जावित्री के फायदे और नुकसान जायफल का पेड़ कैसा होता है
जावित्री के फायदे और नुकसान जायफल का पेड़ कैसा होता है

जावित्री के फायदे और नुकसान जायफल का पेड़ कैसा होता है

जायफल तथा जावित्री के इतिहास के बारे में रोचक जानकारी और तथ्य जावित्री के फायदे और नुकसान जायफल का पेड़ कैसा होता है जायफल और जावित्री के फायदे जायफल के औषधीय गुण

अतीत की गहराई में पेड़ों को पूजा जाता था । साथ ही मानव इसे अपनी आस्था से जोड़ कर के देखते थे । यह पेड़ खुद तो फलते फूलते ही हैं , साथ में औरों को भी जिंदगी देते हैं ।

इन्हीं पेड़ों के बीच में एक पेड़ और है जो कि सबसे निराला है । इस पेड़ की एक और खास बात यह है कि यह साल में कई बार फल देता है । आज हम बात कर रहे हैं जायफल और जावित्री के बारे में ।

यह दो मसाले हैं । देखने में तो दोनों अलग-अलग है । लेकिन दोनों एक ही पेड़ के हिस्से हैं तथा दोनों एक ही पेड़ के मसाले हैं ।

जायफल के फायदे। जायफल खाने के फायदे। जायफल के गुण।

जायफल की पहचान । जायफल कैसा होता है ?

जायफल को देखने पर अंदर से भुरा बीज दिखाई देता है । यह लाल कवच में लिपटा हुआ रहता है । इसके बीज कठोर होते हैं । आज हम हिंदू मसालों की कहानी जानते हैं जो कि साथ होते हैं ।

दोनों मसाले देखने में एक जैसे होते हैं लेकिन इन दोनों की महक भी अलग-अलग होती है । इन की महक में भी अंतर होता है । लेकिन दोनों एक ही फल का हिस्सा होते हैं ।

जायफल तथा जावित्री का फल कैसा होता है ?

भुरा तथा सुपारी के जैसा होता है जायफल । एक फल की रचना करने वाली जावित्री एक ही फल में मौजूद होते हैं । जायफल असल में फल नहीं बल्कि बीज है । जावित्री उसका बाहरी सुरक्षा देने वाला आवरण होता है ।

जायफल तथा जावित्री का पेड़ कैसा होता है ? जायफल किस परिवार का सदस्य है ?

जायफल का पेड़ सदाबहार तथा मध्यम आकार का होता है । ना ही ज्यादा ऊंचा होता है तथा ना ही ज्यादा बोना होता है । जायफल निरिष्ठिका परिवार का सदस्य है ।

जायफल स्वाद में कैसा होता है ? जायफल का स्वाद कैसा होता है ?

जायफल तथा जावित्री पुरातन काल से ही मानव को प्रिय है । जावित्री तथा जायफल दोनों का स्वाद अलग अलग होता है । जावित्री स्पाइसी तथा एरोमेटिक होता है । जबकि जायफल मिटा टेस्ट देता है ।

जायफल की खुशबू बहुत ही ज्यादा अच्छी होती है । यदि हम जायफल को किसी खाने में डालते हैं तो पूरा घर खुशबू से महक जाता है । यह किसी भी मनुष्य का दिल बहला देती है । इसकी खुशबू भीनी भीनी होती है ।

जायफल तथा जावित्री की उत्पत्ति की कहानी । जायफल तथा जावित्री का इतिहास ।

दंत कथाओं में जायफल तथा सावित्री की कहानी का राज छिपा हुआ है । इसके ऊपर कई दंत कथाएं मौजूद है । जायफल तथा जावित्री का संबंध भगवान परशुराम से जुड़ा हुआ है । जो कि काफी क्रोधित थे इसके साथ ही वह बहुत ज्ञानी भी थे ।

केरल राज्य का जन्म कैसे हुआ ? केरल राज्य की उत्पत्ति कैसे हुई ?

जब परशुराम ने समुद्र में अपना परसा फेंक करके अपने लिए पृथ्वी का एक टुकड़ा तराशा जिसके फल स्वरुप केरल राज्य का जन्म हुआ । केरल एक ऐसा राज्य है जिसकी पहचान प्राकृतिक सौंदर्य है ।

जायफल तथा जावित्री की खेती कब होती है ? जायफल तथा जावित्री की खेती किस मौसम में की जाती है ?

कोच्चि को अरब सागर की पटरानी भी कहा जाता है । जून का महीना बस आया ही है जायफल का मौसम शुरू हो गया है । मॉनसून भी अब तक आ चुका है । हवा में नमी भरी हुई है । गर्मी भरी उमश भी बहुत ज्यादा है बारिश से भरे काले बादल । कोच्चि के छोर पर है कुचिपुड़ी ।

जायफल के जाने-माने बागान कुचिपुड़ी में ही होते हैं जायफल का पीला फूल हट चुका है । अब साफ-साफ दोनों फल जायफल तथा जावित्री नजर आने लगे हैं । यह दोनों आपस में गुच्चे के रूप में लगे हुए होते हैं ।

जून के महीने में मौसम का पारा चढ़ा हुआ रहता है । लेकिन यहां के लोग इसके आदि हो चुके हैं । इससे मौसम का इन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है ।

जायफल का रंग कैसा होता है ? जायफल किस रंग का होता है ?

जायफल लाल रंग की फूल में लिपटा हुआ भूरे रंग का होता है । जायफल के हर फल को एक-एक करके तोड़ा जाता है । यहां की मिट्टी नम तथा उपजाऊ होती है ।

यहां पर पूरी दुनिया के लोग यह देखने के लिए आते हैं कि जायफल किस प्रकार से उगते हैं तथा जायफल की खेती किस प्रकार से होती है । यहां पर जर्मनी , कनाडा , वियतनाम आदि देशों से लोग देखने के लिए यहां पर आते हैं ।

जायफल का मूल भारत में छिपा हुआ नहीं है । माना जाता है कि जायफल का पेड़ मनुका दीपू के वर्षा वन में हुई । मनुका दीप अब इंडोनेशिया देश का हिस्सा है ।

मनुका नाम की भी एक अनोखी कहानी है । इस दीप समूह के अरब सौदागर मसालों के धनी थे । जजीरात अल बुल्क के नाम से पुकारते थे । इस द्वीप को सेनसाहों का द्वीप भी कहा जाता है ।

यूरोपियन नाविक मसालों की खोज के लालच के लिए अपनी सीमाओं से परे दूसरे दीपू तक पहुंच जाते थे वह मसालों को दूसरे डीएफओ पर तलाशते अपनी जान की बाजी लगा कर के ।

जायफल तथा जावित्री की सुगंध कैसी होती ? जायफल के गुण।

आने वाले समय में बहुत सारे देशों की गुलामी का कारण यही मसाले बने । जायफल के चारों ओर लिपटी हुई होती है जावित्री । पूरे फल की महक तीखी तथा सुहानी होती है ।

यदि मसालों को अच्छे दाम पर बेचना है तो तोड़ने के बाद का काम बहुत ही अच्छे तरीके से करना होता है । इन मसालों की कीमत उनके मेहक , स्वाद तथा रंग में मौजूद होती है । इनी के कारण इन मसलों की कीमत बढ़ जाती है और अच्छे धाम पर बिकती हैं ।

70 से 80 जायफल को मिलाने पर लगभग 1 किलो जायफल हो जाता है । जबकि 3.30 जावित्री को मिलाने पर 1 किलो जावित्री होती है । यानी कि 3.30 जावित्री का भार 80 जायफल के बराबर होता है ।

जायफल कैसे बनता है ? जायफल के फायदे।

जायफल के बीजों को सूरज की गर्मी में कुछ दिनों के लिए सुखा देते हैं । जब जायफल सूखता है तो अंदर का बीज बाहर के खोल से अलग हो जाता है । अंदर का बीज सुपारी नुमा होता है ।

जावित्री जायफल के निर्माण तथा उसके विकास में बहुत ही महत्वपूर्ण सहायक होती है । वह दोहरा काम करती है । एक तो बीज की रक्षा करती है तथा दूसरा पक्षियों को अपनी और आकर्षित करती है ।

जब पक्षी इनके बीजों की तरफ आकर्षित होते हैं तब वह इन्हें खाकर भी दूर-दूर तक फैला देते हैं । पक्षी जायफल के बीजों के प्रकीर्णन का काम करते हैं ।

जावित्री को कैसे तैयार किया जाता है ?

जावित्री को जायफल की तरह धूप में नहीं सूख आया जाता है इसे विशेष रूप से बने हुए गरम डिब्बों में सुखाया जाता है । जब जावित्री होती है तब उसका रंग फीका पड़ जाता है । जबकि उसके मेहक में वृद्धि होती है । वह महक जो की सुंदरता तथा मोहब्बत का प्रतीक हुआ करते थे ।

तेतरेहि समिता के अनुसार विवाह के समय अग्निकुंड में अन्य सामग्री के साथ जायफल की आहुती दी जाती है । सातवीं शताब्दी के समय में भद्र हरि ने लिखा था कि किसी सुंदरी के वस्त्र धारण किए पल्लवित जायफल सी महकती हुई । मोहब्बत के टोटकों का मसाला थी जायफल जावित्री ।

जावित्री फूल कैसा होता है जावित्री का फूल कैसा दिखता है जावित्री का फूल इमेज

पुरुष की कामोत्तेजना बढ़ाता है जायफल

शाही परिवार इसका प्रयोग कामोत्तेजना बढ़ाने के लिए करते थे । रोम में पुरुष अपने बांई बाहें में जायफल को दबा कर के रखते थे । उनका मानना था कि इससे उनकी प्रेमिका उनकी तरफ आकर्षित होगी ।

अनिद्रा की बीमारी में जायफल का प्रयोग किस प्रकार किया जाता है ?

इसके साथ साथ औषधि के रूप में भी जायफल का उपयोग किया जाता है । अनिद्रा की बीमारी के लिए भी जायफल का प्रयोग किया जाता है ।

जायफल तथा जावित्री को प्राचीन समय में बहुत ही दुर्लभ मसाला माना जाता था । पहले के समय में रईस लोग ही इस्तेमाल करते थे तथा खरीदते थे । आम तथा गरीब लोगों के लिए इस मशाल को खरीदना बहुत ही मुश्किल था ।

प्लेग की बीमारी में खूब प्रयोग हुआ जायफल

जब प्लेग की महामारी शुरू हुई और महामारी ने गांव के गांव खाली करना शुरू कर दिए , तब लोगों ने जायफल का प्रयोग अपनी रक्षा के लिए किया ।

लोग इसे अपने बाजूबंद में पहनते या इसकी माला को गले में डालते थे । वह इस उम्मीद में यह करते थे कि वह इस से बच जाएंगे ।

उनकी कल्पना में जायफल में एक जादुई शक्ति थी । दुश्मनों के विपरीत खड़े होने की ताकत थी जायफल में ।

जायफल ने यूरोपीय खोजी फितरत को उकसाया । मल्लिका द्वीप पर पहुंचते ही उन्होंने जायफल पर अपना कब्जा कर लिया । उनका लालच ऐसा था कि वह बेचने से पहले जायफल को चूने में भिगोकर के रखते थे ।

ताकत तथा समृद्धि का प्रतीक माना जाता था जायफल

ताकि उनके नियंत्रण से बाहर कोई भी पेड़ ना उग सके सीमा के बारे होने वाले पेड़ों को वह काट डालते थे । उस जमाने में जायफल को ताकत तथा समृद्धि का प्रतीक माना जाता था ।

लेकिन फिर भी जायफल ने सीमाओं के परे यात्राएं की 19वीं शताब्दी के आरंभ में भारत में भी जायफल उग रहा था । जायफल का पेड़ डायोसिस होता है यानी कि नर तथा मादा पेड़ अलग-अलग होते हैं ।

फीमेल प्लाट ही फल दे सकते हैं । इसमें पांच अलग अलग टाइप के प्लाट मिलते हैं । मेल प्लांट , फीमेल प्लांट , बाय सेक्सुअल मेल तथा बाईसेक्सुअल फीमेल प्लाट भी शामिल है ।

किसानों को मादा पेड़ होता है 9 मादा पेड़ों के लिए एक नर पेड़ पर्याप्त होता है । 10 से 15 वर्ष पहले यह किस्मत की बात थी कि किसान का पेड़ के लिंग पर कोई जोर नहीं था ।

लेकिन आप बात बदल चुकी है लेकिन आप वैज्ञानिक मादा पेड़ की पौध विकसित करने में कामयाब हो चुके हैं । अब इस तरह की पौध तैयार हो गई है जो कि जल्दी बड़े तथा अच्छी पैदावार दे ।

आज टेक्नोलॉजी इतनी ज्यादा विकसित हो गई है कि किसी भी नर पेड़ को मादा पेड़ में भी बदला जा सकता है । इसकी यही शर्त है कि समय पर सही काम किया जाए ।

जायफल का पेड़ सदाबहार होता है । एक बार जब फल देना शुरू करता है तब बहुत लंबी उम्र तक फल देता रहता है । इसके टी के फल साल में तीन तीन बार तोडे जा सकते हैं ।

इसके फल का प्रयोग जूस बनाकर के फ्रीज में भी रख सकते हो । इसके फल के शर्बत को उल्टी बदहजमी के लिए ले सकते हैं । यह पेट के लिए अच्छा माना जाता है ।

पहली शताब्दी में एक लेखक Pliny The Elder

जायफल तथा जावित्री दोनों ही प्राचीन काल से ही औषधि के रूप में पहचाने जाते हैं । अतीत की गहराई में पहली शताब्दी में एक लेखक Pliny The Elder (23-79 AD) ने अपनी किताब हिस्टोरिया नेचुरल ( Historia Naturalis) में लिखा था ।

भारत के वेदो में भी जायफल का वर्णन मिलता है सिर दर्द , बुखार , अनिद्रा यहां तक कि सांस में बदबू के लिए भी जायफल का प्रयोग बताया गया है । जायफल को इंसान 2000 साल से जानता है ।

जायफल और दूध के फायदे

इस मसाले का प्रयोग दूध में मिलाकर के किया जाता है ताकि वह कामोत्तेजना को बढ़ा सके । कामोत्तेजना को बढ़ाने के लिए इस मसाले का प्रयोग किया जाता है

बड़ो मैं यह काम उत्तेजना को बढ़ाने के लिए किया जाता है । जबकि बच्चों में यह दस्त की समस्या के निवारण के लिए प्रयोग में लिया जाता है । पारंपरिक घरेलू इलाज में यदि आज भी बच्चों का पेट खराब है तो जायफल का सहारा लेते हैं ।

इसे ताजा किस करके दूध या शहद के साथ इस्तेमाल करते हैं । चुटकी भर चटाई जाने की परंपरा सदियों से रही है । जायफल का यह प्रयोग गांव तथा शेर की सीमाओं से परे भी किया जाता है ।

जायफल तथा जावित्री के महत्व

दुनिया भर के वैज्ञानिक जायफल तथा जावित्री के महत्व को समझने लगे हैं । जायफल आंतों को शांत करके दस्त कम करता है । इसके प्रभाव से बड़ी आंतों में द्रव्य वापिस जप्त होता है ।

जायफल के कीटाणु नाशक क्षमता संक्रमण का विनाश करती है । जायफल तथा जावित्री में वह कौन-कौन से अंतर है जो कि यह पेड़ बनाता है । जायफल तथा जावित्री में अणुओं की अनोखी विविधता पाई जाती है जो कि साथ में मिलकर के इन्हें देते हैं । अनोखी महक ,स्वाद में तथा गुण ।

जायफल तथा जावित्री एक नशीला पदार्थ

जायफल तथा जावित्री में एक विशेष अणु होता है । जिसे हम Myristicin कहते हैं । जो कि जायफल तथा जावित्री को एक नशीला पदार्थ बनाता है । Elemicin भी इसमें महकदार मसाले की जोड़ी में मिलने वाला अनोखा अनु होता है । तीसरा सबसे महत्वपूर्ण अनु है Safrole . यह इस पेड़ द्वारा बनाए गए अजब रसायन है ।

जायफल तथा जावित्री दोनों एक जैसे होते हैं । जबकि जायफल में मक्खन के जैसा होता है जिसे जोड़ों के दर्द में लगाते हैं ।

इन दोनों पदार्थों का इस्तेमाल औषधि के रूप में सौंदर्य प्रसाधन के रूप में तथा इत्तर के रूप में भी किया जाता है । खाद्य उद्योग में भी इसका खूब इस्तेमाल किया जाता है । इसकी हमेशा मांग बनी रहती है । इसका प्रयोग मात्र रसोई तथा भोजन तक सीमित नहीं है ।

किसी और से अच्छी चीज का जरूरत से ज्यादा उपयोग खतरनाक भी साबित हो सकता है । जायफलतथा जावित्री दोनों मसाले काम के तो होते हैं । लेकिन यह सीधा मस्तिष्क पर असर डालते हैं ।

जब बाहरी दुनिया से कोई सिग्नल मस्तिष्क में पहुंचता है तब इस नशीले पदार्थ के कारण वह समझ नहीं पाता है । आप वह सुनते हैं देखते हैं जो कि सचमुच में है ही नहीं ।

संस्कृत में जायफल का एक नाम Madashounda भी है । Madashounda यानी कि नशीला फल । वैज्ञानिक जान गए हैं कि जायफल में पाए जाने वाले दोनों पदार्थ इस नशीले पदार्थ का कारण होता है ।

यदि अधिक मात्रा में जायफल खा ले तो वह मस्तिष्क पर असर करता है । वह ठीक से काम नहीं करता है । विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि ज्यादा मात्रा में इसका सेवन जोखिम भरा हो सकता है ।

यदि इसका ज्यादा प्रयोग कर लेते हैं या फिर ज्यादा खा लेते हैं तो दिल की धड़कन तथा श्वास पर बुरा असर पड़ेगा । इससे आपकी जान तक जा सकती है ।

Grenada के राष्ट्रीय ध्वज पर जायफल का चित्र

जायफल तथा जावित्री को एक अनोखा सम्मान भी मिला हुआ है । Grenada के राष्ट्रीय ध्वज पर जायफल का चित्र होता है । कनाडा विश्व भर में सबसे अधिक जायफल उगाने वाला देश माना जाता है ।

Viswasree जायफल तथा जावित्री की एक उन्नत किसम

8 वर्षों के सतत प्रयास के बाद Viswasree फसल को तैयार किया गया है । इसमें फल जल्दी लगते हैं । तथा ज्यादा मात्रा में लगते हैं । Viswasree जायफल तथा जावित्री की एक उन्नत किसम है । इस किचन की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी अच्छी होती है तथा इसकी ऊंचाई भी सीमित होती है ।

कम लागत में आसानी से इनकी फलों को तोड़ा जा सकता है । जायफल तथा सावित्री का भविष्य सुनहरा है ।

जायफल के फायदे। जायफल खाने के फायदे। जायफल के गुण।