गर्भ ठहरने की विधि । स्त्री के गर्भ ठहरने की विधि । गर्भ ठहरने का सही तरीका , पुत्र पुत्री की प्राप्ति के प्राकृतिक उपाय, putra prapti ke liye sahi samay .

गर्भ ठहरने की विधि । स्त्री के गर्भ ठहरने की विधि । गर्भ ठहरने का सही तरीका । पुत्री की प्राप्ति के प्राकृतिक उपाय । putra prapti ke liye sahi samay . Stri ke garbh thaharne ki vidhi . Garbh thaharne ka Sahi tarika . Putra putri ki prapti ke prakrutik upay .

सही तरीके से सहवास से मिलेगी संतान । इसके लिए अपनाना होगा गर्भ ठहरने की विधि ।
गर्भधारण करने के लिए कब करना चाहिए सेक्स और किस विधि से करना चाहिए । गर्भवती होने में आ रही है समस्या, अपनाएं ये 10 आसान उपाय और गर्भ ठहरने की विधि ।

गर्भ ठहरने के लिए महिलाओं के द्वारा अलग-अलग तरीकों को अपनाया जाता है । गर्भ ठहरने के लिए कुछ महिलाएं घरेलू तरीकों का इस्तेमाल करती है तो कुछ महिलाएं गर्भ ठहरने की विधि का इस्तेमाल करके गर्भ ठहराने की कोशिश करती है ।

गर्भ ठहरने की विधि दिखाएं। गर्भ ठहरने का सही तरीका

गर्भ ठहरने की विधि – गर्भ को ठहरने के लिए सेहवास के बाद अपने पाटनर या पत्नी को अपने दोनों घुटनों को ब्रेस्ट के पास करने को कहें । करीब 20 से 25 मिनट तक अपने घुटनों को छाती के स्तनों के पास रखें । इससे जल्दी गर्भधारण में आसानी होगी । इसके साथ ही संभोग के दौरान किसी भी तरह की जेली और तेल का प्रयोग नहीं करना चाहिए । यदि आप संभोग के दौरान लुब्रिकेंट का उपयोग करते हो तो यह शुक्राणु की गति को कम कर देता है ।

स्त्री के गर्भ ठहरने की विधि। गर्भ ठहरने का सही तरीका

स्त्री के गर्भ ठहरने के लिए पीरियड के 14 दिन बाद ही स्त्री को शारीरिक संबंध बनाना चाहिए । क्योंकि पीरियड के 14 दिन बाद ही अंडा रिलीज होता है। इन दिनों में ही प्रेगनेंसी कंसीव करने की संभावना ज्यादा होती है और स्त्री के गर्भ ठहरने की संभावना भी काफी अधिक होती है । यदि कोई स्त्री प्रेग्नेंट होना चाहती है और अपने गर्भ को ठहराना चाहती है तो उसकी स्त्री को पीरियड के 14 दिन बाद से ही शारीरिक संबंध बनाना चाहिए ।

स्त्री के गर्भ ठहरने की विधि – स्त्री के गर्भ को ठहरने के लिए शारीरिक संबंध के दौरान किसी भी प्रकार के लुब्रिकेंट जैसे कि वैसलीन, जेली या तेल का प्रयोग नहीं करना चाहिए । क्योंकि इससे शुक्राणु के तेरने में में बाधा उत्पन्न होती है । यदि आप इस विधि को अपनाते हो तो इस तरीके को अपनाते हो तो गर्भ धारण की संभावना बढ़ जाती है ।

स्त्री के गर्भ को ठहरने के लिए इस विधि को जरूर अपनाना चाहिए । इस विधि से स्त्री के गर्भ ठहरने की संभावना लगभग 50% से भी ज्यादा बढ़ जाती है। स्त्री के गर्भ को ठहरने के लिए शारीरिक संबंध बनाने के बाद और वीर्य को स्खलित करने के बाद महिला को अपने दोनों घुटनों को छाती के स्तनों के पास रखना चाहिए । इसके बाद इस पोजीशन में उस स्त्री को कम से कम आधे घंटे तक रहना चाहिए । यदि कोई स्त्री सहवास के बाद इस विधि को अपनाती है तो उसके प्रेग्नेंट होने की और गर्भ ठहरने की संभावना बढ़ जाती है ।

गर्भ ठहरने का सही तरीका। गर्भ ठहरने की विधि ।

गर्भ ठहरने का सही तरीका तो यही होता है की स्त्री और पुरुष को शारीरिक संबंध ओवुलेशन के समय में बनाना चाहिए । ओवुलेशन के समय ही गर्भ गिरने की संभावना सबसे अधिक होती है । ओवुलेशन का समय आमतौर पर पीरियड खत्म होने के बाद 14 दिन के आसपास का होता है ।

गर्भ ठहरने के लिए ओवुलेशन के समय में 72 घंटे के अंदर शारीरिक संबंध बनाना जरूरी होता है । क्योंकि पुरुष के स्पर्म 24 से 48 घंटे तक जीवित रहते हैं । अंडा , अंडा से से निकलने के बाद 24 घंटे के अंदर फर्टिलाइज होना जरूरी होता है तभी गर्भ ठहरने की संभावना होती है ।

putra prapti ke liye sahi samay गर्भ ठहरने के तरीके

पुत्र प्राप्ति के लिए गर्भाधान काल – चौदहवीं रात्रि के गर्भ से उत्तम पुत्र का जन्म होता है। पंद्रहवीं रात्रि के गर्भ से सौभाग्यवती पुत्री पैदा होती है। सोलहवीं रात्रि के गर्भ से सर्वगुण संपन्न, पुत्र पैदा होता है।

पुत्र पुत्री की प्राप्ति के प्राकृतिक उपाय। गर्भ ठहरने की विधि ।

हमारे धर्म ग्रंथों में और शास्त्रों में यह बताया गया है कि पीरियड अर्थात माहवारी के कितने दिनों बाद शारीरिक संबंध बनाने से किस प्रकार की संतान की प्राप्ति होती है । किस दिन शारीरिक संबंध बनाने से पुत्र की प्राप्ति होती है और किस दिन शारीरिक संबंध बनाने से पुत्री की प्राप्ति होती है । इसके अलावा यह भी बताया गया है कि इन दिनों में होने वाली संतान कैसी होती है , उसका भविष्य और भाग्य क्या होता है । हमारे धर्म ग्रंथों में यह भी बताया गया है कि पुत्र पुत्री की प्राप्ति के लिए शारीरिक संबंध दिन में बनाने चाहिए या फिर रात में बनाने चाहिए । इसके अलावा कृष्ण पक्ष में बनाने चाहिए या फिर शुकल पक्ष में बनाने चाहिए इसके बारे में भी विस्तार से बताया गया है ।

पुत्र प्राप्ति के लिए महिलाओं को गर्भधारण तब करना चाहिए जब सूर्य उत्तरायण में होता है । सूर्य उत्तरायण में मकर सक्रांति के बाद में रहता है। जब सूर्य दक्षिणायन मैं होता है तब गर्भ ठहरने पर पुत्री की प्राप्ति होती है । मंगलवार गुरुवार और रविवार के दिन यदि किसी स्त्री का गर्भ ठहरता है तो उस से पुत्र की प्राप्ति होती है और यदि किसी महिला का गर्भ सोमवार और शुक्रवार के दिन ठहरता है तो उसे पुत्री की प्राप्ति होती है । बुधवार के दिन और शनिवार के दिन किसी भी स्त्री को गर्भधारण के लिए शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए । क्योंकि बुधवार और शनिवार गर्भधारण के लिए सही नहीं माना जाता है ।

1 . ग्रंथों के अनुसार यदि किसी महिला का गर्भ माहवारी के चौथी रात्रि में ठहरता है तो उसकी होने वाली संतान अल्पआयु तथा दरिद्र होती है । इसके साथ ही होने वाली संतान पुत्र होती है ।

2 . पांचवी रात्रि किसी में यदि कोई महिला गर्भवती होती है तो इस तरह की संतान के भविष्य में होने वाली संतान कन्या होती है । इसके अलावा पांचवी रात्रि में गर्भ ठहरने से पुत्री की प्राप्ति होती है ।

3 . यदि किसी महिला के पीरियड के 6 दिन बाद छठी रात्रि में यदि गर्भ ठहरता है तो होने वाली संतान पुत्र होती है तथा इस तरह की संतान अल्प आयु होती है ।

4 . सातवीं रात्रि में गर्भ ठहरने से भविष्य में होने वाली संतान कन्या होती है । होने वाली संतान कमजोर होती है ।

5 . आठवीं रात्रि को गर्भ ठहरने से होने वाली संतान उत्तर होती है आठवीं रात्रि को गर्म करने से पैदा होने वाली संतान ऐश्वर्याशाली होती है ।

6 . 9वीं रात्रि को गर्भ ठहरने से होने वाली संतान ऐश्वर्या शाली होती है । 9वीं रात्रि को गर्भ ठहरने से पुत्री की प्राप्ति होती है ।

7 . यदि किसी महिला का गर्भ पीरियड के दसवीं रात्रि को ठहरता है तब उस महिला की होने वाली संतान पुत्र होती है तथा संतान बहुत ही चतुर होती है ।

8 . 11वीं रात्रि को यदि किसी महिला का गर्भ ठहरता है तब उसकी होने वाली संतान पुत्री होती है तथा इस तरह की संतान चरित्रहीन संतान होती है ।

9 . यदि किसी महिला का गर्भ पीरियड के बाद 12 वीं रात्रि को ठहरता है तब उसकी होने वाली संतान पुत्र होती है तथा 12वीं रात्रि को गर्भ ठहरने से होने वाली संतान पुरुषोत्तम होती है ।

10 . यदि किसी महिला का गर्भ पीरियड के तेरहवीं रात्रि को ठहरता है तो उसकी होने वाली संतान पुत्री होती है तथा दोगली होती है ।

11 . यदि किसी महिला पर गर्भ पीरियड के 14वीं रात्रि को ठहरता है तब उसकी होने वाली संतान पुत्र होती है । 14वीं रात्रि को गर्भ ठहरने से पैदा होने वाली संतान उत्तम संतान मानी जाती है ।

12 . यदि किसी महिला का गर्भ पीरियड के पंद्रहवीं रात्रि को ठहरता है तब उसकी होने वाली संतान पुत्री होती है । 15 वीं भी रात्रि के गर्भधारण से उत्पन्न संतान भाग्यशाली होती है ।

13 . यदि किसी महिला का गर्भ पीरियड के 16वीं रात्रि को ठहरता है तब उसकी होने वाली संतान पुत्र होती है । 16वीं रात्रि के गर्भ ठहरने से उत्पन्न होने वाली संतान सर्वगुण संपन्न , उत्तम मानी जाती है।

Contact Us

किसी भी प्रकार की समस्या और शिकायत के लिए इस ईमेल आईडी पर हमसे संपर्क कर सकते हैं। - calltohelps@gmail.com इस वेबसाइट के माध्यम से हमारा उद्देश्य सिर्फ लोगों को जागरूक करना और जानकारी देना है । इस वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के आधार पर कोई निर्णय अपने स्वविवेक पर लें । अधिक जानकारी के लिए Disclaimer जरूर पढ़ें