मूंगे की चट्टान से बना अनोखा दीप लक्ष्यदीप एक अद्भुत जगह

मूंगे की चट्टान से बना अनोखा दीप लक्ष्यदीप एक अद्भुत जगह

कोरल Coral क्या है मूंगे की चट्टानें किस महाद्वीप में है ग्रेट बैरियर रीफ किस महासागर में है

मूंगे की चट्टान से बना अनोखा दीप लक्ष्यदीप एक अद्भुत जगह

कोरल Coral क्या है मूंगे की चट्टानें किस महाद्वीप में है ग्रेट बैरियर रीफ किस महासागर में है ग्रेट बैरियर रीफ (अंगरेजी: Great Barrier Reef) लक्ष्य दीप , दीप समूह अरब सागर से घिरा हुआ है । यह भारत की शानदार भौगोलिक समवर्ती की मिसाल है । यह दीप भारत की इकलौती मूंगा चट्टान है ।

इन द्वीपों में कोरल की आकर्षक प्रजातियां मौजूद है । जो कि अपने जीवन काल के दौरान ही नहीं अपने दम तोड़ने के बाद भी लक्ष्यदीप के हित में काम कर रही है । यह ऐसी चट्टानों का निर्माण करती है जिसकी वजह से यह दीप तूफानों मबढ़ती1 बचाव हासिल करते हैं बल्कि इनका फैलाव बढ़ता है ।

देखने पर यह चट्टाने निर्जीव लगती है । लेकिन इसके नीचे बहुत सारे जीव रहते हैं ।इससे पारिस्थितिक तंत्र की उत्पादकता बढ़ती है । जलवायु में परिवर्तन इन कमाल के द्वीपों पर बहुत ही बुरा असर डाल रहा है ।

यह कोरल चट्टाने भारतीय उपमहाद्वीप के अतीत की सुनहरी यादों को अपने अंदर संजोए हुए हैं । जो कि हमें उनके बारे में बताते रहते हैं ।

भारत का अधिकतर हिस्सा इसके पेनिनसुला का भाग बन गया है और यह लाखो साल की गतिविधि के बाद में बना है । इसके दौरान समुद्र के बीच वाले हिस्से कि प्लेटो ने समुद्र में सफर किया । फिर मौजूदा रूप पा लिया ।

बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान निकोबार दीप समूहों में 500 से ज्यादा दीप है । माना जाता है कि जब भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकराई तब इनका निर्माण हुआ । इसी टक्कर के कारण भारत की उत्तरी सीमा के साथ-साथ हिमालय बना ।

इस टक्कर से दो प्लेटें मुड गई तथा एक दूसरे के नीचे घुस गई । इससे पानी के नीचे एक ब्रिज बना । इसको और भी ज्यादा बढ़ा दिया पिघले हुए मेग्मा ने । अंडमान निकोबार दीप समूह इस ब्रिज के सबसे ऊपर वाले हिस्से हैं । इसके पानी से ऊपर उठा हुआ भाग द्वीप बन गया ।

द्वीप क्या होते हैं ?

द्वीपों को महादीपीय या समुद्रीय कहा जा सकता है । समुद्री दीप महासागर की घाटी से अक्सर ज्वालामुखी विस्फोटों के कारण तल से सतह है की तरह उठ जाते हैं ।

जबकि महाद्वीपीय दीप महाद्वीपीय जल सीमा के पानी में डूबे हुए हिस्से होते हैं । जो कि चारों ओर से पानी से गिरे हुए होते हैं ।

लेकिन भारत में तीसरा एक अनोखे किशन का द्वीप है महाद्वीपीय तथा महासागरीय द्वीप हवा की प्रक्रिया से बनते हैं ।इसके विपरीत कोरल द्वीप कोरल या प्रवाल केहे जाने वाले जीव से बनते हैं ।

यह जीव कैलशियम कार्बोनेट संरचनाएं बनाते हैं । जब यह संरचनाएं एक के ऊपर एक जमा होती जाती है तो उनसे कोरल द्वीप बन जाते हैं । यह दीप भारत में मौजूद लक्ष्य दीपों के जैसे ही होते हैं ।

लक्ष्यदीप केरल के तट से पश्चिम में 200 से 400 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है । संस्कृत में इस शब्द का मतलब होता है एक लाख द्वीप ।जबकि सच्चाई यह है कि यह 25 से 35 दीप से मिलकर बना हुआ है।

इनमें से 10 पर इंसानी बनावट है । जिसमें राजधानी का कवरती भी शामिल है । जबकि बाकी पर कोई नहीं बसा हुआ है । यह सबसे बड़ा द्वीप है जिसका क्षेत्रफल 4.84 12 किलोमीटर है । जबकि पितरा सबसे छोटा है । इसका क्षेत्रफल 0.1 वर्ग किलोमीटर है । कुल मिलाकर लक्ष्यदीप का जमीनी क्षेत्रफल 32 किलोमीटर का है ।

लक्षदीप का इतिहास केई ईसदी पुराना है और यह 1500 ईसा पूर्व तक फैला हुआ है । जब इसके एक और पश्चिम एशिया तथा अफ़्रीका तथा दूसरी ओर दक्षिण एशिया तथा सुदूर पूर्व के हिस्से थे । यहां से एक व्यस्त समुद्री मार्ग गुजरता था ।

बाद में गुजरात , केरल , तमिलनाडु से लोग यहां आकर के बस गये । आज करीब 65000 लोग लक्ष्यदीप रहते हैं । भौगोलिक नजरिए से लक्ष्यदीप एक कमाल की जगह है । इसकी उत्पत्ति लगभग छ करोड़ 60 लाख पूर्वे हुए ज्वालामुखी विस्फोटों से हुई है और यह जगह रियूनियन हॉटस्पॉट कहलाती है जो कि भारत की बजाय ईस्ट अफ्रीका के ज्यादा करीब है ।

6 करोड 60 साल पूरे यहां पर एक सक्रिय ज्वालामुखी हुआ करता था । फिर इसमें एक जबरदस्त विस्फोट हुआ और जिसकी वजह से यह भी बन गया । एक महान विस्फोट में निकले लावा ने मेग्मा की एक परत बना दी । तथा इन दोनों के बीच में एक दरार बन गई । जिससे कि भारत और अफ्रीका अलग अलग हो गए ।

भारतीय प्लेट उत्तर की तरफ की खिसकती गई और यह हॉटस्पॉट को प्लेट से वो टकराता गया । जिससे कई ज्वालामुखीय दीप बन गए । इन ज्वालामुखी विस्फोटों से कई अन्य दीप समूह का विकास हुआ । और आज लक्ष्यदीप इसका एक हिस्सा है।

जब यह दीप समुद्र की सतह से बाहर आया तब इसने कोरल को पनपने के लिए एक सख्त सतेह प्रदान की ।

मूंगे की चट्टान से बना अनोखा दीप लक्ष्यदीप एक अद्भुत जगह

कोरल क्या है ? कोरल कैसे बनता है ?

अब हम जानेंगे कि कोरल पौधे हैं या जानवर । यह दिखने में तो पौधे के जैसे नजर आते हैं । जिनकी जड़ें समुद्र के तल से जुड़ी हुई होती है और शाखाएं पेड़ के जैसी लगती है । लेकिन यह अपनी कुराक खुद पैदा नहीं करते हैं । इसलिए इन्हें पौधे नहीं कहा जा सकता है

कोरल से कोरल द्वीप बनते हैं और कोरल को बनाते हैं polyps कहलाने वाले छोटे छोटे जीव । यह हाइड्रा के जैसा ही एक प्रकार का जीव है । polyps की स्पर्शक जैसी दो छोटी बांह होती है । जिसका उपयोग वह समुद्र से खुराक को अपने पेट के अंदर पहुंचाने का काम करता है ।

नम शरीर वाला हर polyps कैल्शियम कार्बोनेट से बने एक सख्त बाहरी ढांचे को बनाता है । जो कि कोरल या किसी दूसरे निर्जीव जीव के ऊपर या फिर किसी चट्टान पर जमा होता जाता है । समय के साथ-साथ यह अपनी संरचना को बड़ा बनाते हैं बल्कि यह कोरल दीप बनाने के लिए बढ़ते तथा फेलते भी जाते हैं ।

यह प्रक्रिया बहुत धीमी होती है । कैल्शियम को बनाने तथा कोरल दीप को बनाने वाला कार्य बहुत धीमी गति से होता है । यह 1 साल में 1 या 2 सेंटीमीटर ही बढ़ सकते हैं । उनकी कुछ कॉलोनी इस रफ्तार पर बढ़ती है । जबकि कुछ शाखा वाले कोरल ऐसे भी होते हैं जो कि 1 साल में 10 सेंटीमीटर तक भी बढ़ सकते हैं ।

अधिकतर कोरल साफ पानी में होता है । कोरल को साफ पानी पसंद होता है । कोरल के लिए सबसे अच्छा तापमान 24 से 28 डिग्री सेंटीग्रेड तक का होता है और यदि तापमान में इस सीमा से ज्यादा बढ़ोतरी होती है तो इससे कोरल की बस्तियां प्रभावित होने लगती है ।

कोरल छूने पर कठोर लगते हैं । यह कैल्शियम कार्बोनेट के कारण ही हो पाता है । इसे यह खुद बनाते हैं । यह कोरल polyps कहलाने वाले छोटे जीवों की एक कॉलोनी है । यह polyps पनप कर या विखंडित होकर , अलैंगिक तरीके से रीप्रोड्यूस कर सकते हैं ।उसके बाद में यह ऐसी पूरी की पूरी कॉलोनी ही बना लेते हैं ।

लक्ष्यदीप सजीव कोरल द्वीप से गिरा है जो कि रोजाना चूना पत्थर की नई संरचनाएं बनाते रहते हैं । इस चूना पत्थर की वजह से ही दीप बनते हैं ‌ polyps के दम तोड़ देने के काफी बाद ।

जब निर्जीव चूना पत्थर मलबे कि तरह उथले पानी में इकट्ठा होता जाता है तो यह दीपों की तरफ पहुंचता जाता है तथा यह भूमि का एक हिस्सा बन जाता है । कैल्शियम कार्बोनेट की संरचना को हजारों लाखों कोरल ने विकसित किया होता है ।

लक्ष्य दीप समूह की शुरूआत 6 करोड़ 60 लाख साल पहले ही नहीं हुई थी बल्कि यह आज भी बढ़ रहा है । इसे बढ़ा रहे है इसके आसपास मौजूद कोरल द्वीप ।

लक्ष्यद्वीप पर ना ही नदियां तथा ना ही झरने हैं । यहां पर नारियल के पेड़ बहुतायात में होते हैं । यह द्वीप समुद्र की शक्ति से कुछ मीटर ही ऊपर है ।