दिल्‍ली में हुमायूं का मकबरा

हुमायूं का मकबरा कहा है हुमायूं का मकबरा किसने बनवाया

हुमायूं के मकबरे की संरचना राजधानी दिल्‍ली में हुमायूं का मकबरा

एक गुंबद मेहराब से बना होता है । जिसमें अनेक द्वि आयामी मेहराब मध्य बिंदु पर घूमती है । जिससे एक त्रिआयामी संरचना का निर्माण होता है । हालांकि जब यह मेहराब घुमाव पर होते है तब कुछ विशेष घटित होता है ‌।

मेहरा के शीर्ष पर स्थित कीस्टोन गुंबद के लिए आवश्यक नहीं होता है । गुंबद की संरचनात्मक बनावट के साथ समझौता किए बिना गुंबद के शिश को खुला छोड़ा गया है । ऐसे स्थान से रोशनी अंदर आती है ।

इस गुंबद की विशेषता है कि बिना एकल स्तंभ के काफी खाली स्थान मिलता है । खूबसूरती के साथ ही हुमायूं के मकबरे का महत्व इसके स्थापत्य कला की वजह से भी है । यह भारत में निर्मित दोहरे गुंबद वाला पहला स्मारक है ।

दोहरे गुंबद की बनावट कैसी होती है ?

इस तरह के गुंबद में दो परते होती है । इसकी आंतरिक परत इमारत के आंतरिक हिस्से को बनावटी छत प्रदान करती है । जबकि बाहरी परत इमारत का शिकार बनाती है ।

दोहोरी गुंबद वाली योजना में छत आंतरिक हिस्से हिस्से के अनुपात में नीचे की ओर होती है । साथ ही बाहरी हिस्सा इमारत की ऊंचाई बढ़ाता है ‌ सामान्यतः दोनों परतों के मध्य में खाली स्थान होता है ।

हुमायूं के मकबरे की संरचना राजधानी दिल्‍ली में हुमायूं का मकबरा

इस युक्ति से जहां पर इमारत को बाहरी तौर से से ऊंचाई प्रदान होती है । वहीं केंद्रीय होल में आंतरिक ऊंचाई के अनुपात में छत को नीचे रखा गया है । यह भारत का पहला मुख्य पूर्ण गुंबद है । जिसके कारण इसकी विशेषता और बढ़ जाती है ।

इससे पहले के गुंबदो को पूर्ण नहीं कहा जा सकता है क्योंकि उनमें पूर्ण अर्ध गोले के लक्षण नहीं थे ।

हुमायूं के मकबरे के बाहरी गुंबद की ऊंचाई 42.5 मीटर है जो कि संगमरमर से ढका हुआ है और आकार में गोल है । छत पर लगे कोणों के सारे खड़े छोटी छतरी से भारतीय शैली की झलक मिलती है ।

बाहरी गुंबद के नीचे स्थित आंतरिक गुंबद की ऊंचाई 12 मीटर है । जिसके कारण केंद्रीय गुंबद हॉल को तीन मंजिला ऊंचाई मिल पाई है । यह हॉल चारों ओर से कमरों से जुड़ा हुआ है ।