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मेथी के गुणों के बारे में अद्भुत तथा रोचक तथ्य सेक्स समस्याओं का इलाज करे मेथी

मेथी के गुणों के बारे में अद्भुत तथा रोचक तथ्य मेथी के फायदे बालों के लिए

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मेथी के दाने बहुत ही गुणकारी तथा फायदेमंद होते हैं । दिखने में तो यह दाने बहुत छोटे होते हैं । लेकिन यह बहुत ही उपयोगी तथा कारगर माने जाते हैं । यह अपनी महत्ता स्वाद के कारण पूरे व्यंजन के स्वाद को बदलने की क्षमता रखते हैं ।मेथी के छोटे-छोटे दानों में छिपे हैं अद्भुत सेहत लाभ

मेथी का स्वाद कैसा होता है स्वाद में मेथी कैसी होती है ।

नमकीन , मीठे , तीखे , कड़वाहट के बीच में एक कड़वा स्वाद भी आता है मेथी का । यह कहानी है मेथी के कड़वे दानों कि । दवा के रूप में काम आने वाले सबसे पुराने मसालों में शामिल है मेथी ।

मेथी के बीज स्वाद में कड़वे होते हैं । यह भी रहस्य से भरे होते हैं तथा इनमें एक सच्चाई भरी होती है । मेथी के अंदर शहत स्वाद के राज छुपे हुए हैं ।

मेथी को सर्वश्रेष्ठ मसाला माना जाता है और इसे आप मसालों का राजा भी कह सकते हो । क्योंकि मेथी के बहुत सारे फायदे हैं ।

3.30 हजार वर्ष पहले प्राचीन मिस्र में एग्जीबिशन चिकित्सक रोम में इन पौधों को मसाले के रूप में इस्तेमाल करते थे । मिस्र वासियों के दवा की पेटी में एल्बा के बीच जरूर होते थे ।

हिलबा यानी कि मेथी के बीज । मिस्र वासियों की भाषा में यह मेथी का नाम है । यह आम तथा आसानी से मिलने वाली तथा स्वास्थ्य के गुणों की खान होती है ।

मेथी का लिखित प्रयोग ईसा से 15 हजार वर्ष पूर्व पाया गया है । इलाज के लिए तो मेथी का प्रयोग किया जाता ही था । इसके अलावा शव के सरंक्षण के लिए भी मेथी का प्रयोग का प्रयोग किया जाता था ।

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यह मसाला सड़न को रोकता था तथा मम्मीपिकेशन को बनाए रखता था । यानी कि यह यह मसाला मम्मी को सड़न से बचाता से बचाता था ।

प्राचीन मिस्र के महान राजा तूतनखामेन की कबर में भी मेथी के दाने मिले थे । एक खोज के अनुसार तो tanaka-kun की कबर में मेथी के दाने वैज्ञानिकों ने खोजे हैं । यानी कि एक ऐसा मसाला जिसकी चाहत अगले जन्म में भी थी ।

मेथी को अंग्रेजी में फेनुग्रीक कहते हैं तथा लतीफी भाषा में ट्रिगोनीला फिनम ग्राम। मेथी का पौधा चारे की तरह काम आता है । यह एक मजबूत तथा वार्षिक पौधा होता है ।

मटर के फैबीसी परिवार का सदस्य है मेथी का पौधा । एक ऐसा परिवार जो कि अपने फलों के लिए प्रसिद्ध माना जाता है । माना जाता है कि मेथी की उत्पत्ति केइ वर्ष पूर्व मेडिटेरियन क्षेत्र में हुई । भारत अफ्रीका तथा चीन में मेथी उगति आई है । आज के समय में सबसे अधिक मेथी दुनिया भर में भारत में उगाई जाती है ।

मेथी की पैदावार में राजस्थान का हिस्सा सबसे बड़ा तथा नंबर वन पर आता है । यहीं से शुरू होती है मेथी की खोज यात्रा । अरावली पर्वत माला से घिरा से गिरा हुआ है । अजमेर जो कि राज्य के बिल्कुल बीचो बीच में मौजूद है । मेथी की खेती होती है यहां पर ।

यहां पर मेथी की खूब पैदावार होती है । यहां पर उनकी कच्ची कलियों को तथा पत्तियों को साग सब्जी के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है । यह पौधा यहां की मिट्टी के अनुरूप ढल गया है ।

मेथी की फसल नवंबर महीने की शुरुआत में लगाई जाती है । मार्च के महीने में यह फसल तैयार हो जाती है । बीज से बीज बजने तक की शुरुआत हो जाती है । यह राजस्थान के हर घर में एक तरह से मुख्य दवा का काम करती है ।

अन्य वर्ग में भी यह औषधि के रूप में इस्तेमाल की जाती है । इसे आहार तथा औषधि के रूप में मनुष्य ने अपने जीवन में अपना लिया है । राजस्थान में मेथी का प्रयोग कब होता है । मेथी से सब्जी तथा कडी बनाई जाती बनाई जाती है ।

मेथी के दाने कंकड़ की तरह कठोर मजबूत होते हैं । इसके साथ ही यह कड़वी तो होती ही हैं । पर यह औषधि के रूप में सदियों से इंसानों के काम आते रहे हैं ।

देश के कुछ हिस्सों में मेथी की कड़ी बनाई जाती है जो कि पेट की पाचन क्रिया के लिए बहुत ही अच्छी मानी जाती है यह पेट की पाचन क्रिया को ठीक कर देती है । इसके बाद में अपचन की समस्या ही खत्म हो जाती है ।

हमारे पूर्वज भी किसी वैज्ञानिक से कम नहीं थे । वह हमेशा नई नई खोज करते रहते थे और ऐसे मसालों को ढूंढते थे जो कि मनुष्य के स्वाद तथा स्वास्थ्य को बनाए रखने का काम करते हैं ।

हमारे पूर्वजों ने इन कड़वे दानों को खाने के लिए क्यों चुना बीजों में में उन्हें क्या दिखा । कब बन गई मेथी एक औषधि

मेथी का इतिहास प्राचीन तथा गौरवशाली है । चिकित्सा के जनक महान चिकित्सक जनक हिप्पोक्रेट्स ने कहा था कि अपने आहार को अपनी दवा बनने दो । अपनी दवा को आहार बनने दो बनने दो ।

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उन्होंने मेथी को एक संतुलन देने वाला मसाला बताया । उनके मुताबिक मेथी महिलाओं की हर समस्या का समाधान थी । मेथी का प्रयोग जलने तथा कटने में भी होता था ।

रोमन आर्मी भी मेथी का प्रयोग करती थी । जब वह लड़ाई लड़ करके आते थे तब वह थके हुए होते थे । उस समय वह मेथी खाने से उन्हें थकान से मुक्ति मिल जाती थी । रोम वासी मेथी दानों के साथ अपने में नई ऊर्जा का संचार करते थे ।

इसके साथ ही मेथी को महिला के अलग-अलग पड़ाव पर उनके जीवन का एक साथी ही समझा जाता था । पूरे एशिया में बच्चे को दूध पिलाती मां के खाने में मेथी का प्रयोग की परंपरा रही है । मेथी महिलाओं में दूध की मात्रा को बढ़ाती है । ऐसा सभी का मानना है ।

लेकिन क्या यह एक मान्यता है या फिर इस कथा में कोई सच्चाई भी है । मेथी दूध की मात्रा को बढ़ाती है । स्तनपान के समय में मेथी को आहार के में इस्तेमाल करना चाहिए ।

इसमें एक प्राकृतिक रसायन फैक्टरी होती है । दिखने में तो यह एक बहुत छोटा सा पौधा होता है । लेकिन यह बहुत ही काम का होता है । जटिल अणु को बना करके अपनी रक्षा करने में सक्षम होता है मेथी का पौधा ।

अपने शत्रु से बचने के लिए इसका विकास हुआ है । मानव ने पौधों का प्रयोग बहुत पहले से ही आहार तथा खेती के रूप में प्रयोग करना सीखा है । अनगिनत प्रयोगों से ज्ञान को इकट्ठा किया है । आज के समय में हम विज्ञान के तरीके से अणु के भीतर के राज को जान सकते हैं ।

वैज्ञानिकों ने मेथी के दानों की जांच की और उन्हें हैरान कर देने वाले नतीजे सामने आए । मेथी में मिलने वाला हार्मोन स्टेरॉयड की संरचना स्त्रि अंदर मौजूद एस्ट्रोजन के समान पाई गई । एस्ट्रोजन हार्मोन स्त्रि के प्रजनन तथा उसके विकास में सहायक होता है । मेथी के अंदर स्टेरॉयड की संरचना संरचना पाई गई जो कि इन दोनों की संरचनाएं सम्मान है ।

परमाणु मिलकर के अणु बनाते हैं । अलग-अलग तरह के के अणु हाइड्रोजन , ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन का अनूठा मिश्रण होता है । यह एक ऐसा अमीनो एसिड होता है जो कि लीवर को प्रभावित करता है । शरीर का सबसे बड़ा अंग जो की बनाता है 1000 से भी ज्यादा अंग । हर एंजाइम की भूमिका विशिष्ट होती है ।

मेथी में बहुत ज्यादा फाइबर की मात्रा होती है । इसमें घुलनशील तथा एक एक घुलनशील दोनों ही तरह के फाइबर मौजूद होते हैं । ज्यादातर खाने वाली चीजों में दोनों तरह के रेशे नहीं मिलते हैं । जबकि मेथी में दोनों तरह के फाइबर मौजूद होते हैं । मेथी में दोनों फाइबर बराबर संतुलन की मात्रा में होते हैं ।

मेथी के दानों में घुलनशील फाइबर गैलेक्टोमेन्नन मेथी में कड़वाहट बढ़ा देता है । इसी के कारण मेथी कड़वी होती है । यह अपने आप में सवाद में तथा कड़वाहट के लिए जिम्मेदार माना जाता है ।

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आंतों में पहुंचकर के यह उन्हें यह शांत कर देता है । यह खाने के चारों ओर एक महीन परत बनाकर के पाचन क्रिया को धीमा करता है । यह सेहत के लिए अच्छा माना जाता है ।

प्राचीन काल में चिकित्सकों को भले ही यह मालूम नहीं था कि मेथी दाने क्यों तथा किस प्रकार से काम करते हैं । पर मेथी दाने क्या करते हैं वह जान चुके थे ।

वैसे तो खाने में मेथी का स्वाद थोड़ा कड़वा होता है । भारतीय रसोई में मेथी का इस्तेमाल साधारण कड़ी के रूप में व्यंजन तथा दाल आदि में स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है ।

इसके साथ ही मेथी के पत्तों से बने परांठे की बात ही कुछ और है । यह मजेदार पराठे खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं । इस तरह से मेथी में बहुत सारे और गुणकारी राज छिपे हुए हैं ।

फारसी चिकित्सकों को भी मेथी के गुणों का अच्छा खासा ज्ञान था । डायबिटीज के इलाज में सबसे पहले मेथी का प्रयोग फारसी चिकित्सकों ने ही किया था । उस समय मेथी का प्रयोग पेशाब की प्रचुर मात्रा के इस्तेमाल के लिए किया जाता था । वह डायबिटीज का इलाज मेथी के बीजों के साथ अन्य बीजों को मिला करके करते थे ।

मधुमेह आज के युग का महारोग माना जाता है । टाइप टू डायबिटीज या मलेशियश डायबिटीज पूरे विषय में चिंता का विषय बना हुआ है । हमारा खाना हमें ऊर्जा देता है । इसके लिए भोजन का विघटन गुलकोज से होता है ।

गुलकोज रक्त में होता है और रक्त के साथ कोशिका तक जाता है । यही वह ऊर्जा होती है जो की कोशिकाओं के लिए जरूरी होती है । इसके कोशिकाओं में जाने के लिए इंसुलिन जरूरी होता है । इंसुलिन अग्नाशय से निर्मित एक हार्मोन होता है ।

टाइप टू डायबिटीज मरीज के शरीर में या तो पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन बनता नहीं है या शरीर उसका प्रयोग नहीं कर पाता है । जिसके फलस्वरूप रक्त में ग्लूकोज की मात्रा अधिक हो जाती है । जिसके फल स्वरुप कोशिकाओं में ऊर्जा की कमी हो जाती है । यह संतुलन जोखिम भरा होता है । जिसके परिणाम स्वरूप मोटापा , उच्च कोलेस्ट्रॉल होता है । इसके साथ ही हमारे सनायू तंत्र को भी काफी नुकसान पहुंचता है ।

मेथी के मसालदानी के कड़वे दाने इन रोगों के इलाज की एक आशा जगा रहे हैं । एक आशा जगा रहे हैं । दुनियाभर में हो रही खोज मैं मेथी सेहत का एक अच्छा खजाना मानी जा रही है ।

सेहत में मेथी का स्थान नंबर वन पर आता है । इसके पश्चात प्याज का नंबर आता है । नंबर 3 पर सरसों का आता है तथा नंबर पर हल्दी आती है । नंबर पांच पर कड़ी का नंबर आता है । नंबर 6 पर दालचीनी आता है ।

मेथी की कड़वाहट शक्कर का तोड़ भी माना जाता है । इसी कारण से मानव ने मेथी को मशालदानी मशाल में जगह दे दी थी । इसके प्रयोग अनेक रूपों रूपों में होता है इसका स्वाद और उसे अलग तो होता ही है । यह कैसी कड़वाहट जो कि इंसान को अच्छी लगती है ।

कड़वाहट भरा करेला जिसे पकाया जाता है सरसों के तेल तथा मेथी के साथ बंगाल के सभी घरों में इसका अपना महत्व तथा स्थान है ।

खाना बनाना एक कला होती है । लेकिन ऐसी खाने पीने पीने की चीजों से ऐसा खाना बनाएं जो कि कि इंद्रियों को जगाता हो तथा हमारे शरीर की रक्षा करें । स्वाद तथा सेहत के संगम में मेथी का स्थान ऊंचा होता है ।

मेथी अंदर से शरीर को साफ करने का काम करती है । स्वास्थ्य के लिए मेथी के कितने दानों को खाना चाहिए ।

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वैज्ञानिकों ने मेथी के दानों से एक ऐसा अणु तैयार किया है जो कि मोटापे पर नियंत्रण रखता है । ज्यादा मेथी खाने से लोगों का पेट फूल जाता है या फिर दस्त होने लगते हैं । जिसके फल स्वरूप इसका प्रयोग मुश्किल हो जाता है ।

ग्लूकोस तथा इंसुलिन कैसे काम करते हैं ।

गुलकोज को कोशिका के अंदर जाने के लिए इंसुलिन जरूरी होता है । इंसुलिन के बिना गुलकोज कोशिका के अंदर नहीं जा सकता है । इंसुलिन मानव कोशिका के बंद दरवाजे को खोलता है ताकि गुलकोज अंदर जा सके ।

जब गुलकोज कोशिका के अंदर जाता है तब कोशिका की दीवारें चमकने लगती है । मेथी का असर बहुआयामी होता है जो कि लीवर को सक्रिय करता है जो कि पहले से अधिक पित्त का निर्माण पहले से करें । पित्त वसा को तोड़ती है ।

जिससे कि खाना अधिक समय तक आंतों में रुकता है । जिससे कि ग्लूकोज की मात्रा अचानक से घटती तथा बढ़ती नहीं है । इन सब का मिलाजुला असर होता है ।

रक्त में कोलेस्ट्रॉल तथा ट्राइग्लिसराइड का असर कम हो जाता है । चर्बी जमा नहीं होती है । इसके साथ ही मेथी अग्नाशय को भी उत्तेजित करती है । जिससे कि वह पहले से ज्यादा इंसुलिन बनाता है ।

मेथी पाउडर को गेहूं के आटे में मिलाकर के रोटी बना सकते हो । यदि आप प्रतिदिन 25 ग्राम मेथी खाते हो तो आपको डायबिटीज में बहुत ज्यादा ही फायदा होगा । मेथी दानों को भुन करके दही के भी लिया जा सकता है ।

प्राचीन काल में मेथी के बीजों का प्रयोग रसोई तक ही सीमित नहीं था । प्राचीन भारत तथा मिस्र में मेथी का सुनहरा रंग कपड़ों को रंगने में भी काम आता था । प्राचीन मिस्र में मेथी वह मसाला थी जो कि एक वृद्ध पुरुष को एक नौजवान बना सकती थी ।

आज भी मेथी का प्रयोग कोमल त्वचा तथा मुलायम तथा चमकीले बालों के लिए होता है । बहुत से राज्यों में आज भी मेथी दानों को नारियल के तेल में मिलाकर के बालों की रूसी तथा चमक के लिए इस्तेमाल किया जाता है ।

स्वास्थ्य तथा सौंदर्य के रूप में भी मस्ती का इस्तेमाल सदियों से होता आया रहा है और यह सारे प्रयोग प्रयोगशाला में भी खरे उतर रहे हैं ।

मेथी के कड़वे दानो को भी मानव ने सदियों पहले ही पहचान तथा जान लिया था कि यह कितने काम के हो सकते हैं । माना जाता है कि पैगंबर मोहम्मद ने कहा था अगर मेरे लोग जानते कि मेथी में में क्या है तो वह उसको सोने में तोलते । सोने के भाव खरीदते ।

स्वाद शहत तथा सौंदर्य का अनूठा संगम होता है मेथी ।

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