कबूतर के बारे में रोचक तथ्य

कबूतर के बारे में रोचक तथ्य

आज हम कबूतर के रोचक तथ्यों के बारे में बात करेंगे और इस टॉपिक में हम बात करेंगे कि कबूतर जब उठते हैं तब इतना शोर क्यों करते हैं हम यह भी कह सकते हैं कि कबूतर के पंखों से इतना शोर क्यों होता है इसके पीछे क्या कारण है इन सब प्रश्नों के उत्तर हम आज पता लगाएंगे |


उड़ते हुए सारे जानवर शोर तो करते ही हैं | कबूतर इतना ज्यादा शोर क्यों करता है और शोर किन के कारण होता है |


वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च की जिसमें उन्होंने पाया कि कबूतर जब उड़ते हैं और फड़फड़ा ते हैं | उसी समय सबसे ज्यादा शोर होता है | यानी कि जब कबूतर उड़ान भरते हैं | उसी समय सबसे ज्यादा शोर होता है | उड़ान भरने के बाद कबूतर के पंखों से शोर नहीं होता है |

दुनिया भर में 4 अरब से भी ज्यादा कबूतर पाए जाते हैं |

40 लाख कबूतर सिर्फ अकेले न्यूयॉर्क सिटी में पाए जाते हैं | यानी कि न्यूयॉर्क सिटी में रहने वाले हर निवासी के हिस्से में दो कबूतर आता है |

इतने कबूतर होने के कारण जब वे उड़ते हैं | तब इतना शोर मचाते हैं कि new york सिटी के बाकी का शोर शराबा उनके शोर-शराबे के आगे कुछ भी नहीं होता है |

पक्षी जितना छोटा होता है | उसे उड़ने के लिए उतने ही कम पंख फड़फड़ाने की जरूरत पड़ती है | जबकि पक्षी जितना बड़ा होता है उसे उड़ने के लिए उतने ही ज्यादा पंख फड़फड़ाना पड़ते हैं |


जब कबूतर उड़ान भरता है | तब कबूतर के दोनों पंख आपस में टकराते हैं | जिसकी वजह से शोर उत्पन्न होता है |और यह भी पाया गया कि जब उड़ान भरता है | तभी सबसे ज्यादा शोर होता है |

पंखों की फड़फड़ाट से कबूतर अपने साथी को एक चेतावनी भी देते हैं | पंख जितना तेजी से फड़फड़ाएंगे खतरा उतना ही समीप होगा तथा खतरनाक होगा |

कबूतर जब उड़ते हैं तो एक विशेष प्रकार की आवाज निकलती है जो कि बहुत ही मीठी होती है | यह आवाज कबूतर अपने मुंह से नहीं निकालता | जबकि यह आवाज उनके पंखों से निकलती है | क्योंकि दोनों पंखों के मुकाबले उनका एक पंख बहुत ही पतला होता है | पंखों के अंतिम छोर पर एक पतला किनारा होता है | जब यह वाइब्रेट करते हैं तब पंखों से सीटी की आवाज निकलती है |

उल्लू की आवाज की तुलना में कबूतर के पंख इतना शोर क्यों करते हैं |

जैसे ही हवा कबूतर के बाहरी किनारों से टकराती है तो वह सर्कल मनाते हुए बाहर निकल जाती है | यही आवाज पैदा करती है | क्योंकि कबूतर की पंखों पर यह छोटे-छोटे सॉफ्ट मुलायम बाल नहीं होते हैं और यह मुलायम बाल हवा को भी नहीं रोक पाते हैं | जिससे वाइब्रेशन होता है | वाइब्रेशन के फलस्वरूप ही इतनी तेज आवाज कबूतर के पंखों से निकलती है |

जबकि उल्लू के पंखों के ऊपर छोटे-छोटे सॉफ्ट मुलायम बाल होते हैं जो कि हवा के बहाव को कम कर देते हैं और उसके मुलायम पंख हवा की वाइब्रेशन को भी कम कर लेते हैं | हवा उल्लू के पंखों के बीच से होकर गुजर जाती है | जिससे कि आवाज कम होती है | जिसके कारण उल्लू की उड़ान हवा में कोई भी शोर पैदा नहीं करती है |


कबूतर के पंखों के बाहरी किनारे बहुत ही सख्त होते हैं | जबकि उल्लू के पंखों के बाहरी किनारे मुलायम होते हैं | जिनसे कि उनकी आवाज दब जाती है | जबकि कबूतर के बाहरी किनारे बहुत ही सख्त होने के कारण वाइब्रेशन होता है और आवाज ज्यादा होती है |

उल्लू 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है |

कबूतर आवाज करने वाले इन पंखों के होने की बदौलत भी 1100 किलोमीटर की दूरी तय कर लेते हैं |