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सेकंड हैंड गाड़ी खरीदते समय आपको कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना

कार खरीदने से पहले आपको कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

आइए दोस्तों आज हम आपको बताते हैं। कि सेकंड हैंड गाड़ी खरीदते समय आपको कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए और आपको सेकंड हैंड गाड़ी खरीदते समय किन किन चीजों को अच्छे से चेक कर लेना चाहिए।

दोस्तों गाड़ी की बात करें तो गाड़ियां आजकल सब को बहुत ही पसंद है। सब यह सोचते हैं। कि वह गाड़ी में घूमे फिरे और अपने परिवार को भी घूम आए। कई सारे लोग ऐसे हैं।

वह सोचते हैं कि वह नयी गाड़ी नहीं तो सेकंड हैंड गाड़ी ही खरीद ले।जो गाड़ी चलाना नहीं जानते इसीलिए वह सेकंड हैंड कार खरीदने में विश्वास रखते हैं।

और यह उनके लिए फायदेमंद है। कम खर्च में गाड़ी का शौक पूरा करने के लिए सबसे बढ़िया विकल्प है। अगर आप भी सेकंड हैंड कार खरीदने की योजना बना रहे हैं। तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जिससे को सही कार खरीदने में मदद मिलेगी।

कार खरीदने से पहले आपको कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

अपना बजट तय करें सबसे पहले तय करें कि आपको किस रेंज में गाड़ी खरीदनी है। इससे आपको सही गाड़ी का चुनाव करने में मदद मिलेगी साथ ही ध्यान रखिए की सेकंड हैंड गाड़ी पर आपको कुछ अन्य खर्च भी करना पड़ सकता हैं।

2 . अगर आपने एक बार अपना बजट चेक कर लिया हो तो अब आप इस बात पर ध्यान रखें किस तरह की गाड़ी आपके लिए बेस्ट है‌। एक्सपेक्ट, एसयूवी, जैसे तमाम विकल्प सेकंड हैंड गाड़ी के होते हैं। और यह मेन बाजार में मौजूद है।

3 . आपकी गाड़ी आपकी जरूरत और बजट के हिसाब से ही होनी चाहिए साथ ही उसके लिए आसपास पार्किंग की जगह भी ढूंढ ले

4 . सोच समझकर डीलर तय करें लोग हमेशा इस दुविधा में रहते हैं। कि गाड़ी किसी कंपनी के सेकंड हैंड कार के अधिकृत शोरूम से ली जाए या किसी लोकल ब्रोकर कर या किसी करीबी परिचित से किसी एक व्यक्ति से गाड़ी खरीद रहे हैं। तो उसे बेचने का कारण जरूर पूछें।

5 . अधिकृत विक्रेता से गाड़ी खरीदना फायदेमंद कई बार लोग कम कीमत के चलते अपने परिचित या लोकल ब्रोकर से गाड़ी खरीद लेते हैं। हालांकि कुछ ही दिनों में वह खर्च मांगने लगती है।

6 . इसलिए पहले अधिकृत विक्रेता के शोरूम में जाकर उस गाड़ी की कीमत और फायदा का पता लगाइए कई बार महंगी चीज भी फायदे दे जाती है।

7 . गाड़ी की जांच जरूरी है। गाड़ी खरीदने से पहले उसका निरीक्षण करना बहुत ही जरूरी है। कई ब्रोकर यह नहीं करने देते इस स्थिति में आप उन्हें साफ इंकार कर सकते हैं।

गाड़ी के मुख्य चीजों को ध्यान और समझदारी से देखें।

  1. रंग
  2. टायर
  3. बैटरी
  4. डेंट स्क्रैच
  5. सीट
  6. किलोमीटर
    आदि चीजों का खास ख्याल रखें।

1 . टेस्ट ड्राइवर जरूर ले गाड़ी नयी हो या पुरानी इससे आपको गाड़ी की स्थिति क्या है। यह पता चल जाएगा। आप यह भी जान पाते हैं। कि आप कितना सुविधाजनक महसूस करते हैं। यदि आप गाड़ी चलाना सीख रहे हैं।

2 . तो किसी मित्र को साथ लेकर जाए टेस्ट ड्राइव कम से कम 4 से 5 किलोमीटर की करें। स्टो मीटर, ऑटो मीटर, इसके अलावा क्लच ब्रेक की स्थिति भी देखें और समझे स्टो मीटर ऑटो मीटर वह अन्य मीटर की स्थिति उसी टाइम साफ होगी यदि गाड़ी की स्टेरिंग में कंपन है तो इंजन में गड़बड़ी हो सकती है।

3 . डॉक्यूमेंट की जांच कर ले यदि आपको कोई गाड़ी कम कीमत पर बेच रहा हो। तो संभव है। कि उसमें कुछ खराबी भी हो सकती है। गाड़ी चोरी की हो सकती है।

4 . इसलिए कागजी कार्रवाई पूरी रखें,rc की कॉपी नहीं ओरिजिनल की ही मांग करें बिना कागजात की गाड़ी आपको मुश्किल में डाल सकती है। इन कागजात में पूरा ध्यान रखें

5 . मालिकाना हक में बदलाव गाड़ी की बिक्री के साथ ही उसका मालिकाना हक भी बदल जाता है। पहले मालिक को आरटीओ की गाड़ी की बिक्री की जानकारी देना जरूरी है।

6 . 14 दिनों के बिक्री उसकी तारीख और नए मालिक की लिखित जानकारी देना अनिवार्य है। और यह भी चेक कर ले इसमें गाड़ी का नंबर चेसिस नंबर इंजन नंबर भी होता है।

7 . यदि गाड़ी का एक्सीडेंट होता है। तो उसे दूसरे चेसिस नंबर दिया जाता है। इसीलिए आरसी और गाड़ी दोनों में इनका मिलान करें। इनवॉइस गाड़ी के बिल की ओरिजिनल कॉपी अपने पास रखें

8 . इसमें इंजन नंबर चेचिस नंबर डिलीवरी की तिथि की जानकारी होती है। साथ ही दूसरी सेल का एग्रीमेंट उसी आधार पर बनवाएं गाड़ी की नियमित पोलूशन जरूरी है।

9 . इसे हर 3 से 6 महीने के अंतराल में कराना चाहिए यह राज्य के हिसाब से अलग अलग हो सकता है। इसमें हालिया पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जरूर ले इंश्योरेंस गाड़ी का बीमा हर साल करवाना चाहिए । सेकंड हैंड कार खरीदते समय बीमा की स्थिति जरूर चेक करें ।

10 . साथ ही देखें कि बीमा खत्म होने में कितना समय बाकी है। गाड़ी के सभी उपकरण और बटन चला कर देखें, ac हीटर के, अलावा म्यूजिक सिस्टम ,ऑफ केबल और सिगरेट लाइट भी टेस्ट करें । बैटरी कि स्थिति भी जाने । गाड़ी के कुलेड और पानी के स्तर का भी निरीक्षण करें।

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