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अगर द्रोपती ने पांच पांडवों से शादी नहीं की होती तो क्या होता जानिए इसके बारे में?

कुंती के बोल से 5 पांडवों की पत्नी बनी द्रौपदी क्या द्रोपती करण से प्यार करती थी

द्रोपती की वह 4 गलतियां जिसके कारण महाभारत का युद्ध हुआ। क्या होता अगर द्रोपती ने पांचों पांडवों की पत्नी बनना स्वीकार नहीं किया होता? क्या द्रोपती करण से प्यार करती थी जानिए इसके बारे में?

दोस्तों आज के युग में द्रोपती को कौन नहीं जानता है। जिस के पांच पति थे। द्रोपती ने महाभारत युद्ध में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।


द्रोपती क्या थी। उसका चरित्र कैसा था तथा उसका जीवन कैसा था। यह समझना बहुत ही मुश्किल है। केवल कृष्ण ही उसे याद कर सकते थे । द्रोपती कृष्ण की परम मित्र थी और एक दोस्त ही दोस्त को समझ सकता है।

द्रोपती की वह 4 गलतियां जिसके कारण महाभारत का युद्ध हुआ।

द्रोपती के जीवन की पहली गलती क्या थी?

द्रोपती के जीवन की सबसे पहली गलती यह थी कि उसने कुंती पुत्र कर्ण को कुत्तिया के बेटे की उपमा देकर उसका अपमान किया था।

यह इसलिए हुआ क्योंकि कुंती ने अविवाहित ही पुत्र के रूप में कर्ण को जन्म दे दिया था। जिसके कारण लोग निंदा से बचने के लिए कुंती ने पुत्र को बहती हुई नदी मैं बहा दिया था। जो बड़ा होकर सूर्य के समान तेज महाबली करण के कहलाया।

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द्रोपती के जीवन की दूसरी गलती कौन सी थी?

द्रोपती ने अपने जीवन में दूसरी गलती यह कि कि उसने इंद्रप्रस्थ मैं दुर्योधन का भरी सभा में अपमान कर दिया और उसे “अंधों का बेटा” भीअंधा होता है। कह कर अपमानित किया था। जिसके कारण महाभारत का युद्ध हुआ।

द्रोपती के जीवन की तीसरी सबसे बड़ी गलती कौन सी थी?

द्रोपती ने अपने जीवन में तीसरी गलती जयद्रथ से पंगा लेकर की थी। उसने भरी सभा में जयद्रथ के सिर के बालों को पकड़कर घुमा दिया।

जिसके बाद में जयद्रथ हमेशा के लिए उसका दुश्मन बन गया। यह द्रोपती की सबसे बड़ी गलती रही जिसके कारण महाभारत का युद्ध हुआ और बाद में जयद्रथ पांडू की बजाय कौरवों की सेना में शामिल हो गया।

द्रोपती ने अपने जीवन में चौथी गलती कौन सी वे किस रूप में की थी?

द्रोपती ने चौथी गलती पांडवों को पांचवे चीर लेने के बाद युद्ध के लिए भड़का कर की थी यह उसके जीवन की सबसे बड़ी गलती थी। और इन्हीं गलतियों के कारण महाभारत का युद्ध हुआ था।

इन गलतियों में से तीसरी और चौथी को गलतियों के रूप में नहीं माना जा सकता है क्योंकि यह परिस्थितियों का ही एक कृत्य था।

द्रोपती ने करण तथा दुर्योधन का अपमान किया था। जिसके बाद जयद्रथ और दुर्योधन ने द्रौपदी का अपमान करके अपना बदला ले लिया था।

परंतु द्रोपती के जीवन की सबसे बड़ी गलति की बात की जाए तो यह थी कि वे पांचों पांडवों से शादी करने के लिए तैयार हो गई थी। जबकी स्वयंवर की प्रतियोगिता अर्जुन ने जीती था।

क्या होता अगर द्रोपती ने पांचों पांडवों की पत्नी बनना स्वीकार नहीं किया होता?

किन परिस्थितियों के कारण द्रोपती ने पांचों पांडवों की पत्नी बनना स्वीकार किया।
क्या कुंती के कहने पर या युधिस्टर, या फिर वेदव्यास के कहने पर पत्नी बनने के लिए सहमत हुई।यह तो हम नहीं बता सकते।

परंतु द्रोपती पांडु की पत्नी नहीं होती तो वह या तो अकेले अर्जुन की पत्नी होती या फिर कुंती पुत्र कर्ण की पत्नी हो सकती थी।

क्या द्रोपती करण से प्यार करती थी जानिए इसके बारे में?


एक कहानी के अनुसार द्रोपती ने पांचो पांडव और श्री कृष्ण के सामने यह स्वीकार किया कि वह उन पांच पांडवों से तो प्यार करती है। लेकिन दूसरे छठे व्यक्ति से भी प्यार करती है जो कि कर्ण था।

द्रोपती ने बताया कि मुझे जाती के कारण कर्ण से शादी नहीं करने का अफसोस है। वे बताती है कि अगर मैंने कर्ण से विवाह किया होता तो मुझे इतना नुकसान नहीं होता और मुझे कठिन परिस्थितियों से नहीं गुजरना पड़ता।

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