ट्रांसफार्मर क्या होता है। ट्रांसफार्मर में कौन-कौन सी हानियां होती है ?

ट्रांसफार्मर में कौन-कौन सी हानियां होती है ? ट्रांसफार्मर में कौन सा तेल भरा होता है ?

ट्रांसफार्मर में कौन-कौन सी हानियां होती है ? ट्रांसफार्मर में कौन सा तेल भरा होता है ? ट्रांसफार्मर क्या होता है ट्रांसफार्मर के बारे में जानकारी

ट्रांसफार्मर के कौन-कौन से पार्ट होते हैं ?

1 . core
2 . widding
3 . Tank
4 . Bush
5 . Buchhotz Relay
6 . Breather
7 . Radiation

मुख्य टैंक

यह ट्रांसफार्मर का वह भाग होता है जिसके अंदर ट्रांसफार्मर के सारे भाग रखे हुए होते हैं । इस टैंक में मुख्य रूप से तीन चीजें होती है ।

इसमें एक कोर होता है इसके चारों और वाइंडिंग की हुई होती है और ट्रांसफार्मर में टैंक में नेफ्था ओयल भरा होता है ।

ट्रांसफार्मर में कोर क्या होता है ?

कोर ट्रांसफार्मर का मध्य भाग होता है । यह नर्म लोहे का बना हुआ होता है कोर को मोटा किया जाता है । जबकि एक ही लोहे से मोटा नहीं किया जाता है । कोर को मोटा करने के लिए ट्रांसफार्मर में बहुत सारी पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है ।

ट्रांसफार्मर में कोर को मोटा क्यों किया जाता है ?

कोर के अंदर एडी करंट उत्पन्न ना हो इसके लिए कोर को मोटा किया जाता है । इसके साथ ही ट्रांसफार्मर में करंट के लॉस को रोकने के लिए भी कोर को मोटा किया जाता है ।

ट्रांसफार्मर में एडी करंट क्या होता है ?

ट्रांसफार्मर में जहां पर भी खाली जगह होती है । वहां पर एक करंट उत्पन्न हो जाता है । जिसे एडी करंट के नाम से जाना जाता है ।

ट्रांसफार्मर में खाली जगह को भरने के लिए तथा एडी करंट उत्पन्न ना हो । इसको रोकने के लिए इसके ऊपर बारनिस का लेप लगा दिया जाता है । यह लेप इस पर उत्पन्न होने वाले एक्स्ट्रा करंट यानी कि एडी करंट को कम करता है ।

बारनिस का लेप लगाकर के पतियों को आपस में जोड़ करके कोर को मोटा किया जाता है ।

इस कोर के ऊपर तांबे के तार को लपेटकर वाइंडिंग की जाती है । यह वाइंडिंग दो परत की होती है ।
प्राइमरी वाइंडिंग तथा सेकेंडरी वाइंडिंग । दोनों वाइंडिंग के बीच में एक कागज लगा दिया जाता है जो कि दोनों वाइंडिंग को अलग करता है ।

वाइंडिंग को कोर के ऊपर किया जाता है । कोर नरम लोहे का बना होता है कोर को छोटी-छोटी प्लेटो से बनाया जाता है ।

एडी करंट ओरिजिनल करंट का हमेशा विरोध करता है । इसलिए ट्रांसफार्मर में खाली जगह को भर दिया जाता है ।

ट्रांसफार्मर में मैन टेंक के अलावा एक और छोटा सा टैंक होता है । जिसे कंजरवेटर टैंक या एक्सपेंशन टैंक कहते हैं । यह टैंक होना बहुत ही जरूरी होता है । यदि ट्रांसफार्मर में यह टैंक नहीं होता है तो ट्रांसफार्मर ब्लास्ट हो जाता है ।

इसका कारण यह है कि ट्रांसफार्मर जब ज्यादा समय तक चलता है तब बहुत ज्यादा हिटिंग के कारण ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो जाता है ‌ इस वजह से यह तेल बहुत ज्यादा ही गर्म हो जाता है ।

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एक्सपेंशन टैंक को आधा खाली क्यों छोड़ा जाता है ?

एक्सपेंशन टैंक को आधा तेल से भरा जाता है तथा आधा खाली छोड़ा जाता है । क्योंकि कभी कबार मेंटेनेंस नहीं होने के कारण यह टैंक खाली हो जाता है और खाली जगह में एडी करंट उत्पन्न हो जाता है । इस वजह से इसे आधा भरा जाता है ।

ब्रिदर ( Breather ) क्या होता है ?

जब एक्सपेंशन टैंक खाली होता है तब उस में हवा भर जाती है । हवा में नमी होती है । उस नमी को रोकने के लिए एक्सपेंशन टैंक के ऊपर बाहर की तरफ ब्रिदर लगाया जाता है । आमतौर पर ब्रिदर का कलर नीला होता है ।

डीजल के अंदर सिलिका जेल भरा होता है । सिलिका जेल हवा में मौजूद नमी को सोख लेता है ।

ट्रांसफार्मर में रेत को रोकने के लिए क्या लगाया जाता है ?

ट्रांसफार्मर में रेत को रोकने के लिए ब्रदर के नीचे एक कटोरी नुमा संरचना बना दी जाती है । इस कटोरी नुमा संरचना में तेल भर दिया जाता है । धूल के कण इस तेल में रुक जाते हैं तथा साफ हवा एक्सपेंशन टैंक में भर जाती है ।

ट्रांसफार्मर के मेन टैंक में तेल कैसे भरा जाता है ?

एक्सपेंशन टैंक में एक छेद होता है । उसके जरिए ही मेन टैंक में तेल भरा जाता है । यदि ट्रांसफार्मर के मैन टेंक को खाली करना होता है तो ट्रांसफार्मर के नीचे की तरफ एक वॉल होता है । इसे खोल कर के ट्रांसफार्मर को खाली किया जाता है ।

ट्रांसफार्मर में ओवरहीटिंग को रोकने के लिए क्या किया जाता है ?

ट्रांसफार्मर में ओवरहीटिंग को रोकने के लिए Buchhotz Relay लगाया जाता है । इस मशीन को इलेक्ट्रिसिटी से कोई लेना देना नहीं होता है । इसके अंदर एक स्विच होता है । इसको दबाने की क्षमता पारे में भर दी जाती है ।

जैसे ही ट्रांसफार्मर गर्म होता है । पारा भी गर्म होता है । गरम होकर के पारा ऊपर की तरफ बढ़ता है । पारे के दबाव के कारण स्विच दब जाता है और ट्रांसफार्मर की सप्लाई बंद हो जाती है । Buchhotz Relay मे पारा स्विच का प्रयोग किया जाता है ।

Buchhotz Relay को हमेशा एक्सपेंशन टैंक तथा मैन टेक के बीच में लगाया जाता है । Buchhotz Relay को ट्रांसफार्मर में सेफ्टी के लिए लगाया जाता है ।

ट्रांसफार्मर में एक्सप्लोजन वोल ( exploxen volve ) क्या होता है ?

जब ट्रांसफार्मर का तेल बहुत ज्यादा ही गर्म हो जाता है और ओवरलोड होने लगता है । तब एक्सपेंशन टैंक में भी जगह नहीं होती है । तब तेल को बाहर निकालने के लिए एक्सप्लोजन वोल लगाया जाता है ।

ट्रांसफार्मर में cooling ट्यूब या रेडिएटर क्या होता हैं ?

ट्रांसफार्मर में रेडिएटर का काम गर्म तेल को ठंडा करना होता है । जब तेल गरम हो करके ऊपर उठता है , तब तेल रेडिएटर में लगी छोटी-छोटी ट्यूब में भर जाता है । इस ट्यूब से तेल फिर धीरे-धीरे नीचे चला जाता है और इसी दौरान हवा के संपर्क में आने से तेल ठंडा हो जाता है ।

ठंडा होकर के तेल फिर से मेन टैंक में चला जाता है और जब तेल गर्म होता है तब ऊपर से फिर से रेडिएटर की नली में आ जाता है । रेडिएटर की नली में हवा के संपर्क में आने से फिर से ठंडा होकर के मेन टैंक में चला जाता है । इस प्रकार से यह प्रक्रिया चलती रहती है ।

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ट्रांसफार्मर में टर्मिनल या Bushing क्या होता है ?

यदि करंट को किसी दूर स्थित जगह पर भेजना होता है तब उसे हाई वोल्टेज पर भेजना होता है । यदि उसी हाई वोल्टेज को सीधे घर में सप्लाई कर दिया जाए तो यह बिजली उपकरण को जला देता है । उस हाई वोल्टेज को कम करने के लिए टर्मिनल का उपयोग किया जाता है ।

ट्रांसफार्मर के टर्मिनल को टर्मिनल ना केह करके Bushing कहा जाता है । यह दो प्रकार का होता है ।
1 . Low voltage ( LV )
2 . heigh voltage ( HV )

ट्रांसफार्मर में कौन-कौन सी हानियां होती है ?

लोहा हानियां ( iron or core losses )

लोहा हानि को कोर हानि भी कहा जाता है । लोहा हनी दो प्रकार का होता है ।
1 . एडी करंट लॉस ( Eddy current losses )
2 . Hysteresis losses

Eddy current losses

यदि ट्रांसफार्मर के कोर में कहीं भी थोड़ी सी भी जगह बच जाती है तो उसमें भंवर धाराएं उत्पन्न होती है ।

भंवर धाराएं एक्स्ट्रा करंट होता है जो कि ओरिजिनल करंट के विपरीत चलता है ।

Hysteresis losses

जब किसी धातु में करंट की सप्लाई करते हैं तब उसमें चुंबकीय गुण आ जाता है । और जब करंट की सप्लाई को रोकते हैं तब चुंबकीय गुण चला जाता है । क्योंकि ट्रांसफार्मर एसी करंट पर काम करता है । जिससे कि करंट की दिशा बार-बार बदलती रहती है ।

जिसके कारण कोर एक बार मैग्नेटिक होगा तथा एक बार मैग्नेटिक नहीं होगा । इलेक्ट्रॉन की दिशा भी बार-बार बदलती रहती है । जिससे की एक उष्मा उत्पन्न होती है । जिसे हम Hysteresis losses कहते हैं ।

Hysteresis losses को रोकने के लिए सिलिकॉन स्टील कोर का प्रयोग किया जाता है । यह सबसे अच्छा कोर माना जाता है ।

Ohmic loss

इस लोस को कोपर लोस ( copper Loss ) या फिर प्रतिरोध लॉस भी कहा जाता है ।
जब कोई धारा किसी चालक से होकर गुजरती है तब उसमें मौजूद प्रतिरोध धारा को रोक करके उसका प्रतिरोध करता है । जिसके फलस्वरूप ऊर्जा उत्पन्न होती है । उस उर्जा को ही प्रतिरोध लॉस कहते हैं ।

Stray Losses

यह लॉस चुंबकीय फ्लक्स के कारण होता है । चुंबकीय फ्लक्स लॉस ना हो इसको रोकने के लिए वाइंडिंग की एक परत को ठीक दूसरी परत के ऊपर रखा जाता है ।

फ्लक्स के बीच में गैप होने के कारण तथा फ्लक्स के लीकेज होने के कारण उत्पन्न होने वाले लॉस को Stray Losses कहा जाता है ।

Dielectric Losses

इंसुलेटर के कारण उत्पन्न होने वाले लोस को डाइलेक्ट्रिक लॉस कहते हैं ।

मैग्नेटोस्ट्रिक्शन लॉस ( Mangneto Striction Losses ) – यह घटना आपके साथ कई बार हो चुकी होगी । जब भी आप किसी ट्रांसफार्मर के पास में जाते हैं तब उस ट्रांसफार्मर में से एक आवाज आपको सुनाई देती है ।

यह ऊर्जा भी किसी ना किसी रूप से बिजली से ही उत्पन्न होती है । ट्रांसफार्मर से जो साउंड उत्पन्न होती है । उसे एक लॉस होता है । जिसे हम मैग्नेटोस्ट्रिक्शन लॉस कहते हैं ।

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