कुतुबमीनार के बारे में रोचक जानकारी महरौली पुरातात्विक पार्क

कुतुबमीनार के बारे में रोचक जानकारी महरौली पुरातात्विक पार्क

क़ुतुब मीनार के बारे में रोचक तथ्य Interesting facts about Qutub Minar

क़ुतुब मीनार के बारे में रोचक तथ्य Interesting facts about Qutub Minar

क़ुतुब मीनार के बारे में रोचक तथ्य गयासुद्दीन बलबल का मकबरा मेहराब क्या होता है ? चौखट क्या होती है ? महरौली पुरातत्व पार्क महरौली में बलबन का मक़बरा qutub meenaar ke baare mein rochak tathy

कुतुबमीनार लाल बलुआ पत्थर से निर्मित एक अद्भुत कौशल का उदाहरण है । इस मीनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है । शिखर का व्यास 2 पॉइंट 75 मीटर है और आधार का व्यास 14 पॉइंट 32 मीटर है । यह कोणिय तथा गोलाकार संरचना है । इसके आसपास में बहुत सारी भव्य इमारतें भी है ।

जिसमें भारतीय शैली में बना अलाई दरवाजा भी शामिल है । इसका निर्माण 1311 ईस्वी में किया गया किया गया था ।

गयासुद्दीन बलबल का मकबरा ।

आज यह मकबरा एक वीरान जगह बन गई है तथा एक खंडार में बदल बदल बदल गया है । लेकिन फिर भी यहां पर एक खास रचना अभी भी मौजूद है । यहां पर यह बहुत ही पुराना मेहराब है जो भारत में बना जो भारत में बना सबसे पहला मेहराब है ।

भारत में ऐसी मेहराब वालि डिजाइन का उपयोग काफी समय बाद में हुआ था । यह मेहराब 1287 ईस्वी की है । इससे 2000 साल पहले विश्व के अन्य भागों में इसका उपयोग किया जाता था ।

मेहराब क्या होता है ?

मेहराब भी घुमावदार संरचना होती है जो कि किसी भी इमारत को मजबूती तथा सहारा प्रदान करती है। इसे स्थापतय तत्वों का मुख्य घटक माना जाता है। इसका निपुण उपयोग रोमन काल के दौरान किया गया था ।

मेहराब के काम करने का तरीका

मेहराब के ऊपर काफी ज्यादा भार होता है । मेहराब दीवारों से जुड़ी होती है इन्हें अनेक प्रकार की निर्माण सामग्रियों जैसे कि पत्थर ईट सीमेंट इस्पात आदि से से बनाया जाता है ।

ईंट से बने मेहराब मे ब्लॉक का इस्तेमाल किया जाता है । निर्माण के दौरान मेहराब को लकड़ी से सहारा दिया जाता है । मेहराब के शिखर में भी एक ब्लॉक लगाया जाता है । जिसे कीस्टोन करते करते हैं ।

कीस्टोन के ऊपर कोई भी भार नहीं पड़ता पड़ता है । यह संरचना के भार को मेहराब के नीचे तथा लंबाई में स्थानांतरित कर देता है । मेहराब की विशेषता है कि यह भार को नीचे की तरफ स्थानांतरित कर देता है ।

जब लकड़ी के फ्रेम को हटाया जाता है , तब मेहराब के दोनों तरफ दोनों तरफ दोनों तरफ के दबाव को मेहराब आपका कीस्टोन सहारा देता है । इसके अलावा अन्य दोनों तरफ से मेहराब को सहारा दिया जाता है । ताकि यह अपने ऊपर के भार से ढेह ना जाए ।

असल में देखा जाए तो केंद्रीय ब्लॉक स्थिर रहता है । क्योंकि यह शिखर पर आधार की तुलना में चौड़ा होता है । इसलिए इसे नीचे गिरने के लिए पास वाले ब्लॉक को बाहर की ओर धकेलना होगा । इस प्रकार जब तक यह आपस में मजबूती से जुड़े रहेंगे बीच का ब्लॉक नीचे नहीं गिरेगा ।

प्राचीन काल में भारतीयों ने मंदिरों तथा अन्य संरचनाओं के निर्माण में मेहराब का अधिक उपयोग नहीं किया था । उन्होंने आरंभ में चौखट का प्रयोग किया ‌।

चौखट क्या होती है ?

इसे आसान भाषा में कहें तो यह दो खंभों पर टिकी होती है । इसका कार्य भी मेहराब की तरह ही होता है इसको बनाने की क्षमता के आधार पर इसका प्रयोग बड़े पैमाने पर हुआ है ।

कड़ीदार मेहराब क्या होती है ?

कड़िदार मेहराब में एक के ऊपर एक पत्थर जोड़े जाते हैं । इसमें निर्माण की संरचना सीढ़ियों की भांति होती है । जिसे काट कर के एक मेहराब का आकार दिया जाता है । कुतुब मीनार परिसर की अनेक इमारतों जैसे कि कुत्तोलम मस्जिद में इसी तरह की मेहराब का इस्तेमाल किया गया है ।

कुतुब मीनार की बालकनी में भी वास्तविक मेहराब की बजाए कड़ीदार मेहराब का इस्तेमाल किया गया है इस प्रकार यह भारत में बनने वाली पहली वास्तविक मेहराब है । अद्भुत एवं साधारण मेहराब ।

इसके बाद जब मेहराब प्रचलन में आई । तब इनका निर्माण रुका नहीं । मुगलों ने मेहराब के डिजाइन को अपनाया और विश्व की कुछ बेहतरीन इमारतों का निर्माण किया । जैसे कि अकबर का मकबरा , हुमायूं का मकबरा और ताजमहल । जिसमें नोकदार मेहराब का इस्तेमाल किया गया था ।