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भेड़िए तथा भालू किस प्रकार गंध से शिकार का पता लगाते हैं

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एनिमल सुपरसेंस के इस एपिसोड में हम जानेंगे कि भेड़िए तथा भालू किस प्रकार गंध से शिकार का पता लगाते हैं तथा अपने इलाके का निर्धारण करते हैं किस प्रकार यह अपने इलाके की सीमा का निर्धारण करते हैं तथा उसमें अपना साम्राज्य चलाते हैं यदि कोई अन्य जानवर उनकी सीमा में घुस जाए तो वह क्या करते हैं

माना जाता है कि किसी भी भेड़िए की सुनने की ताकत इंसानों से 100 गुना ज्यादा होती है | इसकी ही मदद से वह अपने झुंड के दूसरे सदस्यों तथा शिकार को ढूंढता है | इसी गंध से वह अपने इलाके में किसी दूसरे भेड़िए की मौजूदगी का पता लगाते हैं |

वह कितने भेड़िए थे नर है या फिर मादा थे | वह कब आए थे | इसके बारे में सब कुछ पता चल जाता है | क्योंकि जानवरों में गंध से पता लगाने की क्षमता बहुत ही तेज होती है |

भेड़िए के शरीर में कई खास गंध ग्रंथियां होती है | यह इसकी पीठ तथा पूछ से करीब 3 इंच की दूरी पर होती है | इन ग्रंथियों से पैदा हुई गंध अंगुलियों के निशानों की गंध की तरह अलग अलग होती है | हर भेड़िए की गंध अलग होती है |

भेड़िए इन्हीं ग्रंथियां की वजह से सीमाओं का निर्धारण तथा रास्ता की निशानदेही करते हैं | इसे आप इसका विजिटिंग कार्ड भी कर सकते हैं | यह गंध इन से 100 मीटर की दूरी पर भी हो सकते हैं | इंसान इनके व्यवहार का फायदा उठाता आया है |

गंध सूंघने में दूसरे नंबर पर कहा जा सकता है भालू को | भालू की भी गंध सूंघने की शक्ति बड़ी ही कमाल की होती है | कहते हैं कि भालू की नजर कमजोर होती है | लेकिन यह सच नहीं है | वैसे यह गंध पर ज्यादा निर्भर करते हैं |

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सूंघने की अपनी जबरदस्त काबिलियत के बदौलत ही अपनी खुराक ढूंढ लेते हैं जैसे कि भालू किसी मरे हुए जानवर का पता 35 किलोमीटर दूर से ही लगा लेते हैं | गंध के जरिए ही भालू अपने साथी को ढूंढते हैं तथा अपने शिकार पर नजर रखते हैं तथा मा पता लगाती है बच्चों का तथा गंध के जरिए ही एक दूसरे से बात भी करते हैं |

अपने आसपास की घास पर अपनी गंध छोड़कर के आसपास के दूसरे भालू के लिए एक निशान बना देते हैं | जिससे कि उन्हें पता चल जाता है कि यह इलाका किसी दूसरे भालू का है | किसी भी भालू का मस्तिष्क इंसान के मुकाबले एक तिहाई होता है | जबकि गंध को निर्धारित करने वाला हिस्सा 5 गुना ज्यादा बड़ा होता है | भालू का दिमाग ही खास नहीं होता है |

इसकी नाक भी बड़ी ही कमाल की होती है | करीब डेढ़ सेंटीमीटर लंबी नाक से आसानी से किसी भी गंध का पता लगा लेते हैं | इसकी नाक पर सैकड़ों छोटी-छोटी मसल्स होती है | यह इन मसल्स को उसी तरह चला सकते हैं जिस प्रकार हम इंसान अपनी अंगुली वह चला सकते हैं | इंसान के मुकाबले इनके नाक का अंदरूनी हिस्सा भी काफी बड़ा होता है | इसमें सैकड़ों रिसेप्टर होते हैं |

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