प्रमोटर की सैलरी कितनी होती है। प्रेमोटर का क्या काम हो सकते हैं

किसी कंपनी में प्रमोटर का मुख्य रोल होता है।

किसी भी कंपनी के लिए पर मोटर की भागीदारी सबसे अहम होती है। एक तरह से देखा जाए तो कंपनी की सेल में इनक्रीस करना। कंपनी के प्रति लोगों में सकारात्मक भावनाओं का पैदा करना। फॉर मोटर की अहम भूमिका हो सकती है।

यदि एक परमोटर किसी भी कंपनी के लिए सकारात्मक तथा सही तरीके से काम करें तो उस कंपनी को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है। क्योंकि प्रमोटर लोगों के बीच में कन्वेंस करने का काम करता है तथा लोगों को कंपनी के साथ जोड़ने का काम भी करता है।

वह लोगों को कंपनी की तरफ आकर्षित करता है। बता कंपनी के प्रोडक्ट को प्रचलित करने की गुजारिश भी करता है। इससे कंपनी की सेल में बढ़ोतरी होती है तथा कंपनी को मुनाफा होता है।

एक प्रेमोटर का क्या काम हो सकते हैं |

  • एक पर मोटर का काम होता है वह कंपनी के प्रति लोगों में सकारात्मक भावनाएं पैदा करें।
  • कंपनी के प्रोडक्ट को बेचकर उसकी सेल सेल उसकी सेल को बढ़ाएं।
  • लोगों से बातचीत करके कंपनी का प्रचार करें।
  • उस कंपनी के प्रोडक्ट के बारे में तथा कंपनी के बारे में लोगों को समझाए।

प्रमोटर की सैलरी कितनी होती है।

सामान्य तौर पर आप किसी भी कंपनी में काम कर लो। किसी भी पर मोटर की सैलरी 10000 से 12000 की होती है। इससे ज्यादा सैलरी पर मोटर में आपको बहुत ही कम कंपनियों में मिलती है।

यदि कोई कंपनी इससे ज्यादा सैलरी देती है तो वह लास्ट 15000 तक की सैलरी ही दे पाएगी। इससे ज्यादा सैलरी कोई भी कंपनी किसी भी पर मोटर को नहीं देती है। हां यह एक अलग बात है कि कंपनी अपना एक इंसेंटिव प्रोग्राम भी रखती है।

उसके अंतर्गत वह अच्छी मेहनत करके अच्छा पैसा कमा सकता है। क्योंकि कंपनी का इंसेंटिव बहुत ही अच्छा आता है और पर मोटर को काफी अच्छा बेनिफिट हो जाता है। इससे उसकी सैलरी में भी काफी इंक्रीजमेंट हो जाता है।

प्रमोटर कितने घंटे काम करता है।

सामान्य तौर पर प्रत्येक कंपनी में एक प्रमोटर की ड्यूटी 8 से 9 घंटे तक घंटे तक ड्यूटी 8 से 9 घंटे तक की होती है। और कुछ कंपनियों में 9 से 10 घंटे तक की ड्यूटी भी हो जाती है। यह हर कंपनी का अलग-अलग अपना अपना अपना रूल्स होता है।

इस रूल्स के हिसाब से कंपनी पर मोटर को रखती है. तथा उसी के हिसाब से उसको सैलरी भी दे देती है। सब कंपनियों में यह रूल्स अलग-अलग होते हैं। हर कंपनियों में एक जैसे रूल्स नहीं होते हैं।

प्रमोटर अलग अलग तरीके के होते हैं। यह कंपनी पर डिपेंड करता है कि कंपनी जब आपको जॉब के लिए हायर करती है। तब किस काम के लिए हायर करती है। कुछ कंपनियां मार्केटिंग के लिए प्रमोट करती है जो कि मार्केट में काम करती है वह बड़े-बड़े दुकानों पर मॉल के अंदर जाकर अपना एडवर्टाइजमेंट पर मोटर के माध्यम से करवाती है

यह सब कंपनी पर डिपेंड करता है कि वह किस तरह के प्रमोटर चाहती है। जो प्रमोटर शॉप पर या फिर दुकान पर रहकर एडवर्टाइजमेंट करते हैं। वह पर मोटर अलग होते हैं। और जो मार्केट में रहकर ब्रांड का प्रचार करते हैं। वह प्रमोटर अलग होते हैं। पर दोनों होते पर मोटर ही है. पर दोनों की केटेगरी अलग हो जाती है।

प्रमोटर की जॉब कहां से मिलेगी।


मार्केट में ऐसी बहुत सारी कंपनियां हैं जो पर मोटर की जॉब के लिए प्रमोटर हायर करती है। पर बात यह है कि इन सब के बारे में पता नहीं होता है। जैसे कि वोडाफोन, एयरटेल, आइडिया, जिओ जैसी कंपनियां मार्केटिंग परपज के लिए पर प्रमोटर को रखती है।

कुछ बड़ी कंपनियां जैसे कि कि हिंदुस्तान युनिलीवर, पीएनजी, हिमालय जैसी कंपनियां जनरल ट्रेड के लिए प्रमोटर हायर करती है। जो कि जनरल ट्रेड के बड़े मॉल या फिर दुकानों पर रहकर कंपनी का प्रचार तथा सेल दोनों करते हैं |

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