Lal kila Delhi in India.लाल किला किसने बनवाया था। दिल्ली का Red Fort.

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delhi lal kila history in hindi आज हम भारत की राजधानी दिल्ली के किले की बात कर रहे है। पर्यटन की दृष्टि से देखा जाए तो यह किला गोल्डन fort है, अब हम इसके इतिहास के बारे में बताएंगे जो इस प्रकार है। दिल्ली का Red Fort ही Lal kila है।

लाल किला का ithihas – delhi lal kila history in hindi .

दिल्ली का लाल किला यह एक अत्यंत पुरानी इमारतों में गिनी जाने वाली महत्वपूर्ण इमारतों में से एक है ।

यह quila लाल पत्थरों से बनी हुई एक प्राचीन दीवार नहीं है इसका बनना इतिहास का बहुत बड़ी घटना है।
Red Fort ने ithihas के पन्नों को झकझोर दिया है। सन् १६२८ इसी में मुगल बादशाह गद्दी पर बैठा था जिसका नाम शाहजहां था उस समय देश में अमन था ।

शाहजहां को बड़ी-बड़ी इमारतें बनवाना बहुत पसंद था और वह Agra का राजा था उसी समय उसको नया नगर बसाने का विचार आया था ।

लाल किला किसने बनवाया था। – lal kila kisne banvaya .

Red fort शाहजहां ने बनवाया था और इसी बात को ध्यान में रखते हुए सन 1639 में लाल किले की नींव रखी गई। उस समय शाहजहां का शासनकाल Agra से ही संचालित होता था। लेकिन उसने अपने साम्राज्य का विस्तार करने के लिए एक नया नगर बसाया जिसका नाम शाहजहानाबाद रखा।

Delhi का पुराना नाम Old Name in Delhi

दिल्ली का पहला नाम शाहजहानाबाद है। और लाल किला बनाने वाले उस्ताद अहमद ओर खमीर थे। इन कारीगरों ने लाल किला निर्माण के लिए रायसीना पहाड़ी का चुनाव किया था।

Red fort बनाने में कितना समय लगा।

Lal kila बनाने में कारीगर और मजदूर पूरा बनाने में 9 साल लगे उस समय किला बनकर तैयार हुआ शाहजहां बादशाह जी काबुल में थे।

इसी के सामने एक नगर बसाया जिसका नाम शाहजहां ने अपने नाम पर रखवाया जिसे शाहजहानाबाद कहते हैं।

Quila की सुरक्षा के लिए एक दीवार बनाई गई इसके आसपास बहुत बड़ी-बड़ी खाई कर दी गई जिससे इस पर कोई हमला ना कर सके। दिल्ली के किले के पीछे एक नदी बहती है उसका नाम यमुना नदी है वहां पर बादशाह स्नान करने जाते थे।

दिल्ली के quilla की प्राचीन दीवार किसने बनवाई थी।

दिल्ली के प्राचीन दीवार औरंगजेब ने बनवाई थी जिसे घुंघट वाली दीवार भी खा जाता है red fort के दक्षिण में एक दरवाजा है जो जामा मस्जिद के लिए जाता है इसमें बादशाह है नमाज अदा करने जाते थे यह ithihas मुगलों का रहा है इसके बाद हम बात अंग्रेजों की कर रहे हैं।

Lal kila Delhi in India

संक्षिप्त रूप में जानकारी के लिए बता दें की 1903 में लॉर्ड कर्जन ने इसके दरवाजे पर दोनों तरफ दो हाथी रखवा दिए थे जो पत्थर के थे इससे दीवार की और शोभा बढ़ गई थी।

लाल किला कहा है – where is red fort.

लाल किला दिल्ली में स्थित है जो भारत की राजधानी है यहां पर बस के द्वारा ट्रेन के द्वारा या हवाई जहाज के द्वारा जाया जा सकता है पर्यटन की दृष्टि से यह किला गोल्डन जुबली में शामिल किया जाता है और यह विश्व धरोहर सूची में आता है जिसे देखने देश विदेश से बहुत से पर्यटक आते हैं।

Delhi ka lal kila
दिल्ली के लाल किला में अंतिम बादशाह है बहादुर शाह जफर था इसके बाद मुगल वंश का एक तरीके से देखा जाए तो पतन हो गया था। और बहादुर शाह 1842 में जफर ने जफर महल का निर्माण करवाया था।

MOTI मस्जिद का निर्माण किसने करवाया था।

मोती मस्जिद का निर्माण औरंगजेब ने करवाया था जो संगमरमर की बनी है यह देखने में बहुत सुंदर लगती है इसको देखने देश विदेश से बहुत लोग आते हैं जिससे भारतीय पर्यटन को बहुत लाभ होता है। तथा बहादुर शाह जफर ने एक ऐसे महल का निर्माण करवाया था जिसके चारों तरफ पानी था लेकिन 1842 के बाद बहादुर शाह जफर के स्वास्थ्य मैं सही से काम नहीं किया इसी कारण यह महल फौजियों के लिए तैरने के लिए 1842 में दे गया।

क्रांति का बिगुल ।

दिल्ली के लाल किले में एक ऐसा समय भी आया कि अंग्रेजों को यह बहुत अच्छा लगने लगा क्योंकि यह भारत की राजधानी थी जिस पर बहादुर शाह जफर शासन करता था यह बात बहादुर शाह जफर जान गया था की अंग्रेजो की नीयत साफ नहीं है।

इसीलिए बहादुर शाह जफर अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति 1857 मैं शामिल हो गए थे लेकिन वह अपनी गद्दी नहीं बचा सके। और दिल्ली के लाल किले पर अंग्रेजों का शासन हो गया। इसके बाद फोर्ट में बहुत बदलाव हुआ

अंग्रेजों ने इस किले को अंग्रेजी आर्मी की बैरिक अथवा छावनी बना दी फिर एक दशक ऐसा भी आया कि 1940 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दिल्ली चलो का नारा दिया जो सफल भी हो गया इसके बाद भारत आजाद हुआ अंग्रेज भारत छोड़कर चले गए इसी के बाद पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जीने लाल किले पर झंडा फहराया था ।

किस प्रधानमंत्री ने लाल किले पर झंडा फहराया था। FIRST PRIME MINISTER

भारत के अथवा स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी ने झंडा वंदन किया था। जब से यह नियम बन गया कि हर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर झंडा वंदन के लिए पर किया जाने लगा यह अब परंपरा बन गई है यह जानकारी आपको कैसी लगी इसे शेयर अवश्य करें।

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