भारतीय इंजीनियरिंग के अद्भुत नमूने इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है चिनाब रेलवे ब्रिज

इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है चिनाब रेलवे ब्रिज, कश्मीर घाटी में बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा पुल

विश्व के सबसे ऊंचे रेल ब्रिज चिनाब पुल की खासियत

भारतीय इंजीनियरिंग के अद्भुत नमूने इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है चिनाब रेलवे ब्रिज

भारतीय इंजीनियरिंग के अद्भुत नमूने इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है चिनाब रेलवे ब्रिज, कश्मीर घाटी में बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा पुल विश्व के सबसे ऊंचे रेल ब्रिज चिनाब पुल की खासियत

आज हम भारत के कश्मीर घाटी में बंद रहे चिनाब रेलवे बृज की बात करेंगे जो कि इंजीनियरिंग का एक नायाब ही नमूना है । यह दुनिया का सबसे ऊंचा पुल भी है । कश्मीर घाटी में बन रहा चिनाब रेलवे ब्रिज इंजीनियरिंग का एक बेमिसाल तथा अद्भुत नमूना है ।

यह रेल ब्रिज भारत के रेलवे द्वारा बनाया जा रहा है जो कि कश्मीर को भारत के अन्य हिस्सों से जोड़ने का काम करेगा । इसका निर्माण कार्य 2021 तक पूरा हो जाने की संभावना है ।

मानव के सभ्यता की यात्रा में पुल एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है । पुल एक हिस्से से दूसरे हिस्से को जोड़ने का काम भी करता है । पहले के समय हम पेड़ के तनों से भी पुल बनाते थे ।

इसी पेड़ों की मदद से हम नाले के पुल को पार करते थे । लेकिन आज विज्ञानिक ने जो तरक्की की है उसकी बदौलत हम पुल बनाने में कामयाब रहे हैं ।

आज हम एक से एक बढ़कर एक तथा अच्छे से अच्छा पुल बनाने में सक्षम है । यह विज्ञान का ही कमाल है । जिसके बदौलत हम आज इस तरह के कारनामे कर पा रहे हैं । एक पुल की वजह से हम दुर्गम से दुर्गम इलाके को भी एक दूसरे से जोड़ सकते हैं ।

यह कश्मीर के उधमपुर से बारामुला तक बन रहा है । यह रेलवे ट्रैक 231 किलोमीटर का होगा । इसे उधमपुर श्रीनगर बारामुला प्रोजेक्ट के नाम से भी जाना जाता है ।

यह पुल चीन के सबसे ऊंचे पुल के रिकॉर्ड को भी तोड़ने का काम करता है । यह पुल 1315 मीटर लंबा है । यह उत्तर की तरफ से 650 मीटर लंबा है और इसके मेहराब की लंबाई 680 मीटर है । नदी तल से इसकी ऊंचाई 359 किलोमीटर है । जबकि नदी के पानी से इसकी ऊंचाई 322 मीटर है ।

चेनाब ब्रिज इंजीनियर की कई चुनौतियों से भरा एक नमूना है । इसका 111 किलोमीटर का हिस्सा बहुत ही चुनौती भरा है । यह पुल कुछ हिस्सों में सीधा है तो कुछ हिस्सों में मेहराब आकार का है ।

मेहराब के आकार का पुल भारतीय रेलवे ने पहली बार तैयार किया है । इसकी संरचना में बहुत ही खास तरह के मेटेरियल का उपयोग किया जा रहा है । E250C ग्रेड के उच्च गुणवत्ता का स्टील उपयोग में लाया जा रहा है । इस तरह के स्टील में शून्य से निचे के तापमान पर स्टील में कठोरता आ जाती है । जिससे कि यह अत्यंत ही ठंडे वातावरण में कोमल बना रहता है ।

मेहराब के निर्माण में जेड ग्रेड स्टील का उपयोग किया जा रहा है । इस क्षेत्र की सबसे बड़ी कमी की बात की जाए तो हिमालय की कमजोर चटाने हैं । इसमें चट्टानों के बीच में बहुत सारी दारारें हैं । जिनको भरने के बाद में मजबूत किया गया है ।

इस पुल का निर्माण इस तरह से किया गया है कि यह जोन 5 में आने वाले भूकंप की तीव्रता को भी सहन कर सकता है । यानी कि सबसे तेज भूकंप की तीव्रता को भी यह आसानी से झेल सकता है । और यह 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति को भी आसानी से झेल सकता है ।

हवा की स्पीड की बात करें तो यह हवा की 260 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार को भी आसानी से झेल लेता है । यह विश्व में सातवें नंबर का सबसे बड़ा मेहराब के आकार का पुल है ।

एफिल टावर के बराबर के ऊंचाई के इस पुल की आयु की बात करें तो यह 120 साल तक टिका रह सकता है । इस पुल के निर्माण के बाद धरती का स्वर्ग कहे जाने वाला कश्मीर देश के अन्य हिस्सों से जुड़ पाएगा ।