इन जानवरों की अद्भुत शक्ति जान उंगली दबा लोगे। जीव जिनकी सूंघने की शक्ति कमाल की हैं।
इन जानवरों की अद्भुत शक्ति जान उंगली दबा लोगे। जीव जिनकी सूंघने की शक्ति कमाल की हैं।

जीव जिनकी सूंघने की शक्ति कमाल की हैं। जिवो के कमाल की शक्तियों के बारे में जानकारी। जानवरों को कुदरत ने क्या कमाल की।

कुछ जीवो के सेंस ऑर्गन यानी कि ज्ञानेंद्रियां इतनी तेज क्यों होती है | हाथी के बड़े-बड़े कान, तितली के एंटीना जो कि नजदीक से देखने पर पत्थर जैसे दिखते हैं |

सांप की दो मुंही जीभ , मगरमच्छ जैसों का क्या जिसकी खाल के सेंसर सेल पर बहुत कम ध्यान जाता है |

कुदरत ने इन्हें यह खासियत सिर्फ सजावट के लिए तो नहीं दी होगी ना | जिवो के सेंस ऑर्गन जैसे हैं

, जहां है , जिस आकार प्रकार के हैं | उसका एक मकसद है हमारी तरह यह जीव भी इन sense ऑर्गन की बदौलत ही आपस में बात कर पाते हैं | अपना रास्ता खोजते हैं | खतरों से बचते हैं और सबसे बढ़कर अपना खाना तलाशते हैं |

जब आप देखेंगे कि कुछ जिव के सेंस ऑर्गन कितने बेहतर हैं तो ताजूब करेंगे कि हम इंसान श्रंखला में सबसे ऊपर क्यों है | जिवो की ऐसी ऐसी सुपर सेंसेस है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं |

इस एपिसोड में हम नजर डालेंगे जीवो की देखने की शक्ति पर और हम देखेंगे कि हमें जितना दिखाई देता है सच उससे कहीं ज्यादा है | यह सब इंसान की सोच से भी परे चीजें हैं | जिवो की तेज ज्ञानेंद्रियां इंसानों से भी बहुत ज्यादा तेज होती है |

एक बाज दर्जन मीटर से भी एक मछली को देख लेता है | वैज्ञानिक मानते हैं कि करीब 54 करोड साल पहले एक विनाशकारी हादसे के बाद आंखों जैसा कुछ विकसित हुआ था |

शुरुआती आंखें रोशनी का पता बताने वाले शुरुआती अंग था | पर तब से अब तक आंखों का बहुत विकास हो चुका है | अब यह यह एक नाजुक इंद्री बन चुकी है | आप विश्वास नहीं करेंगे कि पक्षियों को यह दुनिया कैसी नजर आती है |

बाज तथा गरुड़ जैसे पक्षि

बाज तथा गरुड़ जैसे पक्षियों के नजर हम से कई गुना ज्यादा तेज होती है | eagle तथा गरुड़ मीलों दूर से खरगोश को देख सकते हैं |

जबकि बाज तथा गिद्ध 3000 से 4000 मीटर ऊपर से जमीन पर घूमते लजीज चूहों को ताड़ लेते हैं | देखते ही यह पक्षी 100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उन पर झपट पड़ते हैं | इस दौरान इनका शिकार लगातार इनके फोकस की नजर में रहता है |

ऐसी फुर्ती और रफ्तार पाने के लिए हम इंसानों को जेट फाइटर प्लेन बनाने पड़ते हैं | गरुड़ की नजर दुनिया की सबसे दिलकश चीजों में से एक है जब कोई गरुड़ आसमान से नीचे अपने शिकार पर जा पड़ता है |

तब उसके आंखों की मांसपेशियां लगातार उसके कॉर्निया तथा लेंस को एडजेस्ट करती रहती है ताकि japtai वक्त घटती हुई दूरी के बावजूद उनका शिकार लगातार उनकी नजरों के फोकस में ही रहे |

Lankin Castro

Lankin Castro ऑस्ट्रेलिया के खुले इलाकों में आम पाया जाता है यह दिन में कीड़े मकोड़ों छोटे पक्षियों तथा चूहों का शिकार करता है |

सभी बाज की तरह कैस्टल की भी अपेक्षाकृत बड़ी आंख होती है | इनकी आंखों में light रिसेप्टर तथा दो गोल कॉर्निया भी होते हैं | यह टेलिफोटो lens की तरह काम करते हैं जो कि बड़ा कर देते हैं |

कैस्ट्रो जमीन से 15 मीटर ऊपर मंडराते हुए 29 सेंटीमीटर लंबे शिकार को देख लेता है, है ना यह कमाल की नजर | अपनी इसी नजर की बदौलत यह कमाल का शिकारी है |

मगर केस्ट्रेल के इंद्रियों के हथियार घर में एक और हथियार है | यह अल्ट्रावायलेट किरणों को तथा लाइट को भी देख सकते हैं |

पीछा करते हैं उस अल्ट्रा लाइट का जो चूहे , चूहों के जाने वाले रास्तों से छोटी मोटी गंध से रिफ्लेक्ट होती है | उसकी मदद से यह अपने शिकार तक पहुंच जाते हैं |