ट्रांसफार्मर क्या होता है। ट्रांसफार्मर में कौन-कौन सी हानियां होती है ? ट्रांसफार्मर किस सिद्धांत पर कार्य करता है?

ट्रांसफार्मर में कौन-कौन सी हानियां होती है ? ट्रांसफार्मर में कौन सा तेल भरा होता है ?

ट्रांसफार्मर में कौन-कौन सी हानियां होती है ? ट्रांसफार्मर में कौन सा तेल भरा होता है ? ट्रांसफार्मर क्या होता है ट्रांसफार्मर के बारे में जानकारी

ट्रांसफार्मर क्या है ? ट्रांसफार्मर की परिभाषा बताइये ? Transformer kya hai . Transformer ki paribhasha bataiye.

ट्रांसफार्मर एक ऐसा विद्युत यंत्र होता है जो कि प्रत्यावर्ती धारा ( Alternating Current ) के वोल्टेज को कम या ज्यादा करने का काम करता है । ट्रांसफॉमर्स धारा की आवृत्ति को बिना बदले वोल्टेज ( voltage ) को कम ज्यादा करने का काम करता है । ट्रांसफार्मर को हिंदी में परिणामित्र कहते हैं । परिणामित्र ट्रांसफार्मर का हिंदी नाम है ।

ट्रांसफार्मर की खोज किसने की थी ? Transformer ki khoj kisne ki thi .

ट्रांसफार्मर का आविष्कार माइकल फैराडे ने 1831 में किया था । जोसेफ हेनरी का भी ट्रांसफार्मर के अविष्कार में काफी महत्वपूर्ण हाथ रहा है । उस समय माइकल फैराडे ब्रिटेन में ट्रांसफार्मर पर काम कर रहे थे और उन्होंने 1831 में ट्रांसफार्मर का आविष्कार कर दिया । जोसेफ हेनरी तथा माइकल फैराडे दोनों ने मिलकर के ट्रांसफार्मर का आविष्कार किया था ।

ट्रांसफार्मर के कौन-कौन से पार्ट होते हैं ? Transformer ke kaun kaun se part hote Hain

1 . core
2 . widding
3 . Tank
4 . Bush
5 . Buchhotz Relay
6 . Breather
7 . Radiation

मुख्य टैंक

यह ट्रांसफार्मर का वह भाग होता है जिसके अंदर ट्रांसफार्मर के सारे भाग रखे हुए होते हैं । इस टैंक में मुख्य रूप से तीन चीजें होती है ।

इसमें एक कोर होता है इसके चारों और वाइंडिंग की हुई होती है और ट्रांसफार्मर में टैंक में नेफ्था ओयल भरा होता है ।

ट्रांसफार्मर की संरचना कैसी होती है ? Transformer ki sanrachna kaisi hoti hai .

ट्रांसफार्मर की संरचना यानी की बनावट कैसी होती है । किस प्रकार से Transformer को बनाया जाता है और ट्रांसफार्मर को बनाने के लिए किन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है । Transformer को बनाने के लिए पटलित आयताकार क्रोड़ का उपयोग किया जाता है जो कि लोहे की धातु से बनी हुई होती है ।

एक से अधिक पटलित आयताकार क्रोड़ को एक के ऊपर एक रखा जाता है और फिर तांबे के तार को लपेटकर के कुंडली तैयार की जाती है । एक तरफ तांबे के तार को लपेटकर कुंडली तैयार की जाती है उसे प्राथमिक कुंडली ( primary kundli ) के नाम से जाना जाता है तथा दूसरी तरफ तांबे के तार को लपेट करके दूसरी कुंडली तैयार की जाती है जिसे द्वितीयक कुंडली ( secondary kundli ) के नाम से जाना जाता है ।

अब जिस भी प्रत्यावर्ती धारा को बदलना होता है उसे प्राथमिक कुंडली से जोड़ा जाता है और जिस कुंडली से हमें वोल्टता प्राप्त करनी होती है उसे द्वितीयक कुंडली से जोड़ा जाता है ।

वोल्टता कम प्राप्त हो रही है या फिर ज्यादा प्राप्त हो रही है यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन सी कुंडली में फरों की संख्या कितनी है । यदि प्राथमिक कुंडली में फरों की संख्या ज्यादा है और द्वितीय कुंडली में फैन की संख्या प्राथमिक कुंडली से कम है तब वोल्टता कम प्राप्त होती है ।

यदि प्राथमिक कुंडली में फेरों की संख्या कम रखी जाती है और दूसरी कुंडली में फरों की संख्या ज्यादा रखी जाती है तब वोल्टता अधिक प्राप्त होती है ।

ट्रांसफार्मर किस सिद्धांत पर कार्य करता है ? ट्रांसफार्मर का कार्य सिद्धांत क्या है ? Transformer kis siddhant par karya karta hai .

ट्रांसफार्मर अन्योन्य प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है । इस सिद्धांत के अनुसार जब एक कुंडली में धारा के मान में परिवर्तन किया जाता है तब दूसरी कुंडली के धारा के मान में भी परिवर्तन होता है ।

ट्रांसफार्मर में कोर क्या होता है ? Transformer mein core ka matlab kya hota hai

कोर ट्रांसफार्मर का मध्य भाग होता है । यह नर्म लोहे का बना हुआ होता है कोर को मोटा किया जाता है । जबकि एक ही लोहे से मोटा नहीं किया जाता है । कोर को मोटा करने के लिए ट्रांसफार्मर में बहुत सारी पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है ।

ट्रांसफार्मर में कोर को मोटा क्यों किया जाता है ? Transformer mein core ko motor kyon Kiya jata hai

कोर के अंदर एडी करंट उत्पन्न ना हो इसके लिए कोर को मोटा किया जाता है । इसके साथ ही ट्रांसफार्मर में करंट के लॉस को रोकने के लिए भी कोर को मोटा किया जाता है ।

ट्रांसफार्मर में एडी करंट क्या होता है ? Transformer mein add current kya hota hai

ट्रांसफार्मर में जहां पर भी खाली जगह होती है । वहां पर एक करंट उत्पन्न हो जाता है । जिसे एडी करंट के नाम से जाना जाता है ।

ट्रांसफार्मर में खाली जगह को भरने के लिए तथा एडी करंट उत्पन्न ना हो । इसको रोकने के लिए इसके ऊपर बारनिस का लेप लगा दिया जाता है । यह लेप इस पर उत्पन्न होने वाले एक्स्ट्रा करंट यानी कि एडी करंट को कम करता है ।

बारनिस का लेप लगाकर के पतियों को आपस में जोड़ करके कोर को मोटा किया जाता है ।

इस कोर के ऊपर तांबे के तार को लपेटकर वाइंडिंग की जाती है । यह वाइंडिंग दो परत की होती है ।
प्राइमरी वाइंडिंग तथा सेकेंडरी वाइंडिंग । दोनों वाइंडिंग के बीच में एक कागज लगा दिया जाता है जो कि दोनों वाइंडिंग को अलग करता है ।

वाइंडिंग को कोर के ऊपर किया जाता है । कोर नरम लोहे का बना होता है कोर को छोटी-छोटी प्लेटो से बनाया जाता है ।

एडी करंट ओरिजिनल करंट का हमेशा विरोध करता है । इसलिए ट्रांसफार्मर में खाली जगह को भर दिया जाता है ।

ट्रांसफार्मर में मैन टेंक के अलावा एक और छोटा सा टैंक होता है । जिसे कंजरवेटर टैंक या एक्सपेंशन टैंक कहते हैं । यह टैंक होना बहुत ही जरूरी होता है । यदि ट्रांसफार्मर में यह टैंक नहीं होता है तो ट्रांसफार्मर ब्लास्ट हो जाता है ।

इसका कारण यह है कि ट्रांसफार्मर जब ज्यादा समय तक चलता है तब बहुत ज्यादा हिटिंग के कारण ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो जाता है ‌ इस वजह से यह तेल बहुत ज्यादा ही गर्म हो जाता है ।

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एक्सपेंशन टैंक को आधा खाली क्यों छोड़ा जाता है ? Expansion tank ko aadha kha li kyon chhoda jata hai

एक्सपेंशन टैंक को आधा तेल से भरा जाता है तथा आधा खाली छोड़ा जाता है । क्योंकि कभी कबार मेंटेनेंस नहीं होने के कारण यह टैंक खाली हो जाता है और खाली जगह में एडी करंट उत्पन्न हो जाता है । इस वजह से इसे आधा भरा जाता है ।

ब्रिदर ( Breather ) क्या होता है ? Transformer mein Breather kya hota hai

जब एक्सपेंशन टैंक खाली होता है तब उस में हवा भर जाती है । हवा में नमी होती है । उस नमी को रोकने के लिए एक्सपेंशन टैंक के ऊपर बाहर की तरफ ब्रिदर लगाया जाता है । आमतौर पर ब्रिदर का कलर नीला होता है ।

डीजल के अंदर सिलिका जेल भरा होता है । सिलिका जेल हवा में मौजूद नमी को सोख लेता है ।

ट्रांसफार्मर में रेत को रोकने के लिए क्या लगाया जाता है ? Transformer mein rate ko rokane ke liye kya lagaya jata hai

ट्रांसफार्मर में रेत को रोकने के लिए ब्रदर के नीचे एक कटोरी नुमा संरचना बना दी जाती है । इस कटोरी नुमा संरचना में तेल भर दिया जाता है । धूल के कण इस तेल में रुक जाते हैं तथा साफ हवा एक्सपेंशन टैंक में भर जाती है ।

ट्रांसफार्मर के मेन टैंक में तेल कैसे भरा जाता है ? Transformer ke main tank mein Tel kaise bhara jata hai

एक्सपेंशन टैंक में एक छेद होता है । उसके जरिए ही मेन टैंक में तेल भरा जाता है । यदि ट्रांसफार्मर के मैन टेंक को खाली करना होता है तो ट्रांसफार्मर के नीचे की तरफ एक वॉल होता है । इसे खोल कर के ट्रांसफार्मर को खाली किया जाता है ।

ट्रांसफार्मर में ओवरहीटिंग को रोकने के लिए क्या किया जाता है ? Transformer mein overheating ko rokane ke liye kya kiya jata hai

ट्रांसफार्मर में ओवरहीटिंग को रोकने के लिए Buchhotz Relay लगाया जाता है । इस मशीन को इलेक्ट्रिसिटी से कोई लेना देना नहीं होता है । इसके अंदर एक स्विच होता है । इसको दबाने की क्षमता पारे में भर दी जाती है ।

जैसे ही ट्रांसफार्मर गर्म होता है । पारा भी गर्म होता है । गरम होकर के पारा ऊपर की तरफ बढ़ता है । पारे के दबाव के कारण स्विच दब जाता है और ट्रांसफार्मर की सप्लाई बंद हो जाती है । Buchhotz Relay मे पारा स्विच का प्रयोग किया जाता है ।

Buchhotz Relay को हमेशा एक्सपेंशन टैंक तथा मैन टेक के बीच में लगाया जाता है । Buchhotz Relay को ट्रांसफार्मर में सेफ्टी के लिए लगाया जाता है ।

ट्रांसफार्मर में एक्सप्लोजन वोल ( exploxen volve ) क्या होता है ? Transformer main exploxen volve Ka kya Kam hota hai

जब ट्रांसफार्मर का तेल बहुत ज्यादा ही गर्म हो जाता है और ओवरलोड होने लगता है । तब एक्सपेंशन टैंक में भी जगह नहीं होती है । तब तेल को बाहर निकालने के लिए एक्सप्लोजन वोल लगाया जाता है ।

ट्रांसफार्मर में cooling ट्यूब या रेडिएटर क्या होता हैं ?Transformer mein radiator Ka kya Kam hota hai

ट्रांसफार्मर में रेडिएटर का काम गर्म तेल को ठंडा करना होता है । जब तेल गरम हो करके ऊपर उठता है , तब तेल रेडिएटर में लगी छोटी-छोटी ट्यूब में भर जाता है । इस ट्यूब से तेल फिर धीरे-धीरे नीचे चला जाता है और इसी दौरान हवा के संपर्क में आने से तेल ठंडा हो जाता है ।

ठंडा होकर के तेल फिर से मेन टैंक में चला जाता है और जब तेल गर्म होता है तब ऊपर से फिर से रेडिएटर की नली में आ जाता है । रेडिएटर की नली में हवा के संपर्क में आने से फिर से ठंडा होकर के मेन टैंक में चला जाता है । इस प्रकार से यह प्रक्रिया चलती रहती है ।

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ट्रांसफार्मर में टर्मिनल या Bushing क्या होता है ? Transformer mein terminal yah bushing kya hota hai

यदि करंट को किसी दूर स्थित जगह पर भेजना होता है तब उसे हाई वोल्टेज पर भेजना होता है । यदि उसी हाई वोल्टेज को सीधे घर में सप्लाई कर दिया जाए तो यह बिजली उपकरण को जला देता है । उस हाई वोल्टेज को कम करने के लिए टर्मिनल का उपयोग किया जाता है ।

ट्रांसफार्मर के टर्मिनल को टर्मिनल ना केह करके Bushing कहा जाता है । यह दो प्रकार का होता है ।
1 . Low voltage ( LV )
2 . heigh voltage ( HV )

ट्रांसफार्मर में कौन-कौन सी हानियां होती है ? Transformer mein kaun kaun si haniyan hoti hai

ट्रांसफार्मर की हानियाँ | Transformer losses in hindi | Transformer Iron Loss | Transformer Copper Loss . Transformer winding and friction losses.

लोहा हानियां ( iron or core losses )

लोहा हानि को कोर हानि भी कहा जाता है । लोहा हनी दो प्रकार का होता है ।
1 . एडी करंट लॉस ( Eddy current losses )
2 . Hysteresis losses

Eddy current losses . Eddy Current Loss In Hindi

यदि ट्रांसफार्मर के कोर में कहीं भी थोड़ी सी भी जगह बच जाती है तो उसमें भंवर धाराएं उत्पन्न होती है ।

भंवर धाराएं एक्स्ट्रा करंट होता है जो कि ओरिजिनल करंट के विपरीत चलता है ।

Hysteresis losses . Hysteresis loss in Hindi.

जब किसी धातु में करंट की सप्लाई करते हैं तब उसमें चुंबकीय गुण आ जाता है । और जब करंट की सप्लाई को रोकते हैं तब चुंबकीय गुण चला जाता है । क्योंकि ट्रांसफार्मर एसी करंट पर काम करता है । जिससे कि करंट की दिशा बार-बार बदलती रहती है ।

जिसके कारण कोर एक बार मैग्नेटिक होगा तथा एक बार मैग्नेटिक नहीं होगा । इलेक्ट्रॉन की दिशा भी बार-बार बदलती रहती है । जिससे की एक उष्मा उत्पन्न होती है । जिसे हम Hysteresis losses कहते हैं ।

Hysteresis losses को रोकने के लिए सिलिकॉन स्टील कोर का प्रयोग किया जाता है । यह सबसे अच्छा कोर माना जाता है ।

Ohmic loss . कोपर लोस ( copper Loss ) या फिर प्रतिरोध लॉस

इस लोस को कोपर लोस ( copper Loss ) या फिर प्रतिरोध लॉस भी कहा जाता है ।
जब कोई धारा किसी चालक से होकर गुजरती है तब उसमें मौजूद प्रतिरोध धारा को रोक करके उसका प्रतिरोध करता है । जिसके फलस्वरूप ऊर्जा उत्पन्न होती है । उस उर्जा को ही प्रतिरोध लॉस कहते हैं ।

Stray Losses चुंबकीय फ्लक्स के कारण Stray Losses .

यह लॉस चुंबकीय फ्लक्स के कारण होता है । चुंबकीय फ्लक्स लॉस ना हो इसको रोकने के लिए वाइंडिंग की एक परत को ठीक दूसरी परत के ऊपर रखा जाता है ।

फ्लक्स के बीच में गैप होने के कारण तथा फ्लक्स के लीकेज होने के कारण उत्पन्न होने वाले लॉस को Stray Losses कहा जाता है ।

Dielectric Losses डाइलेक्ट्रिक लॉस

इंसुलेटर के कारण उत्पन्न होने वाले लोस को डाइलेक्ट्रिक लॉस कहते हैं ।

मैग्नेटोस्ट्रिक्शन लॉस ( Mangneto Striction Losses ) – यह घटना आपके साथ कई बार हो चुकी होगी । जब भी आप किसी ट्रांसफार्मर के पास में जाते हैं तब उस ट्रांसफार्मर में से एक आवाज आपको सुनाई देती है ।

यह ऊर्जा भी किसी ना किसी रूप से बिजली से ही उत्पन्न होती है । ट्रांसफार्मर से जो साउंड उत्पन्न होती है । उसे एक लॉस होता है । जिसे हम मैग्नेटोस्ट्रिक्शन लॉस कहते हैं ।

ट्रांसफार्मर के प्रकार । ट्रांसफार्मर इन हिंदी । ट्रांसफार्मर कितने प्रकार के होते है ? Transformer kitne prakar ke hote Hain.

Transformer ke prakar : आईय अब जानते हैं कि ट्रांसफार्मर कितने प्रकार के होते हैं यानी कि ट्रांसफार्मर के प्रकार कितने होते हैं । ट्रांसफार्मर कई प्रकार ( type of Transformer ) के होते हैं । मुख्य रूप से ट्रांसफार्मर तीन प्रकार के होते हैं ।

ट्रांसफार्मर के मुख्य तीन प्रकार कौन-कौन से हैं ? Transformer ke mukhya teen prakar.

ट्रांसफार्मर मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं । जिनके नाम नीचे दिए गए हैं ।

1 . आउटपुट वोल्टता के आधार पर ट्रांसफार्मर
2 . कोर की संरचना के आधार पर ट्रांसफार्मर
3 . फेज की संख्या के आधार पर ट्रांसफार्मर ।

आउटपुट वोल्टता के आधार पर ट्रांसफार्मर कितने प्रकार के होते हैं ? Output Volta ke Aadhar per transformer ke prakar

आउटपुट वोल्टेज ( output voltage ) के आधार पर ट्रांसफार्मर कितने प्रकार के होते हैं यानी कि हम ट्रांसफर में जो भी धारा प्रवाहित करते हैं । उसके आउटपुट के रूप में कितने वोल्टेज हमें प्राप्त होती है । इसके आधार पर ट्रांसफार्मर कितने प्रकार के होते हैं । आउटपुट वोल्टेजता के आधार पर ट्रांसफार्मर दो प्रकार के होते हैं ।

आउटपुट वोल्टेजता के आधार पर ट्रांसफार्मर के प्रकार

1 . स्टेप अप ट्रांसफॉर्मर ( step up transformer )
2 . स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर ( step down transformer )

कोर की संरचना के आधार पर ट्रांसफार्मर कितने प्रकार के होते हैं ? Core ki sanrachna ke Aadhar per transformer ke prakar .

आइए अब जानते हैं कि ट्रांसफार्मर के अंदर मौजूद कोर की संरचना के आधार पर ट्रांसफार्मर कितने प्रकार के होते हैं । कोर की संरचना के आधार पर ट्रांसफार्मर 2 प्रकार के होते हैं । कोर की संरचना के आधार पर ट्रांसफार्मर के प्रकार के नाम नीचे दिए गए हैं ।

1 . शेल टाइप ट्रांसफार्मर – shell type transformer
2 . कोर टाइप ट्रांसफार्मर – core type transformer

फेज की संख्या के आधार पर ट्रांसफार्मर कितने प्रकार के होते हैं ? Page ki sankhya ke Aadhar per transformer ke prakar

फेज की संख्या के आधार पर ट्रांसफार्मर दो प्रकार के होते हैं । फेज की संख्या के आधार पर ट्रांसफार्मर सिंगल पेज और थ्री पेज का होता है ।

1 . सिंगल फेज ट्रांसफार्मर – single phase transformer
2 . थ्री फेज ट्रांसफार्मर – three phase transformer

ट्रांसफार्मर क्या होता है। ट्रांसफार्मर में कौन-कौन सी हानियां होती है ?

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