मधुमक्खी कितने प्रकार की होती है मधुमक्खी के बारे में 30 रोचक जानकारी

अल्बर्ट आइंस्टीन के अनुसार मधुमक्खियों के फायदे ।अगर मधुमक्खी खत्म तो दुनिया भी खत्म

मधुमक्खी कितने प्रकार की होती है मधुमक्खी के बारे में 30 रोचक जानकारी

अगर मधुमक्खी खत्म तो दुनिया भी खत्म

अगर मधुमक्खी खत्म तो दुनिया भी खत्म ऐल्बर्ट आइन्स्टायन ने ऐसा क्यों कहा था कि मधुमक्खियाँ बहुत ही महत्वपूर्ण हैं?मधुमक्खी कितने प्रकार की होती है मधुमक्खी के बारे में 30 रोचक जानकारी क्या होगा अगर इस दुनिया में मधुमक्खियां ना

प्रसिद्ध तथा महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा कि यदि मधुमक्खियां पृथ्वी से गायब हो जाए तो तो 4 साल में मानव जाति का अस्तित्व इस दुनिया से खत्म हो जाएगा ।

अल्बर्ट आइंस्टीन ने ऐसा क्यों कहा । इसके पीछे क्या कारण रहा होगा । क्योंकि मधुमक्खियां पौधों में परागण का कार्य करती है तथा यह परागण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । यह मधुमक्खियां परागण में पौधों की सहायता करती है ।

पूरे विश्व में मधुमक्खियों की कुल कितनी प्रजातियां पाई जाती है ?

आज बड़े ही दुख तथा अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि आज मधुमक्खियों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है । उनके ऊपर खतरा मंडराने लग गया है ।

पूरे विश्व में मधुमक्खियों की 25000 से 30000 प्रजातियां मौजूद है । इनमें से एक चौथाई परागण में मधुमक्खियों की भागीदारी होती है । भारत में मधुमक्खियों की एक हजार के लगभग प्रजातियां पाई जाती है ।

मधुमक्खियों का परागण में महत्वपूर्ण योगदान

यदि मधुमक्खियों की प्रजातियां इसी तरह खत्म होती गई तो आने वाले समय में आप किसी भी फल का ने तो स्वाद ले पाएंगे ने ही आप कोफी की चुस्कियां ले पाएंगे । क्योंकि कोफी के परागण में मधुमक्खियों की अहम भूमिका होती है ।

विश्व भर में मधुमक्खियों की 9 प्रजातियां ऐसी पाई जाती है जो कि परागण का काम करती है । उन्हें 9 प्रजातियों में से 5 प्रजातियां भारत में पाई जाती है ।

भारत में मौजूद मधुमक्खियों की 5 प्रजातियां के नाम क्या-क्या है ?

1 . एपिस सेराना इंडिका
2 . एपिस मेलिफ़ेरा इटालियन
3 . एपिस डोरसाटा
4 . टेट्रा गोनाला ( मेलिपोना इरिडिपेनिस )
5 . एपिस फ्लोरिया

भारत की घरेलू मधुमक्खी एपी सिराना इंडिया

एपिस सेराना इंडिका

यह मूल भारत की घरेलू मधुमक्खी है । इनकी बहुत सारी अलग-अलग स्पीशीज मौजूद है । हर इलाके में इसकी अलग-अलग स्पीशीज पाई जाती है । यह एक पालतू मधुमक्खी है । भारत के लोग इसे पालते हैं और इससे सेहद इकट्ठा करते हैं ।

एपीस मेलीफेरा

यह प्रजाति भारत की नहीं है । यह एक इटालियन प्रजाति है । यह प्रमुख रूप से उत्तर भारत के मैदानों में पालतू मधुमक्खी के रूप में इसे रखा जाता है ।

एपिस डोरसाटा , एपिस फ्लोरिया ,टेट्रा गोनाला यह मधुमक्खियों की जंगली प्रजातियां है । यह बड़े पैमाने पर पाई जाती है ।

एमपी डोरसाटा

एपिस डोरसाटा भारत को सबसे बड़ी मधुमक्खी के रूप में भी जाना जाता है । यह मधुमक्खी लंबी दूरी की यात्राएं मधुमक्खियों के ग्रुप के साथ में करती है । यह मधुमक्खी मौसम तथा तापमान के हिसाब से अलग-अलग जगह पर अपने छत्ते बनाती है ।

ऐल्बर्ट आइन्स्टायन ने ऐसा क्यों कहा था कि मधुमक्खियाँ बहुत ही महत्वपूर्ण हैं?

कीट पतंगों का परागण में महत्वपूर्ण योगदान

हम यह नहीं कह रहे हैं कि सारा का सारा काम मधुमक्खियों पर डिपेंड होता है । लेकिन परागण का काम मधुमक्खियां ही पूरा करती है । पूरे विश्व में हिंदू प्रजातियों का 70% योगदान परागण में रहता है ।

इसके अलावा बाकी के परागण का काम हमारे अन्य किट करते हैं । जिनमें ततैया , तितली , भंवरै तथा कीट पतंग भी परागण का काम करते हैं ।

मधुमक्खी का छत्ता

मधुमक्खी के छत्ते में एक रानी मधुमक्खी होती है जो कि पूरे परिवार को एक फेरोमोन के तहत कंट्रोल करती है । मधुमक्खी के छत्ते में नर बहुत कम होते हैं।
मधुमक्खी के छत्ते में श्रमिक मधुमक्खियां भी होती है छत्ते में मौजूद प्रत्येक मधुमक्खी का एक अपना कार्य होता है ।

हर मधुमक्खी को अपना कार्य पता होता है । जैसे कि अंडे किसको देना है । फूलों में से रस किस को निकला ना है । छते की सफाई किस को करनी है । यह सारे के सारे कार्य मधुमक्खियां आपस में मिल बांट कर के करती है ।

मधुमक्खी एक बायोइंडिकेटर के रूप में भी कार्य करती है । यदि हम मधुमक्खी के शहद का आकलन करें तो उस एरिया में मौजूद पोलूशन का पता हमसे शहद से आसानी से लगा सकते हैं तथा उस एरिया में मौजूद पेस्टिसाइड का भी पता मधुमक्खी के शहद से चल जाता है ।

परपरागित फसलों के नाम

परपरागित फसलें वह फसलें होती है जो कि दूसरे जीवो पर निर्भर रहती है । यानी कि वह खुद परागण नहीं कर सकती है । इनको परागण के लिए किसी अन्य की जरूरत पड़ती है ।

यदि परागण का कार्य संपूर्ण नहीं होता है तो एक भी फल तथा सबजी की पैदावार नहीं होगी । जैसे कि खीरा , ककड़ी , धनिया , सरसों इन फसलों में यदि परागण ना हो तो एक भी दाना नहीं निकलेगा ।

तभी तो महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था कि मधुमक्खियों के बिना मनुष्य 4 साल में खत्म हो जाएगा । क्योंकि अल्बर्ट आइंस्टीन ने इसके महत्व की भूमिका को पहले ही समझ लिया था । अल्बर्ट आइंस्टीन इस बात को भलीभांति जानते तथा समझते थे ।