केसर के बारे में रोचक जानकारी केसर से जुड़े अद्भुत तथ्य

केसर से जुड़े अद्भुत तथ्य मसालों के राजा 1 किलो केसर का मूल्य

केसर के बारे में रोचक जानकारी । सोने से भी महंगा होता है केसर का धागा ।

केसर के बारे में रोचक जानकारी केसर से जुड़े अद्भुत तथ्य

स्वास्थ्य से जुड़े केसर के फायदे तो सभी जानते ही होंगे । लेकिन आज हम केसर से जुड़े अद्भुत तथ्य के बारे में जानेंगे । साथ ही केसर के इतिहास को भी बारीकी से देखेंगे ।

ऐसा माना जाता है कि केसर को आठवीं शताब्दी ईसा पूर्व रोमन काल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । पूर्वी ग्रीक संस्कृति में केसर की पहली ज्ञात छवि और पुरानी है ।

केसर के जन्म की यूनानी दंतकथा

यह बात काफी सदियों पुरानी है । जब देशों के नाम भी नहीं थे । तब धरती पर एक कॉकस रहता था । कॉकस ज्यादा ही खूबसूरत था । उसको मोहब्बत हो गई थी इस्माइलेक्स से ।

इस्माइलेक्स इंसान नहीं परि थी। इन दोनों की प्रेम कहानी से परेशान होकर के देवताओं ने उन्हें फूलों में बदल दिया । क्रोकस बन गया केसर । अद्भुत केसर की कहानी है प्यार और जुदाई की कहानी है ।

इंसानों को इस फूल की खूबसूरती ने आकर्षित नहीं किया है । उनको तो फूल के शुर्ख तीन सिरे वाले स्टिगमा ने अपनी और खींचा है ।

दुनिया का सबसे दुर्लभ तथा दुनिया का सबसे बहुमूल्य मसाला है केसर । उगते सूरज के रंग वाले केसर को उसकी महक तथा स्वाद के लिए सदियों से इंसान ने चाहा है ।

खूबसूरती के लिए , पूजा के लिए , स्वास्थ्य के लिए , रंगाई के लिए केसर हमेशा से असाधारण है ।

माना जाता है कि केसर की उत्पत्ति ग्रीस यूनान में हुई अनुमान है कि आज से करीब साढे 3000 साल पहले यह पृथ्वी पर आ चुका था ।

भूमध्य सागर में मिले भित्ति चित्र से और गुफाओं में बने चित्रों में इसके प्राचीन साक्षी मिले हैं । वनस्पति शास्त्रियों के लिए केसर का नाम प्रोकोसटाईपस और परिवार इरीडेशीये है । यह सदस्य फूलों वाले सदस्यों में से है । यह सभी पौधे भूमिगत कंध से उगने वाले होते हैं ।

केसर की बनावट तथा रंग रूप कैसा होता है ?

केसर की बनावट अनोखी होती है । कोई शाखाएं नहीं होती है । मानो की घास में उगता हुआ फूल है । जमीन से कुछ ही इंच ऊपर लगता है यह । इसमें बीज बनते ही नहीं है । माना जाता है कि किसी जंगली नस्ल से प्राकृतिक रूप से जन्मा है हाइब्रट केसर । यह पूरी तरह से इंसानों पर निर्भर होता है ।

यह पूरी गर्मी में मिट्टी के नीचे निस प्राण पड़े रहते हैं । पतझड़ का मौसम आते ही फूल तथा पत्ते जमीन से बाहर निकलने लगते हैं । हरे पत्तों के बीच में बैंगनी रंग का फूल होता है ।

केसर की खेती कहां कहां पर होती है ?

इन्हें तुरंत तोड़ना जरूरी होता है । वरना यह धूप में मुरझा जाता है । उपज के लिए पूरी तरह से इंसानों पर निर्भर होता है । यह हर जगह नहीं उगता है । सिर्फ़ ईरान ,ऑस्ट्रेलिया , इटली ,ग्रीस ,फ्रांस और भारत तक सीमित है ।

भारत में कश्मीर की खेती कहां पर होती है ?

भारत में केसर की कहानी सिर्फ जम्मू कश्मीर से ही शुरू हो सकती है । यहीं पर केसर हजारों वर्षों से उगता आया है । श्रीनगर से सटे हुए पंपोर में केसर की खेती होती है जो कि पुलवामा जिले के अंदर है ।

झेलम नदी के पूर्वी तट पर इस इलाके में 220 गांव सदियों से केसर को उगाते आए हैं । यहां की जमीन ढलान वाली है तथा हवा में केसर की खुशबू होती है ।

कितने फूलों से 1 ग्राम केसर निकलता है ?

करीब डेढ़ सौ फूलों में से 1 ग्राम केसर निकलता है । डेढ़ लाख फूलों में से सिर्फ 1 किलो केसर ही निकलता है । केसर के फूल का एक एक हिस्सा काम आता है ।

केसर के धागों को तोड़ते ही तुरंत सुखाना जरूरी होता है । यदि उन्हें नहीं सुखाते हैं तो वह काले पड़ जाते हैं । जिससे कि उसका मेहक और स्वाद दोनों बदल जाएंगे ।

केसर के जन्म की यूनानी दंतकथा केसर की खेती कहां कहां पर होती है ?

केसर जम्मू कश्मीर में कैसे पहुंचा ?

केसर को मसालों का राजा भी कहा जाता है । खवाजा मसूद वाली और हजरत शेख सरूपुदीन की मजार में । वह मानते हैं कि 11वीं से बारहवीं शताब्दी के करीब यह दो सूफी संत यहां आए थे ।

वह दोनों बीमार पड़ गए थे । एक स्थानीय मुखिया ने उनकी सेवा की तथा उन्हें स्वस्थ किया । ठीक होने पर उन सूफी संतों ने पंपोर को तोहफे में केसर को दिया ।

विशेषज्ञ मानते हैं कि केसर 11 वीं शताब्दी से बहुत पहले ही भारत में उगने लगा था । खाने में केसर कैसे जुड़ा इसमें कोई दोहराय नहीं है ।

इसका श्रय मुगल बादशाह जहांगीर को जाता है । उन्होंने अपने दस्तरखान में केसर को जोड़ा तथा उन्हें मशहूर कर दिया ।

प्राचीन मिस्र अद्भुत ज्ञान तथा सुंदरता का गढ़ । माना जाता है कि प्राचीन रोमन वासी अपने तकियों में केसर भर कर के सोते थे । उनका मानना था कि ऐसा करने से नशा उतर जाता है ।

ज्ञानी रानी क्लियोपैट्रा नहाने के पानी में केसर

खूबसूरत तथा ज्ञानी रानी क्लियोपैट्रा नहाने के पानी में केसर जरूर घोलती थी । प्राचीन समय से ही केसर का रिश्ता खूबसूरती तथा प्राण शक्ति से जोड़ा जाता है ।

कुछ जगहों पर ऐसी मान्यता भी है । जहां पर केसर को दूध में मिलाकर के दुल्हन को पिलाया जाता है । और माना जाता है कि यह उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देगा ।

केसर को सेफ्रिन के नाम से भी जाना जाता है । कश्मीरी लोग केसर को कोंग के नाम से जानते हैं। यह धागे अपनी महक तथा रंग के लिए बेशकीमती होते हैं ।

भारत के पांमपुर तथा किश्तवार मे केसर की खेती

केसर की खेती भारत के पांमपुर तथा किश्तवार मे सबसे अधिक होती है । इसकी फसल विश्व की सबसे कीमती फसल मानी जाती है । केसर यहां के लोगों के लिए वरदान है । क्योंकि केसर के फूलों से निकाला जाता है । सोने के जैसा कीमती केसर । केसर की कीमत बाजार में 3 लाख से 3.30 लाख रुपए प्रति किलो होती है ।

महान सेनानी सिकंदर तथा एलेग्जेंडर द ग्रेट उनकी सेना शास्त्र के साथ केसर भी रखती थी । घाव पर लगाने तथा थकान मिटाने के लिए इस्तेमाल करते थे । वह केसर की पट्टी बांधते थे तथा केसर के पानी से नहाते थे ।

महान ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है । खांसी सर्दी पेट से संबंधित समस्या अनिद्रा हृदय रोग उदासी बच्चेदानी से रक्त स्रावके लिए भी केसर का उपयोग किया जाता है उन्होंने इन सब के लिए केसर को दवा बताया है ।

यूनानी पद्धति का जन्म केसर की सर जमीन यूनान में हुआ भारत में यह चिकित्सा प्रणाली अरबी लोगों के साथ में भारत आई ।

15 वी शताब्दी क्या आस-पास में आयुर्वेद में भी केसर के गुणों का वर्णन मिलता है । शास्त्रों में इसकी गर्म तासीर का वर्णन मिलता है ।

माना जाता है कि इसी गर्म प्रभाव के कारण केसर को त्वचा के लिए अच्छा माना जाता है मृत कोशिकाओं को हटा करके यह चेहरे कोरोनावायरस है ।

केसर के बारे में रोचक जानकारी । सोने से भी महंगा होता है केसर का धागा

केसर को दूध में डालकर पीते हैं

जब केसर को दूध में डालकर पीते हैं तो यह हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन को बढ़ाता है । जिससे कि हमारी स्किन में ग्लो आने लगता है ।

केसर के धागों में कार्बोहाइड्रेट विटामिन खनिज लवण आदि पदार्थ पाए जाते हैं इसमें आप तक डेढ़ सौ पदार्थों की खोज की जा चुकी है ।

केसर में मौजूद कुछ घुलनशील तत्व पानी में घुलकर हमें गंध का एहसास कराते हैं । जबकि कुछ तत्व पानी में घुल करके उन्हें रंग प्रदान करते हैं ।

केसर में कौन-कौन से तत्व पाए जाते हैं ?

इन के 3 गुण बहुत ही खास माने जाते हैं । जिसमें सैफ्रिनन महक के लिए जाना जाता है । माइक्रोप्रोसिन‌ थोड़े कड़वे अनोखे स्वाद के लिए जाना जाता है ।
पानी में घुलनशील केरेटिनोइड देता है केसर को रंग ।

मसालों ने युद्ध लड़े हैं । जहाज तैरे हैं तथा संधियां हुई है । देश गुलाम हुए हैं । इंग्लैंड के राजा हेनरी केसर के इतने दीवाने थे कि उसके राज्य में अगर कोई उसमें मिलावट करता तो उसे सजा के रूप में मौत मिलती थी ।

यदि आपको असली केसर की पहचान करनी है तब यदि इनके धागों को दूध या पानी में डालते हैं तब इसके धागों का रंग नहीं उतरता है । तभी वह केसर असली माना जाता है ।

जैन धर्म मानने वाले लोग केसर को पुजा के रूप में मंदिर में इस्तेमाल करते हैं । इसे पूजा के रूप में मंदिरों में इस्तेमाल किया जाता है ।