मुझे इतनी फुर्सत कहाँ थी , कि मैं तकदीर का लिखा देखता फिरता, बस अपनी माँ की मुस्कुराहट देख कर समझ जाता था की मेरी तकदीर बुलँद है।

जज्बात अलग है पर बात तो एक हैं, उसे माँ कहू या भगवान बात तो एक है।