सीता माता का जन्म कैसे हुआ ? सीता जी के पिता कौन थे

ब्राह्मणों ने सीता का नामकरण संस्कार करने से मना क्यों कर दिया ?

ब्राह्मण तथा ऋषि-मुनियों ने सीता का नाम करण करने से मना क्यों कर दिया ?

नमस्कार दोस्तों दोस्तों जब सीता का जन्म हुआ और राजा जनक ने सीता के नामकरण का आयोजन रखा तभी बड़ी ही विचित्र समस्या राजा जनक के सामने उत्पन्न हो गई ।

क्योंकि वहां के ऋषि-मुनियों ने राजा जनक की पुत्री सीता का नामकरण करने से मना कर दिया था । क्योंकि उस समय ऐसा कोई विधान नहीं था कि उसका नामकरण हो सके । उस समय नामकरण उसी का किया जाता था जिसका कुल तथा गोत्र पता हो ।

किसी भी व्यक्ति का नामकरण उसके कुल तथा गोत्र को देख करके किया जाता है । जबकि सीता तो जमीन से उत्पन्न हुई थी। जिसके कारण उसका ने तो कोई कुल था और ने ही कोई गोत्र था । ऐसी स्थिति में उसका नामकरण कैसे किया जा सकता है ।

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राजा जनक के सामने एक गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई । इस समस्या के समाधान के लिए राजा जनक ने बुद्धिजीवी तथा ज्ञानियों की एक धर्म सभा बुलाई ।

धर्म सभा में उन्होंने सभी ऋषि-मुनियों तथा देवताओं को आमंत्रित किया । सभी देवताओं का , ऋषि मुनि का , ज्ञानी जन राजा जनक कि इस धर्म सभा में प्रस्तुत हुए । सभी ने अपना अपना तर्क सम्मत धर्म संगत तथा परंपरागत रूप से वैदिक परंपरा के आधार पर अपने अपने प्रश्न सभी के सामने रखें ।

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तब सभी देवताओं तथा ज्ञानियों ने मिलकर के यह निर्णय लिया कि जो भी व्यक्ति संतान का पालन तथा पोषण करेगा , उसी के नाम पर उस व्यक्ति का कुल तथा गोत्र रखा जाएगा तथा उसी के कुल का गोत्र के आधार पर ही उसका नामकरण किया जाएगा ।

क्योंकि पालन पोषण करने वाली को जन्म देने वाले से भी बड़ा माना जाता है ।

जब जन्म देने वाले का नाम पता मालूम नहीं होता है तब पालन करने वाले को ही सर्वेश्वर माना जाता है ।

यदि कोई माता-पिता संतान के जन्म के पश्चात उसे छोड़ देते हैं या फिर त्याग देते हैं तब उस संतान का कुल तथा गोत्र क्या होगा ।

इस पर भी ऋषि-मुनियों ने संतोषजनक जवाब दिया ताकि भविष्य में होने वाली ऐसी घटनाओं से समाज में कोई भी व्यक्ति के साथ गलत व्यवहार नहीं हो ।

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पालने वाले व्यक्ति को जन्म देने वाले व्यक्ति से कभी भी कम नहीं आंकना चाहिए ।

इस धर्म सभा के बाद अनजान , लावारिस तथा त्यागे गए के बच्चों के नामकरण की प्रथा शुरू हुई । इससे पहले यह प्रथा इस धरती पर नहीं थी

सीता का जन्म हल चलाने से हुआ था । जिसे सीताफल भी कहते हैं । जिसके परिणाम स्वरूप कुंडली के अनुसार ” “अक्सर बनता है । इसलिए इसका नाम ” ” से शुरू होगा । जिसके कारण राजा जनक की पुत्री का नाम सीता पड़ा ।

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