वास्तु शास्त्र के अनुसार पुत्र प्राप्ति के उपाय । Vastu shastra ke anusar putra prapti ke upay
वास्तु शास्त्र के अनुसार पुत्र प्राप्ति के उपाय । Vastu shastra ke anusar putra prapti ke upay

संतान प्राप्ति में वास्तु शास्त्र का बड़ा हाथ होता है । कभी कबार खराब वास्तुशास्त्र के कारण भी संतान उत्पत्ति में बाधा उत्पन्न होती है और संतान उत्पन्न नहीं होती है । हमें लगता है कि हमारे शरीर में किसी गड़बड़ी या बीमारी के कारणों से हो रहा है। जबकि उसका असली कारण वास्तु दोष होता है ।

यदि आपके वास्तु शास्त्र के कारण संतान उत्पति में बाधा आ रही है तब आपको हम नीचे कुछ उपाय बता रहे हैं इन उपाय को करके आप अपने घर का वास्तु दोष खत्म कर सकते हैं । जिससे कि संतान प्राप्ति में आने वाली बाधाएं दूर हो जाएगी ।

वास्तु शास्त्र में ईशान कोण संतान प्राप्ति में बाधा कैसे बन सकता है ? santan prapti mein Ishan kon ka mahatva .

यदि आपके घर के ईशान कोण में किसी भी प्रकार का वास्तु दोष है तो यह वास्तु दोष आपके संतान प्राप्ति में बाधा बन सकता है । ईशान कोण हमारे घर का उत्तरी पूर्वी कोना होता है । ईशान कोण ऊंचा है , भारी निर्माण किया हुआ है या इंसान कोण में सीढ़ियां हो या फिर ईशान कोण में बाथरूम हो तो यह वास्तु दोष होते हैं ।‌ इन वास्तु दोष के कारण घर में संतान प्राप्ति में बाधा आती है सबसे पहले आपको इस प्रकार के दोष को खत्म करना होगा तभी आप संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी कर पाएंगे ।

वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार संतान प्राप्ति में बाधा कैसे हो सकता है ? Vastu shastra mein santan prapti mein main mukhya dwar ka mahatva .

घर के मुख्य द्वार की स्थिति का वास्तु शास्त्र के हिसाब से संतान प्राप्ति पर बहुत ही गहरा असर पड़ता है । यदि आपके घर का मुख्य द्वार इन दिशाओं में है तो आप को संतान प्राप्ति में कोई भी बाधा उत्पन्न नहीं होगी ।

घर का मुख्य द्वार पश्चिम में पुष्पदंत पद संख्या 20 पर है  या उत्तर दिशा में मुख्य पद संख्या  27 या  उत्तर में ही सोम/कुबेर पद संख्या  29 में खोले जाने पर पुत्र संतान होने की सम्भवना प्रबल रूप से बढ़ जाती है। घर का मुख्य द्वार अगर पूर्व दिशा के पर्जन्य पद संख्या  2 में खुलता हो तो कन्यायें जन्म लेती हैं। 

अब तो आप जान ही गए होंगे कि वास्तु शास्त्र का संतान प्राप्ति में कितना बड़ा योगदान होता है ।