डायनासोर का अंत कैसे हुआ वैज्ञानिकों के मत कैसे हुआ डायनासोर का सर्वनाश

डायनासोर का अंत कैसे हुआ वैज्ञानिकों के मत कैसे हुआ डायनासोर का सर्वनाश

डायनासोर का अंत कैसे हुआ वैज्ञानिकों के मत

 कैसे हुआ डायनासोर का सर्वनाश धरती से डायनासोर के अंत पर वैज्ञानिकों में अलग-अलग मत डायनासोर के अंत के सिद्धांत पर सवाल

कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि वोल्केनो से निकलने वाली सल्फर गैस डायनासोर के अंत का कारण रही होगी । सल्फर गैस भारी होने के कारण नीचे जमीन पर बैठ जाती है और धुंध के बादल बना लेती है । सल्फर एक ऐसी गैस होती है जिसे हम नहीं देख पाते हैं तथा नहीं सुंघ पाते हैं ।

डायनासोर को भी सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत थी ।

कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि एक बहुत बड़ा रेत का तूफान भी डायनासोर के अंत का कारण रहा होगा । यह रेत के मलबे की दीवार केही मीटर ऊंची तथा कई फुट की हो सकती थी । यह अपने रास्ते में आने वाली हर चीज का दम गोट देती थी और अंधा कर देती थी ।

रेत की आंधियां कई घंटों तक चलती रही होगी जिसके कारण डायनासोर का दम घुटने से उसकी मौत हो गई होगी ।

बायो हेजरड एक खतरनाक जहरीला पदार्थ छोड़ता है और यह बहुत ही खतरनाक होता है । इसका एक छोटे से छोटा कण भी इंसान की जान ले सकता है । इसके 1 ग्राम का 200 करोड़ का हिस्सा भी एक व्यस्क इंसान को मारने के लिए काफी है ।

यह वायरस बहुत तेजी से अपनी तादाद बढ़ाता है । यह वायरस रुके हुए पानी में पनपता है । जब डायनासोर अनजाने में तालाब से पानी पीता है तब वह इनफेक्टेड हो जाता है ।

यह बैक्टीरिया तेजी से अपनी तादाद बढ़ाने लगता है जैसे ही डायनासॉर मरता है उसकी लाश अन्य जीवो के लिए एक दावत बन जाती है । जब कोई अन्य जानवर इसे खाता है तब वह भी इनफेक्टेड हो जाता है और सब मरने लगते हैं ।

कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि एस्ट्रोनॉट भी डायनासोर के अंत का कारण हो सकता है । एस्ट्रोनॉयड वह चट्टान होती है जो कि धरती के चारों ओर चक्कर लगाती है ।

6 पॉइंट 64000 साल पहले 4450 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सफर करता हुआ एक विशालकाय एस्ट्रोनॉट डायनासोर का काल बन गया ।

यह एस्ट्रोनॉयड इतना बड़ा था कि मानो धरती पर माउंट एवरेस्ट गिरा हो इतना बड़ा था । यह धमाका इतना बड़ा था इतना खतरनाक था कि सैकड़ों किलोमीटर तक हर जीव मारा गया । उसके बाद में तूफानी हवाएं बनी दूर दूर तक फैली आग से जलकर राख में बदल गया ।

इस घटना से धरती पर डायनासोर तो मारे गए थे लेकिन सारे डायनासोर का सफाया इससे नहीं हुआ था उसके बाद में एक और घटना हुई थी ।

वैज्ञानिक मानते हैं कि वह एस्ट्रोनॉयड समुद्र में गिरा था जहां पर बदकिस्मती से एक खतरनाक चैन रिएक्शन होने का इंतजार कर रहा था । जैसे ही एस्ट्रोनॉट पानी में गिरा पानी ने एस्ट्रोनॉट की ताकत को सोख लिया ।

वैज्ञानिक बताते हैं कि यह एस्ट्रोनॉट गहरे समुद्र में नहीं टकराया था । यह उतले समुद्र में टकराया था । जहां समुद्र तल में एक घातक राज छिपा रहता था ।

जब एस्ट्रोनॉयड समुद्र से टकराया तब धूल के कणों के बादल बन गए जो कि सल्फर गैस के थे । यह धूल के बादल इतने घने थे इन्होंने सूरज की रोशनी को ही रोक दिया । सिर्फ कुछ ही हफ्ते में हड्डियां जमा देने वाली ठंड तथा अंधेरा हो गया ।

यह वीरान सर्दियों केहि सालों तक चली इसीलिए । यह विनाशकारी बन गया जिससे कि कुछ भी नहीं बच सका था । इस घटना से धरती पर 70% प्रजातियां खत्म हो गई थी ।